मुंगेर जिले में एंटी लैंड माइंस वाहन की निकल रही हवा
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :11 Sep 2017 12:36 PM (IST)
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नक्सली क्षेत्र में गश्ती के लिए पांच एंटी लैंड माइंस वाहनें हैं उपलब्ध मुंगेर : मुंगेर जिला नक्सल प्रभावित क्षेत्र में शुमार है. समय-समय पर नक्सली बड़ी वारदात को अंजाम देकर अपनी उपस्थिति का एहसास कराते रहे हैं. नक्सलियों की बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए जहां भीमबांध में सीआरपीएफ कैंप खोला गया. वहीं खड़गपुर, शामपुर […]
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नक्सली क्षेत्र में गश्ती के लिए पांच एंटी लैंड माइंस वाहनें हैं उपलब्ध
मुंगेर : मुंगेर जिला नक्सल प्रभावित क्षेत्र में शुमार है. समय-समय पर नक्सली बड़ी वारदात को अंजाम देकर अपनी उपस्थिति का एहसास कराते रहे हैं. नक्सलियों की बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए जहां भीमबांध में सीआरपीएफ कैंप खोला गया. वहीं खड़गपुर, शामपुर एवं जमालपुर में एसटीएफ की तैनाती की गयी. साथ ही भारत सरकार ने नक्सली विस्फोट एवं हमला से पुलिस कर्मियों को बचाने के लिए मुंगेर पुलिस को कुल पांच एंटी लैंड माइंस वाहन दिया है. लेकिन रखरखाव एवं देखभाल के अभाव में इन वाहनों का खस्ता हाल है.
एंटी लेंड माइंस वाहनों का है खस्ता हाल : नक्सली विस्फोट से पुलिस को बचाने के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2011 में दो एंटी लैंड माइंस वाहन दिया था.
जबकि वर्ष 2013, 2014 एवं नवंबर 2015 में एक-एक एंटी लैंड माइंस वाहन मुंगेर पुलिस को दिया. लेकिन रखरखाव के अभाव में वाहन जर्जर स्थिति में पहुंच गया है. हमेशा एक दो वाहन खराब ही रहता है. बताया जाता है कि शामपुर ओपी को एक एंटी लैंड माइंस वाहन दिया गया है. जो हमेशा ओपी के सामने खड़ी रहती है. कहा जा रहा है कि रखरखाव के अभाव में वाहन का खस्ता हाल है. वाहन तो स्टार्ट होता है लेकिन उसमें प्रेशर ही नहीं है. जिसके कारण वाहन सड़कों पर रेंगता है. जबकि गंगटा थाना के एंटी लैंड माइंस का वाहन टायर के अभाव में थाना की शोभा बढ़ा रहा है. महज एक बैटरी के अभाव में
गश्ती होती है प्रभावित
धरहरा, शामपुर, हवेली खड़गपुर, गंगटा थाना को नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में गश्ती करने के लिए एंटी लैंड माइंस वाहन दिया गया है. ताकि क्षेत्र में गश्ती के दौरान नक्सलियों के विस्फोट व हमला में पुलिसकर्मियों को बचाया जा सके. लेकिन वाहनों के जर्जर स्थिति के कारण गश्ती में पुलिस को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. कोई भी थानेदार वाहनों के संबंध में कुछ बताने को तैयार नहीं होते है. उनका सीधा कहना होता है कि वाहन चलता है. इससे अधिक कुछ जानकारी लेनी है तो पुलिस अधीक्षक से जानकारी लें.
कहते हैं पुलिस अधीक्षक
पुलिस अधीक्षक आशीष भारती ने कहा कि पांचों लैंड माइंस वाहन दुरुस्त हैं और सड़कों पर चल रहे हैं. गंगटा थाना के वाहन में टायर का दिक्कत है. जिसे तत्काल बदलने का निर्देश दिया गया है. वाहनों की रेगुलर जांच करायी जाती है.
2005 में विस्फोट में हुई थी तत्कालीन एसपी की मौत
5 जनवरी 2005 को मुंगेर के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक केसी सुरेंद्र बाबू सहित छह पुलिसकर्मियों को भीमबांध के रास्ते में लैंड माइंस विस्फोट कर उड़ा दिया गया था. यह घटना तब हुई जब एसपी एक मामले की तहकीकात कर नक्सल प्रभावित पेसरा गांव से भीमबांध के रास्ते खड़गपुर लौट रहे थे.
तभी से मुंगेर पुलिस को एंटी लेंड माइंस की जरूरत महसूस होने लगी थी. देर से ही सही लेकिन भारत सरकार ने पांच एंटी लैंड माइंस मुंगेर पुलिस को दिया. कहा जाता है कि वाहन के रखरखाव एवं तेल के खपत की राशि भी भारत सरकार द्वारा ही दिया जाता है. बावजूद इसके वाहनों का रखरखाव ढंग से नहीं हो रहा है. जिसके कारण वाहन जर्जर होता चला जा रहा है.
लड़ैयाटांड ओपी में वाहन यूं ही खड़ा रहा. पांच-छह दिन पूर्व ही वाहन में बैट्री लगाया गया. जिसके बाद वह सड़कों पर चलने लायक हुई है.
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