हादसों के सबब बने सड़कों के किनारे

Published at :09 Feb 2017 6:15 AM (IST)
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हादसों के सबब बने सड़कों के किनारे

मधेपुरा-सिंहेश्वर . एनएच-106 पर फ्लैंक की नहीं है व्यवस्था साइकिल सवार छात्र-छात्राएं कभी भी हो सकते हैं खतरनाक हादसे का शिकार मधेपुरा : मधेपुरा से सिंहेश्वर के बीच के तीन किमी शिक्षण संस्थानों से भरे हैं. विश्वविद्यालय मुख्य परिसर सहित कॉलेज, स्कूल और कई कोचिंग संस्थान इस दरम्यान स्थित हैं. इस इलाके में छात्रों के […]

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मधेपुरा-सिंहेश्वर . एनएच-106 पर फ्लैंक की नहीं है व्यवस्था

साइकिल सवार छात्र-छात्राएं कभी भी हो सकते हैं खतरनाक हादसे
का शिकार
मधेपुरा : मधेपुरा से सिंहेश्वर के बीच के तीन किमी शिक्षण संस्थानों से भरे हैं. विश्वविद्यालय मुख्य परिसर सहित कॉलेज, स्कूल और कई कोचिंग संस्थान इस दरम्यान स्थित हैं. इस इलाके में छात्रों के कई छोटे बड़े लॉज भी हैं. ये विद्यार्थी साइकिल से आवागमन करते हैं. एनएच 106 से होकर भी इन्हें आना जाना पड़ता है. सड़क पर गाड़ियों की भरमार है. बड़े वाहन बहुतायत से गुजरते हैं. सड़क की कम चौड़ाई और उपर से फ्लैंक नहीं होने के कारण साइकिल से चल रहे ये विद्यार्थी सड़क के एकदम किनारे कोर पर अक्सर गिर जाया करते हैं. ऐसे में पीछे से आने वाले वाहन के चालक के हाथ में उनकी जिंदगी होती है. यह स्थिति करीब एक दशक में और भयावह होती जा रही है. अगर इस दिशा में जल्दी ही कुछ नहीं किया गया तो छात्र –
छात्राएं अपनी जान से हाथ धो बैठेंगे और उनकी मौत का कारण सड़क हादसा मानकर भुला दिया जायेगा.
पूर्व में हो चुकी है मौत . शहर के बस स्टैंड से सिंहेश्वर की ओर निकलते ही सड़क के दोनों ओर ऐसे पचासों प्वाइंट हैं जहां सड़क के किनारे एकाएक जमीन काफी नीची है. इन पर कभी भी दुर्घटनाएं हो सकती है. वर्ष 2012 में शहर के टीपी कालेज के पास एक सड़क हादसे में स्नातक की छात्रा खुशबू कुमारी की मौत ट्रक के पहिये के नीचे आने से हो गयी थी. खुशबू अपनी साइकिल से कॉलेज जा रही थी. उस वक्त शहरवासी काफी आक्रोशित भी हुए थे. सड़क जाम कर दिया गया और युवा छात्र गाड़ियों को जलाने पर आमादा थे. हालांकि प्रशासन ने बात संभाल ली. मामला शांत हो गया. वैसे देखा जाये तो खुश्बू की मौत के लिए ट्रक सीधे तौर पर जिम्मेदार तो था लेकिन एनएच विभाग उससे ज्यादा जिम्मेदार था. खुश्बू साइकिल से सड़क के किनारे हो कर जा रही थी. ट्रक चालक ने पीछे से हार्न दिया और वह सड़क के बिल्कुल किनारे पर आ गयी. सड़क पर फ्लैंक नहीं बने होने के कारण उसकी साइकिल का पहिया फिसल गया है और खुश्बू सड़क पर गिर गयी.
फ्लैंक के नाम डाल दी थी मिट्टी . वर्ष 2013 में एनएच 106 के निर्माण का टेंडर निकाला गया था. निर्माण एजेंसी टॉपलाइन कंस्ट्रक्शन को सड़क बनाने की जिम्मेदारी दी गयी. एजेंसी को एनएच 106 को सिंहेश्वर के डंडारी से लेकर मधेपुरा के राजपुर तक सड़क को फ्लैंक के साथ बनाना था.
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