ठाकुरगंज सीओ व ग्रामीणों में नोक-झोंक

Published at :09 Sep 2017 5:17 AM (IST)
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ठाकुरगंज सीओ व ग्रामीणों में नोक-झोंक

विवाद. घटना की सूचना पर डीएम पंकज दीक्षित पहुंचे ठाकुरगंज, बाढ़ पीड़ितों को समझाया कुर्लीकोट : गुरुवार की देरशाम कनकपुर पंचायत के वार्ड संख्या 17 के बाढ़ पीड़ित सर्वें सूची में नाम नहीं दर्ज किये जाने की शिकायत लेकर सीओ कार्यालय पहुंचे. बाढ़ पीड़ितों के साथ वार्ड सदस्य और सरपंच भी आए हुए थे. सूची […]

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विवाद. घटना की सूचना पर डीएम पंकज दीक्षित पहुंचे ठाकुरगंज, बाढ़ पीड़ितों को समझाया

कुर्लीकोट : गुरुवार की देरशाम कनकपुर पंचायत के वार्ड संख्या 17 के बाढ़ पीड़ित सर्वें सूची में नाम नहीं दर्ज किये जाने की शिकायत लेकर सीओ कार्यालय पहुंचे. बाढ़ पीड़ितों के साथ वार्ड सदस्य और सरपंच भी आए हुए थे. सूची में नाम नहीं होने पर नाराज बाढ़ पीड़ितों ने सीओ के समक्ष नाराजगी जाहिर की एवं इस बात की जानकारी युवा राजद प्रदेश महासचिव मो मुश्ताक को दे दी. सूचना मिलते ही मुश्ताक ने सीओ मो इस्माइल से सूची में नाम दर्ज नहीं होने की वजह जानना चाहा. सीओ ने जांच टीम की रिपोर्ट पर सूची को मान्यता देने की बात कही. इस बीच सीओ के साथ बाढ़ पीड़ितों के साथ नोंक-झोंक भी हुई.

बात बढ़ता देख मुश्ताक ने इसकी जानकारी मोबाइल से जिला पदाधिकारी को दी. इधर जिला पदाधिकारी सूचना मिलते ही दो घंटे में ठाकुरगंज पहुंच बाढ़-पीड़ितों से बातचीत की. वस्तुस्थिति से अवगत होने के बाद जिला पदाधिकारी ने बाढ़ पीड़ितों को अश्वस्त किया कि जल्द ही आपके पास राहत पैकेट पहुंच जायेगा.

क्या कहते हैं सीओ : ठाकुरगंज सीओ मो इस्मालइल के मुताबिक सरकारी कार्य में बाधा डालने और आपदा कार्य सुचारू रूप से नहीं चलने देने का मामला प्रकाश में आ रहा है. आग की तरह फैल चुकी अंचलाधिकारी से नोकझोक के मामले के बाद प्राथमिकी दर्ज कराने को लेकर जिला पदाधिकारी के निर्देश पर ठाकुरगंज सीओ मो इस्माइल ने लिखित आवेदन जिला पदाधिकारी, किशनगंज को दिया गया है. ठाकुरगंज अंचलाधिकारी मो इस्माइल ने घटनाक्रम को लेकर बताया कि प्रकरण में सरकारी कार्य में बाधा डालने और आपदा को लेकर चल रहे कार्य को बाधित करने वालों पर विधि सम्मत जिला पदाधिकारी के निर्देशानुसार करवाई की जाएगी.

क्या कहते हैं युवा राजद प्रदेश महासचिव : मुश्ताक आलम ने बताया कि अब हक की बात करना और जिला पदाधिकारी पंकज दीक्षित से निजी मोबाइल से लापरवाही बरतने की जानकारी देना अगर झुठा मुकदमा के रूप में मिलता है तो प्रजातंत्र का क्या महत्व रह जाता है. सरकारी कार्य में बाधा डालना क्या अंचल को बंद किया गया? क्या किसी कार्य को करने से रोका गया है. अगर मारपीट या अन्य कोई मामला होता तो क्या डीएम साहब की प्रतीक्षा करते? गलत तरीके से झूठे मुकदमे में फंसाने की प्रकरण से हैरत हूं.

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