उगहो हो सुरुज देव, अरघ के बेर...

Published at :26 Oct 2017 6:01 AM (IST)
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उगहो हो सुरुज देव, अरघ के बेर...

आस्था. महापर्व छठ का खरना संपन्न, अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ आज मुंगेर : महापर्व छठ के दूसरे दिन बुधवार को छठ व्रतियों ने खरना किया़ व्रतियों ने पूरे विधि विधान के साथ भगवान भास्कर को खीर का भोग लगाया और प्रसाद ग्रहण किया. साथ ही अपने बंधु-बांधव को भी प्रसाद वितरित किया़ खरना के साथ […]

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आस्था. महापर्व छठ का खरना संपन्न, अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ आज

मुंगेर : महापर्व छठ के दूसरे दिन बुधवार को छठ व्रतियों ने खरना किया़ व्रतियों ने पूरे विधि विधान के साथ भगवान भास्कर को खीर का भोग लगाया और प्रसाद ग्रहण किया. साथ ही अपने बंधु-बांधव को भी प्रसाद वितरित किया़ खरना के साथ ही व्रतियों के 36 घंटे का निर्जला उपवास भी प्रारंभ हो गया़ अब हर तरफ छठि मैया के पावन गीत ही गुंजायमान हो रहे हैं. छठ पर्व के तीसरे दिन गुरुवार को श्रद्धालु नर-नारियों द्वारा अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ अर्पित किया जायेगा तथा शुक्रवार को उदीयमान सूर्य को अर्घ देने के उपरांत ही व्रत का निस्तार होगा़ वहीं छठ पूजा को लेकर बाजार में पूजन सामग्री व फल की खरीदारी को लेकर देर शाम तक श्रद्धालुओं की भारी भीड़ लगी रही़
छठ व्रतियों ने किया खरना : छठ व्रत में खरना का बड़ा ही महत्व है. खरना के साथ ही व्रती का निर्जला उपवास भी प्रारंभ हो जाता है. छठ व्रतियों ने पूरे नियम-निष्ठा के साथ पूजा के दूसरे दिन संध्याकाल में भगवान भास्कर को खीर का भोग लगाया़ त्योहार वाले घरों में सुबह से ही महिलाएं पूजा के लिए तैयार किये गये चूल्हे पर ठेकुआ-पकवान सहित अन्य प्रसाद बनाने की तैयारी में जुट गयी़ खरना के प्रसाद के लिए श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान कर गंगाजल अपने घर ले गये. इसके बाद खरना का प्रसाद बनाने की तैयारी शुरू कर दी गयी. अलग-अलग जगहों पर सुविधानुसार प्रसाद में चावल, चना दाल, घी, चुपड़ी रोटी, गुड़ से बना रसिया व खीर बनाया गया़ वहीं गोधुली बेला के समय व्रति महिलाओं द्वारा भगवान भास्कर की पूजा-अर्चना के बाद तैयार किये गये प्रसाद का भोग लगाया गया़ व्रती के प्रसाद ग्रहण करने के बाद सभी लोगों ने सामूहिक रूप से प्रसाद ग्रहण किया़
आज घाटों पर उमड़ेगी भीड़
महापर्व छठ के मौके पर गुरुवार को श्रद्धालु नर-नारी पूरे श्रद्धा व भक्ति के साथ अस्ताचल भगवान भास्कर को अर्घ दान करेंगे. इसके लिए मुंगेर मुख्यालय के उत्तरवाहिनी विभिन्न गंगा तटों के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में पूरी तैयारी की गयी है. मुंगेर शहर के कष्टहरणी घाट, लाल दरवाजा घाट, जहाज घाट, बबुआघाट, सोझीघाट, दुमंठा, कंकड़ घाट, सहनी घाट, बेलवा घाट, हेरूदियारा घाट की विशेष साफ-सफाई व सजावट की गयी है. इन घाटों पर ही गुरुवार एवं शुक्रवार को श्रद्धालु भगवान भास्कर को अर्घ दान करेंगे. मुंगेर जिले के भौगोलिक स्थिति के कारण काफी संख्या में लोग भगवान भास्कर को अर्घ अर्पित करने के लिए गंगा घाटों पर ही चले जाते हैं. किंतु वैसे श्रद्धालु जिनका घर गंगा घाटों से अधिक दूरी पर स्थित है, वे अपने आस-पड़ोस के तालाब, नदी व नहर पर जाकर अर्घ अर्पित करते हैं. हालांकि कई जगहों पर तो लोग तालाब-नदी के अभाव में अपने घर-आंगन व खेतों में ही गड्ढ़ा खोद कर छठ घाट तैयार किये हैं. जिसमें भरे पानी के बीच व्रति खड़े होकर भगवान आदित्य की आराधना करेंगे़
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