...चले भी आओ कि गुलशन का कारोबार चले

Updated at : 19 Dec 2017 8:05 AM (IST)
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...चले भी आओ कि गुलशन का कारोबार चले

खगड़िया : ‘गुलों में रंग भरे बाद-ए-नौबहार चले, चले भी आओ कि गुलशन का कारोबार चले’. ठंड के मौसम का इन दिनों जो मिजाज है उन्हें देख कर फैज अहमद फैज के मशहूर नज्म की ये पंक्तियां बेसाख्ता लब पे आ जाती है. महज चार दिन पहले दिन में धूप के तल्ख मिजाज में पसीने […]

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खगड़िया : ‘गुलों में रंग भरे बाद-ए-नौबहार चले, चले भी आओ कि गुलशन का कारोबार चले’. ठंड के मौसम का इन दिनों जो मिजाज है उन्हें देख कर फैज अहमद फैज के मशहूर नज्म की ये पंक्तियां बेसाख्ता लब पे आ जाती है. महज चार दिन पहले दिन में धूप के तल्ख मिजाज में पसीने छूट जाते थे. बुजुर्ग चिंतित थे कि ये मौसम को क्या हो गया है. दिसंबर परवान पर है और ठंड नदारद. दोपहर की तेज धूप साये में धकेल देती थी. किसान माथे पर हाथ धरे बैठे थे कि गेहूं की फसल का क्या होगा? हां धोबी के कपड़े आसानी से सूख रहे थे.
शनिवार को मौसम ने अचानक तेवर बदला और शाम होते-होते लोगों के हाथ जेब का रास्ता तलाशने लगे. रविवार को कोहरे ने पूरे दिन धूप को अपने पहरे में रखा. सोमवार को भी वही आलम रहा.
मौसम का पारा तेजी से नीचे उतरा. संदूकों में तह कर रखे स्वेटर बदन पर सज गये. किसानों ने भी राहत की सांस ली. खेतों में गेहूं के नन्हें पौधों को जम कर ओस की खुराक मिली. बुजुर्गों ने राहत की सांस लेते हुए दुबक कर अलाव जला लिये हैं कि सब ठीक चल रहा है. दोपहर बाद से ही कोहरे पर्देदारी पर उतारू हो गये. माताओं ने बच्चों को आंचल में छुपाते हुए ठंड में बाहर निकलने की मनाही कर दी है. बच्चों को स्कूल भेजते समय वे सशंकित हैं कि वे बीमार न पड़ जायें.
कंबल की आस में कहीं फिर से बीत न जाये ठंड
नगर परिषद प्रशासन तथा नगर पंचायत प्रशासन द्वारा अबतक कंबल की खरीदारी नहीं की गयी. वर्तमान में नगर पंचायत के द्वारा बीते माह हुई बोर्ड की बैठक में इसे लेकर कार्य योजना भी बनाया गया है.
बताते चलें कि अभी दिसंबर महीने का आखिरी सप्ताह गुजरने वाला है.नगर पंचायत के अनुसार इसे लेकर निविदा निकालकर संवेदक के द्वारा कंबल की खरीद करवाकर इसका वितरण किया जाना है. बीते पांच दिनों से जिले भर में शीतलहर के कारण लोगों का जीना मुहाल है. अचानक बढ़ी ठंड के कारण शहरी सहित ग्रामीण क्षेत्रों में जनजीवन प्रभावित हुआ है. शीतलहर के कारण जिले में ठंड का पारा लगातार लुढ़कता जा रहा है.
फल का हो रहा नुकसान
ठंड बढ़ने के खेत में लगी पपीता की फसल को काफी नुकसान हो रहा है. वैज्ञानिक रंजीत प्रताप पंडित ने बताया कि ठंड बढ़ने से केला,अमरूद,पपीता को काफी नुकसान हो रहा है. उन्होंने बताया कि गेहूं,आलू को काफी फायदा हो रहा है. ठंड के मौसम में आलू का वजन बढ़ता है. जबकि गेहूं के दाना में वृद्धि होती है.
कहते हैं कार्यपालक
नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी मोहम्मद मुस्तकीम ने बताया कि कंबल खरीदारी को लेकर योजना बनाया जा रहा है और जल्द ही गरीबों के बीच कंबल का वितरण किया जायेगा.
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