धान का MSP, भूमिहीनों को जमीन और खाद-बीज पर सब्सिडी की मांग, कुमारखंड में किसानों का धरना

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धरना पर बैठे नेता | Prabhat Khabar Network

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किसानों ने कुमारखंड में नौ सूत्री मांगों को लेकर धरना दिया. वे लाभकारी मूल्य, एमएसपी पर धान खरीद और भूमि वितरण जैसे मुद्दों पर तत्काल कार्रवाई चाहते हैं.

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Kumar Khand Farmers Protest: कुमारखंड, मधेपुरा. खेती की लागत बढ़ने, उपज का उचित मूल्य नहीं मिलने और जमीन के पर्चे के बावजूद कब्जा नहीं मिल पाने जैसी समस्याओं को लेकर किसानों और खेतिहर मजदूरों ने आवाज उठायी है. बुधवार को बिहार राज्य किसान सभा की कुमारखंड अंचल कमेटी ने प्रखंड सह अंचल कार्यालय परिसर में एक दिवसीय धरना देकर नौ सूत्री मांगों पर कार्रवाई की मांग की. प्रदर्शनकारियों ने धान की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर सुनिश्चित करने, कृषि उत्पादों का लाभकारी मूल्य दिलाने, भूमिहीन परिवारों को जमीन उपलब्ध कराने और पर्चाधारियों को जमीन पर वास्तविक कब्जा दिलाने जैसे मुद्दे उठाये.

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धरने के बाद मांगों से संबंधित ज्ञापन प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) और अंचलाधिकारी (सीओ) को सौंपा गया. आयोजकों ने कहा कि किसानों और मजदूरों की समस्याओं का शीघ्र समाधान होना चाहिए. मांगों पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में आगे आंदोलनात्मक कार्यक्रम चलाने की चेतावनी भी दी गई.

खेती की लागत बढ़ी, उपज का उचित मूल्य नहीं मिलने का उठाया मुद्दा

अंचल अध्यक्ष सियाराम यादव की अध्यक्षता में आयोजित धरने को संबोधित करते हुए बिहार राज्य किसान सभा के प्रांतीय संयुक्त सचिव रणधीर यादव ने कहा कि खेती की लागत बढ़ने के बावजूद किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है. इससे किसानों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है.

उन्होंने कृषि उत्पादों का मूल्य निर्धारित करने की प्रक्रिया में किसानों की भागीदारी बढ़ाने की मांग की. साथ ही किसान और खेतिहर मजदूरों की समस्याओं के समाधान के लिए सरकार से प्रभावी कदम उठाने की अपील की.

धरने में कृषि उपज के लाभकारी मूल्य का सवाल प्रमुखता से उठाया गया. किसानों के लिए उत्पादन लागत के अनुरूप कीमत और फसल की खरीद की व्यवस्था महत्वपूर्ण मुद्दे रहे. हालांकि, धरने में शामिल वक्ताओं के आरोपों और मांगों के संबंध में संबंधित विभागों का पक्ष उपलब्ध नहीं कराया गया.

धान की खरीद एमएसपी पर कराने और खाद-बीज सस्ती दरों पर देने की मांग

किसान सभा के जिला सचिव अशोक यादव ने धान की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सुनिश्चित करने की मांग की. उन्होंने किसानों को खाद, बीज और कीटनाशक दवाएं अनुदानित दरों पर उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया.

खेतिहर मजदूर यूनियन के जिला सचिव ललन यादव ने पैक्स के माध्यम से धान खरीद में पारदर्शिता बरतने की मांग उठायी. उन्होंने कहा कि खरीद व्यवस्था में किसानों की समस्याओं का समाधान होना चाहिए. मांगों पर कार्रवाई नहीं होने पर जिला सहकारिता कार्यालय का घेराव करने की बात भी कही गई.

धान की खरीद, कृषि सामग्री की उपलब्धता और उपज के उचित मूल्य जैसे मुद्दे किसानों की खेती की लागत और आमदनी से जुड़े हैं. ऐसे में किसान सभा ने इन मामलों में संबंधित व्यवस्था को दुरुस्त करने की मांग की.

भूमिहीन परिवारों को पांच डिसमिल जमीन और पर्चाधारियों को कब्जा दिलाने की मांग

धरने में जमीन से जुड़े सवाल भी प्रमुखता से उठाये गये. सीपीएम के जिला सचिव राजेंद्र यादव ने बसेरा योजना के तहत भूमिहीन परिवारों को पांच डिसमिल जमीन उपलब्ध कराने की मांग की. उन्होंने जमीन का पर्चा प्राप्त कर चुके लोगों को वास्तविक दखल-कब्जा दिलाने के लिए प्रशासन से पहल करने की अपील की.

उन्होंने कहा कि पात्र परिवारों को योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए. आयोजकों के अनुसार, जमीन उपलब्ध कराने और पर्चाधारियों को कब्जा दिलाने से जुड़े मामलों में कार्रवाई जरूरी है.

धरने में शामिल वक्ताओं ने कहा कि किसानों और खेतिहर मजदूरों की समस्याओं की अनदेखी नहीं होनी चाहिए. मांगों की अनदेखी होने पर किसान-मजदूर आंदोलन तेज करने की चेतावनी भी दी गई.

महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार का मुद्दा भी उठा

धरने को संबोधित करते हुए रणधीर यादव ने महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित ‘वोट बचाओ, ज्ञानेश हटाओ’ महारैली में शामिल होने की अपील की.

धरने को कृष्ण कुमार यादव, ललन कुमार, सेमी यादव, जगन्नाथ झा, उमेश यादव, कैलाश मंडल, चंद्रेश्वरी रजक, पन्नालाल यादव, कौशल कुमार राठौर, मनीष कुमार यादव और बौकू शर्मा सहित अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया.

Kumar Khand Farmers Protest: बीडीओ और सीओ को सौंपा ज्ञापन, आगे की कार्रवाई पर टिकी नजर

एक दिवसीय धरना समाप्त होने के बाद किसान सभा की ओर से नौ सूत्री मांगों का ज्ञापन प्रखंड विकास पदाधिकारी और अंचलाधिकारी को सौंपा गया. अब इन मांगों पर प्रशासन की ओर से होने वाली कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी.

आयोजकों ने मांगों पर शीघ्र कार्रवाई की अपील करते हुए कहा कि समाधान नहीं होने पर आगे आंदोलनात्मक कार्यक्रम चलाए जाएंगे. फिलहाल ज्ञापन सौंपे जाने के बाद मांगों पर प्रशासन की कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है.

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