शहर में जाम बना आम, नहीं होता है ट्रेफिक नियमों का पालन

Published at :28 Oct 2015 10:21 PM (IST)
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शहर में जाम बना आम, नहीं होता है ट्रेफिक नियमों का पालन

शहर में जाम बना आम, नहीं होता है ट्रेफिक नियमों का पालन फोटो है 1 मेंकैप्सन- गोलंबर के चारों ओर लगायी गयी फुटकर दुकानदार.प्रतिनिधि, खगड़ियापरिवर्तन के दौर में सड़कों की चौड़ाई व ऊंचाई बढ़ गयी. सड़कें चिकनी हो गयीं, लेकिन बढ़ती रफ्तार पर कोई लगाम नहीं लग सका. इस जिले में ट्रैफिक का कोई सिस्टम […]

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शहर में जाम बना आम, नहीं होता है ट्रेफिक नियमों का पालन फोटो है 1 मेंकैप्सन- गोलंबर के चारों ओर लगायी गयी फुटकर दुकानदार.प्रतिनिधि, खगड़ियापरिवर्तन के दौर में सड़कों की चौड़ाई व ऊंचाई बढ़ गयी. सड़कें चिकनी हो गयीं, लेकिन बढ़ती रफ्तार पर कोई लगाम नहीं लग सका. इस जिले में ट्रैफिक का कोई सिस्टम विकसित नहीं हो सका. स्थिति यह है कि जिधर से मन करे जाइये, जहां मन करे रुक जाइये और गाड़ी खड़ी कर दीजिये. कोई नियम कायदा नहीं. जिले में कुछ वर्षों के अंदर दो पहिया वाहनों में बढ़ोत्तरी हुई है. वहीं ट्रैफिक व्यवस्था नहीं होने के कारण दुर्घटनाएं भी आम हो गयी हैं. आये दिन जिले में कहीं न कही सड़क दुर्घटना होनी आम बात हो गयी है. अब तक इस वर्ष दो दर्जन से अधिक लोगों की मौत सड़क दुर्घटना के कारण हो चुकी है. शहर में नहीं है ट्रैफिक गोलंबरजिला मुख्यालय होने के बावजूद शहर में एक भी ट्रैफिक गोलंबर नहीं है. जब अनुमंडल हुआ करता था तो राजेंद्र चौक पर ट्रैफिक पुलिस की सीटी हमेशा सुनायी देती थी. तब शहर होने का एहसास हुआ करता था. शहर का कद क्या बढ़ा व्यवस्था बिगड़ गयी. जहां ट्रैफिक पुलिस मुस्तैद रहा करती थी वहां पहले तो हाईमास्ट लाईट लगाये गये और अब फुटकर दुकानदारों ने अपना कब्जा जमा रखा है. अन्य किसी चौराहे पर ट्रैफिक की व्यवस्था नहीं है. वैसे अतिक्रमण के चक्कर में बाजार की सड़कें तो सिकुड़ती ही रहती है. कभी-कभी हुए सुधार के प्रयासट्रैफिक नियमों के अनुपालन के बाबत प्रशासन ने कई बार संवेदनशील हो नियम-कायदे बनाये. शहर में बड़े वाहनों के दिन में प्रवेश पर पाबंदी लगायी गयी है. सभी वाहनों की गति सीमा निर्धारित की गयी है. इसके लिए शहर के सीमा पर बोर्ड भी लगवाये गये. यत्र-तत्र वाहन लगाने वाले लोगों पर एसडीओ द्वारा जुर्माना की राशि वसूल की गयी. शहर के राजेंद्र चौक पर ट्रैफिक व्यवस्था संभालने के लिए पुलिस को प्रतिनियुक्त किया गया है. लेकिन वह ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने में कम लेकिन अन्य कामों पर नजर अधिक रखते देखे गये हैं. पुलिस रहने के बावजूद गोलंबर के चारों ओर फुटकर दकानदार अपनी टोकरी लगाकर सड़क को छोटा बना रही है. नो इंट्री के बहाने जो शहर के बाहर बेरियर लगाये गये वह आमदनी का बेहतर जरिया बन गया.नहीं है शहर में पार्किंग की व्यवस्था जिला मुख्यालय में तो पाकिंर्ग की कोई व्यवस्था है ही नहीं. पाकिंर्ग के मद्देनजर यहां कोई नियम कायदे नहीं चलते. जहां चाहें अपनी गाड़ी लगा लें. आमतौर पर बाजारों में दुकानों के ठीक सामने लोग गाड़ी खड़ी कर देते हैं. वहीं कई सड़कें तो ऐसी हैं, जो सड़क कम पार्किंग की जगह अधिक दिखती है. शहर में यत्र तत्र वाहन लगाने से पैदल चलने वाले लोगों को भी कठिनाइयों से जूझना पड़ता है. शहर में ट्रैफिक की जो स्थिति रहती है उससे आम लोग खीझते तो जरूर हैं, लेकिन फिर इसे नियति मान अपने कामों में लग जाते हैं. जगह-जगह फूटपाथ पर अवैध दुकान लगाये जाने के कारण भी ट्रैफिक की समस्या बनी रहती है.

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