Madhubani: राजनगर कॉलेज में मैथिली भाषा-साहित्य और मिथिला संस्कृति पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी, 75 विद्वान हुए शामिल
अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में शामिल विद्वान | Prabhat Khabar Network
राजनगर के विश्वेश्वर सिंह जनता महाविद्यालय में मैथिली भाषा-साहित्य और मिथिला संस्कृति पर एक दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया. इस संगोष्ठी में देश-विदेश से करीब 75 विद्वानों ने भाग लिया और विभिन्न उप-विषयों पर अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए. संगोष्ठी का उद्देश्य मैथिली भाषा और मिथिला की सांस्कृतिक परंपराओं के वैश्विक विस्तार की संभावनाओं पर विचार-विमर्श करना था.
Madhubani News: राजनगर स्थित विश्वेश्वर सिंह जनता महाविद्यालय के स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में देश-विदेश से करीब 75 विद्वानों ने हिस्सा लिया. संगोष्ठी का केंद्रीय विषय वैश्विक परिप्रेक्ष्य में मैथिली भाषा-साहित्य आओर मिथिलाक संस्कृति परम्परा, वर्तमान आ भविष्य रखा गया. इससे जुड़े विभिन्न उपविषयों पर शोध पत्र भी प्रस्तुत किए गए.
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शोध पत्रों को पुस्तक का रूप देने की तैयारी
संगोष्ठी के संयोजक एवं मैथिली विभागाध्यक्ष डॉ राजकुमार राय ने कहा कि शोध पत्रों पर हुई प्रश्नोत्तरी से प्राप्त ज्ञान और विचारों को जोड़कर एक पुस्तक प्रकाशित की जाएगी. उन्होंने इसे अकादमिक क्षेत्र में एक सार्थक प्रयास बताया.
महाविद्यालय के प्रधानाचार्य प्रो. गजेन्द्र प्रसाद गदकर ने उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता की. इस दौरान महाविद्यालय की वार्षिक पत्रिका विश्वेश्वरम् के द्वितीय अंक का लोकार्पण किया गया. साथ ही प्रोफेसर पुष्पलता एवं मालती मिश्र की पुस्तकों का भी लोकार्पण हुआ. प्रोफेसर मनोज शाह की तीन पुस्तकों का लोकार्पण भी किया गया.

नेपाल से पहुंचे वरिष्ठ साहित्यकार ने दिया बीज वक्तव्य
नेपाल की राजधानी काठमांडू से सारस्वत अतिथि के रूप में पहुंचे मैथिली साहित्य के वरिष्ठ साहित्यकार रामभरोस कापड़ि ने उद्घाटन सत्र में संगोष्ठी के विषय पर बीज वक्तव्य प्रस्तुत किया. उनकी अब तक 55 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं.
उन्होंने कहा कि भारत और नेपाल में मैथिली प्रमुखता से बोली, लिखी और पढ़ी जाती है. वर्तमान वैश्विक परिप्रेक्ष्य में कई अन्य देशों में भी मैथिली बोलने वाले लोग बड़ी संख्या में दिखाई देते हैं. उन्होंने मैथिली भाषा और साहित्य के वैश्विक विस्तार की संभावनाओं पर भी विचार रखा.
सत्र का संचालन डॉ पंकज ने किया.
नेपाल, ब्राजील और मुंबई से भी शामिल हुए विद्वान
दो दिवसीय आयोजन में बिहार के विभिन्न विश्वविद्यालयों के अलावा नेपाल, ब्राजील और मुंबई से भी विद्वान शामिल हुए. प्रतिभागियों में मैथिली के प्रसिद्ध साहित्यकार, विश्वविद्यालयों के विभागाध्यक्ष, सहायक प्राध्यापक और शोधार्थी शामिल रहे.
प्रथम तकनीकी सत्र का संचालन ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के शोधार्थी राजनाथ पंडित ने किया. दूसरे तकनीकी सत्र की अध्यक्षता जेएन कॉलेज के प्रधानाचार्य प्रोफेसर फूलो पासवान ने की.
तीसरे सत्र में सारस्वत अतिथि विभा रानी ऑनलाइन जुड़ीं और समकालीन मैथिली उपन्यास के वैश्विक परिप्रेक्ष्य पर अपना वक्तव्य दिया. सत्र की अध्यक्षता ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के मैथिली विभाग के वरीय सहायक प्राध्यापक डॉ सुरेश पासवान ने की.
संगोष्ठी को सफल बनाने में महाविद्यालय के प्राध्यापकों डॉ विशाल, डॉ छोटू पासवान, डॉ सुरेन्द्र कुमार दास, डॉ राजीव शर्मा, डॉ स्मिता, डॉ राम प्रवेश साह, डॉ मीरा कुमारी, डॉ राम पुकार पासवान, प्रधान लिपिक विकास कुमार झा, प्रियंका कुमारी, संजय श्रेष्ठ, परिमल समेत महाविद्यालय परिवार के सदस्यों ने सहयोग किया. जेएमडीपीएल महाविद्यालय के वरीय प्राध्यापक डॉ मनीषकांत की भी सक्रिय उपस्थिति रही.
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