अतिथि देवो भव: हमारी संस्कृति की मूल आत्मा है: वष्णिु जी महाराज

Published at :02 Nov 2015 9:56 PM (IST)
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अतिथि देवो भव: हमारी संस्कृति की मूल आत्मा है: वष्णिु जी महाराज

अतिथि देवो भव: हमारी संस्कृति की मूल आत्मा है: विष्णु जी महाराज फोटो 5 व 6 मेंकैप्सन: प्रवचन देते महाराज व उपस्थित श्रद्धालुखगड़िया. विकृति व आपदाओं के कहर को आध्यात्मिक ज्ञान का प्रभाव ही दूर कर सकता है. उक्त बातें सोमवार को अड्डाघाट स्थित सूर्य मंदिर के प्रांगण में अयोध्या से आये विष्णु जी महाराज […]

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अतिथि देवो भव: हमारी संस्कृति की मूल आत्मा है: विष्णु जी महाराज फोटो 5 व 6 मेंकैप्सन: प्रवचन देते महाराज व उपस्थित श्रद्धालुखगड़िया. विकृति व आपदाओं के कहर को आध्यात्मिक ज्ञान का प्रभाव ही दूर कर सकता है. उक्त बातें सोमवार को अड्डाघाट स्थित सूर्य मंदिर के प्रांगण में अयोध्या से आये विष्णु जी महाराज ने श्री मद भागवत कथा ज्ञान महायज्ञ के चौथे दिन कही. उन्होंने कहा कि पश्चिमी संस्कृति ने देश की सभ्यता व संस्कृति को दूषित कर दिया है. सामाजिक सौहार्द व भाईचारा का माहौल कायम करने में आध्यात्मिक ज्ञान का काफी महत्व है. अतिथि देवो भव: हमारी संस्कृति की मूल आत्मा है. जिससे आपदा की घड़ी में पड़ोसी देशों की हर संभव मदद कर अपने सुरभ्य संस्कृति की मिसाल कायम करने में हमेशा अहम भूमिका निभाते रहे. आयोजन समिति के सक्रिय सदस्य अरुण कुमार मुंशी, संजय कुमार, चिंटू, हरि सिंह, पुरुषोत्तम जैन ने बताया कि श्री मद भागवत कथा ज्ञान महायज्ञ में श्रद्धालुओं की भीड़ निरंतर बढ़ती जा रही है. श्रद्धालु दूर दराज ग्रामीण इलाकों से कथा सुनने पहुंच रहे हैं. उन्होनंे बताया कि 28 अक्टूबर से 7 नवंबर तक भागवत कथा का आयोजन किया जायेगा. वहीं मुहल्ले के आस पास का इलाका भक्तिमय गीतों से भक्ति मय हो गया है.

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