जमीनी विवाद में सात घायल

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जमीनी विवाद में सात घायलझंझारपुर. जमीनी विवाद के कारण हुए हिंसक झड़प में दोनों पक्षों से सात लोग घायल हो अनुमंडलीय अस्पताल में इलाजरत हैं. घायलों में एक पक्ष से तीन लड़की, एक महिला समेत पांच लोग और दूसरे पक्ष से दो पुरुष शामिल हैं. प्रथम पक्ष से देवेंद्र कामति, उनकी पत्नी विमल देवी, 19 […]

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जमीनी विवाद में सात घायलझंझारपुर. जमीनी विवाद के कारण हुए हिंसक झड़प में दोनों पक्षों से सात लोग घायल हो अनुमंडलीय अस्पताल में इलाजरत हैं. घायलों में एक पक्ष से तीन लड़की, एक महिला समेत पांच लोग और दूसरे पक्ष से दो पुरुष शामिल हैं. प्रथम पक्ष से देवेंद्र कामति, उनकी पत्नी विमल देवी, 19 साल की बेटी पूजा कुमारी, पूनम कुमारी, पुष्पा कुमारी व दूसरे पक्ष से योगेंद्र कामति एवं उमेश कामति अस्पताल पहुंचे हैं. इनमें प्रथम पक्ष के देवेंद्र की हालत गंभीर बनी है. घटना के बाबत जानकारी है कि देवेंद्र कामति अपने दलान के पास मवेशी के लिए नादी लगा रहा था. तभी दूसरे पक्ष ने अपनी जमीन बताकर विरोध जताया. कहासुनी, कुछ देर बाद हिंसक झड़प में बदल गई. पीडि़ता विमल देवी ने बताया कि एक ही परिवार के लोग बराबर जमीनी विवाद को लेकर मारपीट करते है. पूर्व में भी दोनों पक्षों में मारपीट हो चुकी है. अस्पताल प्रबंधन के मार्फत स्थानीय पुलिस को फर्द बयान लेने के लिए सूचना दी गई है.बाइक से गिरकर बालक जख्मीझंझारपुर. बाइक से गिरकर 16 वर्षीय बालक मुरारी झा गंभीर रुप से जख्मी हो अनुमंडलीय अस्पताल में ईलाजरत है. वह लखनौर थानाक्षेत्र के उमरी गांव का रहने वाला है. पूर्व प्रमुख की मौत से मातमी सन्नाटाझंझारपुर. बीती रात पूर्व प्रमुख की सड़क दुर्घटना में मौत के बाद गांव में मातमी माहौल उत्पन्न हो गया है. पूर्व प्रमुख ललन सिंह गुरूवार शाम को देवघर जाने वाले थे. देवघर जाने के लिए समान इक्कठा करने के लिए घर से निकले थे. रास्ते में भैरवस्थान थाना के नारायणपुर गांव के पुलिया के समीप ट्रैक्टर व बाइक के आमने सामने की जबरदस्त ठोकर से गंभीर रूप से जख्मी हो गये. स्थानीय व परिजनों ने तत्काल जख्मी अवस्था में भगवतीपुर के निजी क्लीनीक में भरती कराया. जहां प्राथमिक इलाज के बाद उसे मधुबनी सदर अस्पताल रेफर कर दिया. मधुबनी सदर अस्पताल के चिकित्सक द्वारा भी नाजुक स्थिति देखते डीएमसीएच रेफर किया. लेकिन परिजन द्वारा आरबी मेमोरियल में भरती कराया गया. आरबी मेमोरियल अस्पताल के चिकित्सक ने भी नाजुक स्थिति को देखते पीएमसीएच रेफर कर दिया. किन्तु ऐुबुलेंस पर सवार होने से पहले लाल सिंह दुनिया को छोड़ चुके थे. इनकी मौत गुरूवार रात 7:30 बजे के करीब हुई. इस घटना की जानकारी पर गांव सहित पूरे प्रखंड के लोगों को मर्माहत व गमगीन कर दिया. रात एक बजे के करीब जब ककना टोल गांव में पूर्व प्रमुख लाल सिंह की लाश पहुंची, तो अंतिम दर्शन करने वालों हुजुम पहुंचने लगा. बता दें कि लाल सिंह प्रखंड प्रमुख की कुर्सी 2008 में संभाली थी. लाल सिंह के पिता राम चंद्र सिंह दफादार के पद पर थे. 2011 में अवकाश प्राप्त हो चुके है. मां बौआदाई देवी गृहणी है. पत्नी सुनिता देवी, पुत्र नितेश कुमार सिंह, सचिन कुमार सिंह जानकारी मिलने पर बेहोश हो गये. लाल सिंह के भाई ललित कुमार सिंह व चचेरा भाई मनोज कुमार सिंह ने बताया कि भाई कल शाम को देवघर के लिए रवाना होने वाले थे. इसके लिए सुबह में ही कांवर अपने हाथ से बनाया था. देवघर जाने के लिए और समान की व्यवस्था को लेकर बिरौल चौक पर गये थे. मौत की सूचना मिलते ही ग्रामीण देवघर की यात्रा रद कर दिया है. लाल सिंह की मौत की सूचना पर सांसद विरेंद्र कुमार चौधरी , विधायक गुलाब यादब, पूर्व मंत्री नीतीश मिश्र, झंझारपुर प्रखंड प्रमुख अनुप कश्यप, जयमोहन झा, बद्री नाथ मिश्र, पूर्व मुखिया लालू यादव, रैयाम पूर्वी के मुखिया प्रवीन कुमार मिश्र, नरूआर के मुखिया सुजित मिश्र, प्रखंड विकास पदाधिकारी रूपेंद्र कुमार झा, अंचलाधिकारी हेमंत कुमार दास, उपप्रमुख श्याम नारायण यादव आदि ने गहरी शाक संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि लाल सिंह समाज की सेवा के लिए हमेशा तत्पर रहते थे. ट्रांसफार्मर के नीचे चलाते दुकान फोटो: 17परिचय: ट्रांसफार्मर के नीचे ठेला जयनगर. यह कथन बिल्कुल सटीक है कि सतर्कता गई, दुर्घटना हुई. पर जयनगर के कई लोग ऐसे हैं जो अपनी दुकान खतरनाक स्थानों पर चलाते हैं. जयनगर स्टेशन रोड स्थित जीप स्टैंड के समीप ट्रांसफर्मर के नीचे अपनी ठेला लगाकर अपने परिवार का भरण पोषण करने वाले फेरीवाले किसी भी प्रकार के दुर्घटना से बेखबर होकर अपनी दुकान चलाते हैं. ऐसे अनेक दुकानदार हैं जो इस तरह के असुरक्षित स्थानों पर अपनी दुकान चलाते हैं. लेकिन किसी प्रकार का दुर्घटना होने पर विभाग पर अक्रोशित होते हैं, प्रशासन पर दोष मढते हैं और आक्रोशित होकर तोड़फोड़ की घटना को अंजाम देते हैं. जयनगर प्रशासन और स्थानीय निकायों के नाक तले चलने वाली इन दुकानों से पूरा महकमा बेखबर है. उन्हें कोई इन असुरक्षित स्थानों पर दुकान चलाने से रोकता टोकता तक नहीं है.जयनगर में कई ऐसे स्थान हैं जहां दुकानदार अपनी जीविका के लिए जान जोखिम में डाल रहें हैं. प्रशासन की ओर से यदि इन दुकानदारों के लिए सुरक्षित स्थान मुहैया नहीं कराया जाता है तो कम से कम इन्हें सुरक्षित स्थान पर अपनी दुकान चलाने की प्रेरणा अवश्य दी जानी चाहिए ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके.

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