ठंड में खुले आसमान तले कर रहे हैं बसर

Published at :12 Jan 2018 6:18 AM (IST)
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ठंड में खुले आसमान तले कर रहे हैं बसर

महादलितों को नहीं मिल रही ठंड से निजात मुंगेर : ठंड इस बार कहर बरपा रही है. लोगों का जीना मुश्किल हो गया है और गांव से शहर तक कांप उठा है. सबसे बदहाल स्थिति गरीब एवं फुटपाथ पर रहने वाले लोगों की है. जबकि महादलित परिवार के लिए यह ठंड काटना मुश्किल हो रहा […]

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महादलितों को नहीं मिल रही ठंड से निजात

मुंगेर : ठंड इस बार कहर बरपा रही है. लोगों का जीना मुश्किल हो गया है और गांव से शहर तक कांप उठा है. सबसे बदहाल स्थिति गरीब एवं फुटपाथ पर रहने वाले लोगों की है. जबकि महादलित परिवार के लिए यह ठंड काटना मुश्किल हो रहा है. प्रशासनिक स्तर पर अबतक जो अलाव अथवा कंबल की व्यवस्था की गयी है वह ऊंट के मुंह में जीरा है. सरकार भले ही महादलितों के कल्याण के लिए योजना संचालित कर रही. लेकिन स्थिति आज भी दुष्यंत कुमार की उस पंक्ति को याद दिलाता है कि ” कहां तो तय था चिरागां हर घर के लिए, यहां चिराग मयस्सर नहीं शहर के लिए…” .
हवेली खड़गपुर. कपकपाती ठंड में भी नगर मुख्यालय स्थित खड़गपुर हाट परिसर में दर्जनों ऐसे महादलित परिवार हैं जो खुले आसमान के नीचे भोजन बनाने से लेकर अपने सभी दैनिक कार्य करते हैं. समृद्ध परिवार तो कड़ाके की ठंड में रजाई से निकलना तक पसंद नहीं कर रहे. लेकिन इन दर्जनों महादलित परिवार को प्रतिदिन कड़ाके की ठंड में भी खुले आसमानों के नीचे ही अपना जीवन यापन करना करना पड़ता है. महादलित परिवार के दरोगी तूरी, लक्ष्मी तूरी, फंटूश तूरी, दिनेश तूरी ने बताया कि इस कड़ाके की ठंड में दिनभर घूम-घूम कर जहां-तहां से लकड़ी चुन कर लाते हैं और आग जला कर ठंड में राहत पाते हैं.
सरकारी स्तर पर अबतक किसी प्रकार की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं करायी गयी है. जिससे ठंड में राहत पाया जा सके. विदित हो कि दर्जनों महादलित परिवार खड़गपुर हाट में पिछले 30 वर्षों से स्थायी रूप से अपना ठिकाना बनाये हुए हैं. लेकिन आजतक इनके इर्द-गिर्द किसी प्रकार की कोई मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था सरकारी स्तर पर सुनिश्चित नहीं हुई है.
संग्रामपुर. हाड़ कपा देने वाली ठंडी हवा और तापमान करीब 6 डिग्री सेल्सियस, सुबह सड़कों पर पसरा सन्नाटा, बंद दरवाजे के भीतर सिमटी जिंदगी बयां कर रही है कि इस ठंड से हर कोई त्रस्त है. हर लोगों की जिंदगी आग के पास सिमट गया है. हल्की गुलाबी धूप निकलती है लेकिन सर्द हवाओं के बीच वह भी फीकी पड़ रही. संग्रामपुर से विस्थापित होकर बेलहरनी नदी किनारे चन्दनियां मुसहरी में इन्दिरा आवास आवंटित कर बसाये गये मुसहर जाति के परिवार को देख कर प्रतीत होता है कि वास्तव में ईश्वर ही गरीबों की जिंदगी के खेवनहार हैं. वही नदी से लोटे में जल लेकर आ रही 60 वर्षीय महिला सामंती देवी ने बताया कि बाबू यहां तक आय के मरी गेलों. न रास्ता, न पीने का पानी, न तो तन ढकने का पूरा वस्त्र, उपर से पछिया हवा और हाड़ कंपाती ठंड, बगल में बैठी जिंदगी की आखिरी पड़ाव पर मौजूद सविया देवी ने कहा कि ठंड से मुकाबला करना तो दूर खाने पर भी आफत है.
धरहरा. प्रखंड के महादलित टोला जगदीशपुर में ठंड के प्रकोप से महादलित घरों में ही दुबके हैं. सुबह से ही न्यूनतम तापमान 6 डिग्री सेल्सियस होने के कारण लोग अलाव जला कर सेंकते रहे. धरहरा महरना पंचायत के जगदीशपुर महादलित बस्ती में बबीता देवी अपने पुत्री दो वर्षीय ईशा को गोद में लेकर अलाव तापते नजर आये. कारेलाल मांझी, रामधनी मांझी, हीरालाल मांझी, पंकज कुमार, पिंकू कुमार ने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा महादलित बस्ती में कोई भी अलाव की व्यवस्था नहीं की गयी है. प्रशासन द्वारा इस ठंड भरी मौसम में कोई राहत सामग्री नहीं दिया गया. जिसके कारण महादलित बस्ती के लोग किसी प्रकार से ठंड से बच रहे है. जगदीशपुर पहाड़ी के पास अवस्थित महादलित बस्ती जगदीशपुर में कोई भी सरकारी व्यवस्था नहीं दिखा. वहीं जानवर भी इस ठंड भरी मौसम में परेशान हैं और ठंड का कहर झेलने को विवश हैं.
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