सीलिंग एक्ट की फाइलों पर एक्शन की तैयारी

Published at :21 Nov 2016 6:28 AM (IST)
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सीलिंग एक्ट की फाइलों पर एक्शन की तैयारी

पहल. 30 बरसों से विभाग में दबी थी फाइलें, विभागीय बाबू से मिलीभगत कर मैनेज के सहारे हो रहा था खेल सीलिंग एक्ट की दबी फाइलें फिर से खुलने के बाद इसके दायरे में आने वाले भू-स्वामियों की नींद उड़ गयी है. डीएम जय सिंह ने सीलिंग एक्ट के दबी फाइलों को फिर से खोल […]

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पहल. 30 बरसों से विभाग में दबी थी फाइलें, विभागीय बाबू से मिलीभगत कर मैनेज के सहारे हो रहा था खेल

सीलिंग एक्ट की दबी फाइलें फिर से खुलने के बाद इसके दायरे में आने वाले भू-स्वामियों की नींद उड़ गयी है. डीएम जय सिंह ने सीलिंग एक्ट के दबी फाइलों को फिर से खोल कर इसके क्रियान्वयन का निर्देश राजस्व पदाधिकारी को दिया है. इसके दायरे में 244 भू-स्वामी की हजारों एकड़ जमीन है. जो सरकारी खाते में जा सकती है.
खगड़िया : तीस बरसों से भी अधिक समय से विभागीय अधिकारी व कर्मचारी की मिलीभगत दबी सीलिंग एक्ट में दर्ज केस की फाइलें फिर से खुल गयी हैं. डीएम जय सिंह ने जिले में सीलिंग एक्ट के तहत दर्ज कुल 244 मामले की फाइलें फिर से खोलते हुए राजस्व पदाधिकारी को इसे नतीजा तक पहुंचाने का टास्ट सौंपा है. इसके बाद इस एक्ट के तहत जिनकी जमीन आ रही हैं वैसे भू-स्वामियों की नींद हराम हो गयी है. पहले चरण में 22 ऐसे भू-स्वामियों को चिह्नित किया गया है
जिनके सीलिंग के मामले में नोटिफिकेशन होना बाकी था. लेकिन तत्कालीन जिलाधिकारी के आदेश को धत्ता बताते हुए विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से फाइलों को दबा दिया गया. अब सीलिंग एक्ट दबे फाइलों को पूर्ण कर जमीन अधिग्रहीत करने की प्रक्रिया जल्द पूरी होने के आसार बढ़ गये हैं. बताया जाता है कि करीब तीन हजार एकड़ जमीन सीलिंग एक्ट के दायरे में है. ऐसी सभी जमीन पर सरकार का कब्जा हो सकता है.
नोटिफिकेशन की बारी आयी, तो दब गयी फाइल
बताया जाता है कि वर्ष 1977 में चौथम के कमलेश्वरी प्रसाद सिंह की जमीन सीलिंग एक्ट के दायरे में लेने के लिये नोटिफिकेशन होना था. डीएम ने आदेश भी दे दिया लेकिन फाइल विभाग में जाकर दब गया. ऐसे दर्जनों मामले को चिह्नित किया गया है जिसमें सीलिंग एक्ट के तहत जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया अंतिम स्टेज में थी. लेकिन भू-स्वामी व कार्यालय के बाबूओं की मिलीभगत से फाइल को दबा दिया गया. बताया जाता है कि जिले में कुल 244 वाद लंबित हैं.
अगर यह सारे वाद (केस) को पूर्ण कर लिया जाये तो हजारों एकड़ जमीन सरकार के खाते में आ सकती हैं. डीएम जय सिंह भी बरसों से फाइल दबे होने पर अचरज जताते हुए कहा कि पिछले दस वर्षों से राजस्व विभाग के कार्यालय में पदस्थापित होने वाले बाबूओं के क्रियाकलाप को खंगाला जा रहा है. अगर इन फाइलों को दबाने में किसी की संलिप्तता जाहिर होती है तो कार्रवाई तय है. इधर, डीएम के कड़े रुख को देखते हुए राजस्व विभाग के बाबुओं से लेकर सीलिंग एक्ट के दायरे में आने वाले भू-धारियों की मुश्किलें बढ़ने वाली है.
भू हदबंदी का गजट/अधिसूचना
प्रखंड भू-धारी का नाम अधिसूचना संख्या व दिनांक
खगड़िया अब्दुल खैर 05/रा. दिनांक 18.02.1985
खगड़िया बच्ची देवी 01/10 रा. दिनांक 20.10.1996
अलौली महंथ कमला पति दास 21/रा. दिनांक 21.06.1980
अलौली ओम प्रकाश 02/रा. दिनांक 02.06.2000
अलौली हरिन्द्र ना. चौधरी 03/रा. दिनांक 02.06.2000
मानसी राधा कृष्ण यादव 01/रा. दिनांक 08.08.1996
मानसी हारुण रसीद 03/रा. दिनांक 14.09.1985
चौथम जितेन्द्र ना. सिंह 32/रा. दिनांक 08.06.1976
चौथम कमलेश्वरी प्र. सिंह 31/रा. दिनांक 04.04.1977
चौथम जितेन्द्र ना. सिंह 04/रा. दिनांक 23.11.1981
चौथम चन्द्र शमशेर सिंह एस-0-259-आर-76/रा. 15.12.76
गोगरी महंथ गोविंद गोस्वमी 06/रा. दिनांक 26.09.1992
गोगरी परमानंद सिंह 06/रा. दिनांक 14.03.1982
गोगरी जितेन्द्र कुमार सिंह 09/रा. दिनांक 15.01.1996
परबत्ता भगवान झा 02/रा. दिनांक 01.09.1981
परबत्ता महंथ मोतीलाल दास 104/रा. दिनांक 28.06.1976
परबत्ता जयंती देवी 01/रा. दिनांक 30.09.1983
परबत्ता सुंदर भगत 09/रा. दिनांक 15.01. 1996
बेलदौर पार्वती देवी 08/रा. दिनांक14.03.1982
बेलदौर सूर्य ना. मंडल 05/रा. दिनांक 18.02.1985
बेलदौर लक्ष्मी ना. राय 04/रा. दिनांक 14.05.1992
बेलदौर बीरन मंडल एस-0-रा. दिनांक 01.09.1981
(ये सब ऐसे भू-स्वामी के नाम व सीलिंग एक्ट के वाद संख्या हैं जिस पर नोटिफिकेशन होना बाकी था. लेकिन विभागीय मिलीभगत से फाइल दबा दिया गया.)
जिले में सीलिंग एक्ट के 244 मामले दर्ज हैं. जिसमें से कई मामले ऐसे भी हैं जिसमें नोटिफिकेशन होना था. लेकिन 30 बरसों से अधिकारियों व कर्मचारियों व भू-स्वामी की मिलीभगत से फाइल दबा दिया गया. सभी वाद में लंबित फाइलों की सारी प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश राजस्व पदाधिकारी को दिया गया है ताकि सिलिंग एक्ट के क्रियान्वयन में तेजी लाया जा सके.
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