सीओ और प्रधान सहायक के बीच मारपीट मामले में डीएम ने मांगा स्पष्टीकरण, 24 घंटे में जवाब देने का निर्देश
फोटो- सीओ व प्रधान लिपिक के बीच मारपीट का फुटेज
कटिहार अंचल कार्यालय में सीओ और प्रधान सहायक के बीच मारपीट के मामले ने तूल पकड़ लिया है. जिला पदाधिकारी ने सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के बयान के आधार पर अंचलाधिकारी सोनू भगत से 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है. यह घटना प्रशासनिक अनुशासन पर सवाल खड़े करती है.
कटिहार. सदर कटिहार अंचल कार्यालय में अंचलाधिकारी सोनू भगत और प्रधान सहायक संजय वर्मा के बीच हुई मारपीट के मामले में जिला पदाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने जांच प्रतिवेदन के आधार पर सीओ से स्पष्टीकरण मांगा है. डीएम की ओर से जारी पत्र में जांच दल की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज और संबंधित व्यक्तियों व गवाहों के बयानों के परीक्षण के बाद प्रथम दृष्टया शारीरिक झड़प की शुरुआत सीओ की ओर से होती प्रतीत हुई है.
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28 अगस्त को कार्यालय में हुआ था विवाद
डीएम ने सीओ सोनू भगत को भेजे स्पष्टीकरण पत्र में कहा है कि 28 अगस्त 2026 को पूर्वाह्न करीब 11:15 बजे अंचल कार्यालय, कटिहार में सीओ और उनके अधीनस्थ कार्यालय कर्मी सह प्रधान सहायक संजय वर्मा के बीच कार्यालयीय विषय को लेकर विवाद हुआ था. विवाद आगे बढ़कर शारीरिक संघर्ष की स्थिति तक पहुंच गया. घटना के संबंध में सीओ की ओर से भी प्रतिवेदन दिया गया था. इसके बाद डीएम के आदेश ज्ञापांक 2624/सी, दिनांक 29 अगस्त 2026 के माध्यम से जांच दल का गठन कर मामले की जांच करायी गयी.
सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के बयान की हुई जांच
जांच दल ने संबंधित सीसीटीवी फुटेज के साथ घटना से जुड़े व्यक्तियों और गवाहों के बयानों का परीक्षण किया. जांच दल के ज्ञापांक 1745/रा, दिनांक 31 अगस्त 2026 के प्रतिवेदन में प्रथम दृष्टया शारीरिक झड़प की शुरुआत सीओ की ओर से हुई प्रतीत होने का उल्लेख किया गया है. जांच दल ने कार्यालय परिसर में इस तरह की घटना को कार्यालयीय अनुशासन और प्रशासनिक गरिमा के प्रतिकूल माना है.
डीएम ने प्रशासनिक नियंत्रण और अनुशासन पर उठाया सवाल
स्पष्टीकरण पत्र में डीएम ने कहा है कि अंचलाधिकारी से अपेक्षा की जाती है कि वे कार्यालय के प्रशासनिक प्रमुख के रूप में अधीनस्थ कर्मियों पर प्रभावी नियंत्रण रखें और कार्यालय में अनुशासन एवं मर्यादा बनाये रखें. किसी भी मतभेद अथवा कार्य संबंधी विवाद का समाधान नियमानुसार प्रशासनिक प्रक्रिया के माध्यम से किया जाना चाहिए. डीएम ने कहा है कि उपलब्ध जांच सामग्री से यह प्रतीत होता है कि कार्यालय में उत्पन्न विवाद को समय रहते नियंत्रित नहीं किया जा सका, जिसके कारण मामला शारीरिक संघर्ष तक पहुंच गया. सरकारी कार्यालय में पदाधिकारी और अधीनस्थ कर्मचारी के बीच विवाद का इस स्तर तक पहुंचना प्रशासनिक नियंत्रण, नेतृत्व और अनुशासन व्यवस्था के अनुरूप नहीं है.
आचार नियमावली के प्रावधान के प्रतिकूल आचरण का उल्लेख
डीएम के पत्र में कहा गया है कि सीओ का उक्त कृत्य बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 में उल्लेखित प्रावधानों के प्रतिकूल आचरण को दृष्टिगोचर करता है. इसी आधार पर सीओ से मामले के प्रत्येक बिंदु पर अपना पक्ष स्पष्ट करने को कहा गया है.
24 घंटे के अंदर देना होगा तथ्यात्मक जवाब
जिला पदाधिकारी ने सीओ कटिहार को निर्देश दिया है कि स्पष्टीकरण पत्र में वर्णित प्रत्येक बिंदु का क्रमवार, स्पष्ट, तथ्यात्मक और साक्ष्य-समर्थित जवाब पत्र प्राप्त होने के 24 घंटे के अंदर उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें. अब मामले में सीओ की ओर से दिए जाने वाले स्पष्टीकरण और उसके बाद प्रशासनिक स्तर पर होने वाली कार्रवाई पर नजर है.
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