चचरी पुल आवागमन का सहारा

Published at :03 Jan 2016 1:00 AM (IST)
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चचरी पुल आवागमन का सहारा

उदाकिशुनगंज/फुलौत, मधेपुरा : सरकार व क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि की उदासीनता के कारण अनुमंडल के चौसा प्रखंड अतंर्गत कोसी नदी के कई शाखाओं पर पुल का निर्माण नहीं कराये जाने के कारण आम जनों को बांस से निर्मित चचरी पुल से गुजरना अभिशाप बन गया है. फुलौत गांव के लोगों का चचरी पुलिस के सहारे चलना मानो […]

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उदाकिशुनगंज/फुलौत, मधेपुरा : सरकार व क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि की उदासीनता के कारण अनुमंडल के चौसा प्रखंड अतंर्गत कोसी नदी के कई शाखाओं पर पुल का निर्माण नहीं कराये जाने के कारण आम जनों को बांस से निर्मित चचरी पुल से गुजरना अभिशाप बन गया है. फुलौत गांव के लोगों का चचरी पुलिस के सहारे चलना मानो नियती बन गयी है.

यहां है पुल की जरूरत : फुलौत गांव से आलमनगर व रतवारा की ओर जाने के लिए हाहा धार नदी पार करना पड़ता है. कच्ची सड़क का निर्माण करा दिया गया है. लेकिन उक्त नदी में पुल का निर्माण नहीं कराये जाने के कारण ग्रामीण बांस का चचरी पुल बना कर आवागमन बहाल कर रखा है. इसी तरह फुलौत के तिरासी से सटे कोसी नदी पर भी पुल की जरूरत है. इस जगह से सपनी, अहोती, लाली बासा, झंडापुर वासा आना जाने का मार्ग है.
पुल नहीं रहने के कारण ही ग्रामीणों ने यहां भी चचरी पुल बना कर आते जाते है. जबकि फुलौत गांव के पूर्वी भाग से गुजरने वाली धार पर चचरी पुल ही है. पुल पार कर लोगों का मोरसंडा, बड़ी खाल, करैलिया, खरउआ वासा, श्रीपुर व अजगैबा गांव आना जाना होता है.
टापू बन गया है यह गांव : फुलौत गांव की इतनी अधिक आबादी है दो ग्राम पंचायत में विभाजित किया गया है. तीन तरफ से कोसी से उक्त गांव घिरा हुआ है. यूं कहा जा सकता है फुलौत एक टापु है. बावजूद एक भी नदी पर पुल का निर्माण नहीं होना सरकारी उपेक्षा का गवाह बना हुआ है. कब इस गांव की तसवीर और तकदीर बदलेगी. खुद यहां के लोगों को पता नहीं.
नाव ही एक सहारा : पुल नहीं रहने के कारण खास कर बाढ़ के समय नाव ही यहां के लोगों के लिए सहारा है. जिसके कारण पानी में डूब कर हर वर्ष मौत भी होती है. कुछ वर्ष पूर्व बारात गये एक साथ कई लोगों की मौत कोसी नदी में डूब जाने के कारण हुई थी. उस समय लगा था कि अब पुल निर्माण कराने के लिए सरकारी पहल हो सकेगी,
लेकिन नहीं हुआ. कोसी के कछार पर जीना और उसी में मर जाना अभिशाप बन गया है. फिर भी सरकार की नींद नहीं टूटती है.
इस तरह फुलौत के लोग नरक नुमा जिंदगी जीने को अभिशप्त है.
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