ठाकुरगंज में नल-जल योजना के पंप संचालकों को 3 साल से मानदेय नहीं, अब आंदोलन का अल्टीमेटम

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पम्प संचालक | Prabhat Khabar Network

नल-जल योजना के पंप संचालकों का तीन साल से मानदेय रुका हुआ है, जिससे वे आर्थिक तंगी झेल रहे हैं. योजना के रखरखाव में लापरवाही और ग्रामीणों की शिकायतों से परेशान संचालकों ने जल्द भुगतान न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है.

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Nal Jal Pump Operators Honorarium: ठाकुरगंज में घर-घर पानी पहुंचाने वाली नल-जल योजना के पंप चलाने वाले संचालक खुद आर्थिक परेशानी से जूझ रहे हैं. ठाकुरगंज प्रखंड की जिरनगच्छ पंचायत में रविवार को हुई बैठक में पंप संचालकों ने करीब तीन वर्षों से मानदेय नहीं मिलने पर नाराजगी जताई. संचालकों का कहना है कि वे लगातार अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं, लेकिन लंबे समय से भुगतान नहीं होने के कारण परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है.

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बैठक में संचालकों ने स्पष्ट कर दिया कि अब वे लंबे समय तक इंतजार करने के मूड में नहीं हैं. उन्होंने लंबित मानदेय के भुगतान के लिए एक सप्ताह का समय दिया है. इस अवधि में भुगतान नहीं होने पर आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी गई है.

तीन साल से पंप चला रहे, लेकिन मानदेय का इंतजार

सात निश्चय योजना के तहत संचालित नल-जल योजना में पंप संचालकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है. ग्रामीणों के घरों तक पानी पहुंचाने के लिए उन्हें नियमित रूप से पंप का संचालन करना पड़ता है.

संचालकों का कहना है कि वे लगातार यह जिम्मेदारी निभा रहे हैं. इसके बावजूद करीब तीन वर्षों से उन्हें मानदेय नहीं मिला है. लंबे समय तक भुगतान नहीं होने से उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है.

बैठक में संचालकों ने संवेदक पर भी समय पर भुगतान नहीं करने का आरोप लगाया. उनका कहना था कि काम लगातार लिया जा रहा है, लेकिन उसके बदले मिलने वाला मानदेय लंबे समय से लंबित है.

नल खराब, पाइपलाइन टूटी तो ग्रामीण पंप संचालकों से करते हैं सवाल

मानदेय के अलावा पंप संचालकों ने नल-जल योजना के रखरखाव को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए.

संचालकों के मुताबिक कई जगह नल खराब पड़े हैं. वहीं कई स्थानों पर पाइपलाइन टूटने के कारण पानी की आपूर्ति प्रभावित हो रही है. उपकरणों और पाइपलाइन में खराबी के कारण ग्रामीणों को नियमित पानी नहीं मिल पाता.

जब पानी की आपूर्ति बाधित होती है, तो ग्रामीण अपनी शिकायत पंप संचालकों तक पहुंचाते हैं. संचालकों का कहना है कि वे ग्रामीणों की परेशानी समझते हैं, लेकिन उनके स्तर से हर खराबी को ठीक कर पाना संभव नहीं है.

उनका आरोप है कि खराब उपकरणों और टूटी पाइपलाइन की मरम्मत के लिए उचित पहल नहीं की जा रही है.

मानदेय नहीं मिला तो आंदोलन की तैयारी

रविवार की बैठक में पंप संचालकों ने आगे की रणनीति पर भी चर्चा की. उन्होंने निर्णय लिया कि लंबित मानदेय के भुगतान के लिए प्रशासन को एक सप्ताह का समय दिया जाएगा.

यदि निर्धारित समय के भीतर भुगतान नहीं किया गया, तो संचालक आंदोलन शुरू करेंगे. इस घोषणा के बाद अब मामले में प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है.

पंप संचालकों की मांग केवल बकाया मानदेय तक सीमित नहीं है. वे नल-जल योजना के खराब उपकरणों और पाइपलाइन की मरम्मत कराने की भी मांग कर रहे हैं, ताकि ग्रामीणों को नियमित पानी मिल सके.

योजना की सफलता सिर्फ पाइप बिछाने से नहीं, रखरखाव से भी

नल-जल योजना का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों तक नियमित पेयजल पहुंचाना है. लेकिन किसी भी जलापूर्ति योजना की सफलता केवल पाइपलाइन बिछाने और पंप लगाने से तय नहीं होती. पंप का नियमित संचालन, समय पर मरम्मत और उपकरणों का रखरखाव भी उतना ही जरूरी है.

अगर पंप संचालकों को समय पर मानदेय नहीं मिलता और खराब पाइपलाइन व नलों की मरम्मत नहीं होती, तो इसका सीधा असर ग्रामीणों की जलापूर्ति पर पड़ सकता है.

यही वजह है कि जिरनगच्छ पंचायत में पंप संचालकों की नाराजगी को केवल भुगतान का मामला नहीं माना जा सकता. इसका असर गांवों में पानी की व्यवस्था पर भी पड़ने की आशंका है.

Nal Jal Pump Operators Honorarium: अब प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती

पंप संचालकों ने प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है. उनकी मांग है कि करीब तीन वर्षों से लंबित मानदेय का भुगतान कराया जाए और नल-जल योजना के खराब उपकरणों व पाइपलाइन की मरम्मत कराई जाए.

अब देखना होगा कि प्रशासन इस शिकायत पर कितनी तेजी से कार्रवाई करता है. एक सप्ताह की समय सीमा के बाद आंदोलन की चेतावनी से पहले यदि भुगतान और रखरखाव की समस्या का समाधान हो जाता है, तो इससे पंप संचालकों के साथ-साथ उन ग्रामीणों को भी राहत मिलेगी, जो नल-जल योजना के भरोसे पेयजल की सुविधा पा रहे हैं.

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