गौशाला के पास बीच रास्ते घंटों रोक दी जाती हैं ट्रेनें
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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कटिहार : रेल फाटकों पर क्रॉसिंग के कारण यातायात बाधित होना वैसे तो आम नजारा है, लेकिन इसकी जद में वैसे यातायात मार्ग आ रहे हैं, जो अपेक्षाकृत साइड लाइन माने जाते हैं. इससे लोगों को आवागमन में परेशानी होती है. यह बात डहेरिया रेल गुमटी होकर गुजरने वाली कटिहार-मनिहारी रेलखंड की ट्रेनों की है, […]
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कटिहार : रेल फाटकों पर क्रॉसिंग के कारण यातायात बाधित होना वैसे तो आम नजारा है, लेकिन इसकी जद में वैसे यातायात मार्ग आ रहे हैं, जो अपेक्षाकृत साइड लाइन माने जाते हैं. इससे लोगों को आवागमन में परेशानी होती है. यह बात डहेरिया रेल गुमटी होकर गुजरने वाली कटिहार-मनिहारी रेलखंड की ट्रेनों की है, जो आउटर सिग्नल पर कटिहार-बरौनी रेल खंड के ट्रेनों के पास देने के लिए गौशाला के पास रोकी जाती है. गुमटी पर ट्रेन के रुकने के कारण आये दिन बाधित रहता है.
ट्रेन एवं बंद गुमटी के कारण यहां दोनों तरफ ट्रैफिक जाम आम नजारा है. हालांकि गौशाला गुमटी होकर बरौनी रेलखंड पर ट्रेनों के परिचालन और इसके कारण गौशाला आउटर सिग्नल पर मनिहारी की तरफ से आ रही ट्रेन को रोकना तकनीकी मजबूरी है और यह प्रोटोकॉल के तहत ही होता है. अलबत्ता इस कारण ट्रैफिक जाम की मियाद मिनटों से बढ़कर घंटों में तब्दील हो जाती है.
लोगों को घंटों तक जाम रेल गेट पर फंसकर तब तक रहने को मजबूर होना पड़ता है, जबतक ट्रेन को यार्ड में पूरी तरह से प्रवेश नहीं करा लिया जाता है. ऐसे में यदि कोइ बीमार व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाना हो या किसी अन्य जरूरी काम से कही जाना हो तो लोग कैसे जा पायेंगे. यह बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है.
रेलवे पर कसे जाते हैं तंज : ट्रेन हटाने एवं गुमटी खुलने की प्रतीक्षा जितनी लंबी होती है, वाहन सवार यात्रियों का कोप और आक्रोश उतना ही बढ़ता जाता है. इस वक्त लोगों की प्रतिक्रिया कइ रूपों में उभरकर सामने आती है. कभी-कभी तो लोग घंटों इंतजार करने के बाद वापस अपने घर तक लौटने को मजबूर हो जाते हैं. लोग रेलवे की मनमानी करार देने से भी नहीं चूकते हैं. इस दिशा में न जिला प्रशासन का कोइ ध्यान है न ही जनप्रतिनिधियों का ही कोइ ध्यान जा रहा है.
जान बूझ कर बीचों बीच ट्रेन खड़ा करने का आरोप : स्थानीय लोगों का कहना है कि ट्रेन जान-बूझकर गुमटी के बीचों बीच खड़ी की जाती है, ताकि सड़क यात्री परेशान हों. लोगों का यह कहना है कि अगर ट्रेन को थोड़ा और आगे कर रोका जाये तो इसका पूरा हिस्सा गुमटी के पार हो जायेगा और फिर गेट खोल कर यातायात बहाल करने में कोइ दिक्कत नहीं होगी. सिर्फ इस कारण गुमटी बंद रहता है की वह गेट के बीचों-बीच रखी जाती है.
निकासी के वक्त भी होती है परेशानी : रेल गुमटी बंद होने के कारण परेशानी सिर्फ एकतरफा नहीं है, बल्कि कटिहार से मनिहारी जाने वाली ट्रेनों के कारण भी यहां बंद गेट ट्रैफिक जाम का कारण बनता है. इसकी वजह भी बरौनी रेलखंड के लिए ट्रेनों का प्रवेश एवं निकासी हेतु प्राथमिकता के स्तर पर पास देना होता है. इस कारण भी कभी-कभी फाटक बेवजह लंबे समय तक जाम रहता है.
शहर के अंदर प्रवेश करने एवं यहां से निकासी के लिए ये मुख्य रास्ता है. ऐसे में इस रास्ते पर आवश्यक सेवा समेत सभी किस्म के ट्रैफिक बाधित होते हैं इसके अतिरिक्त दो विकल्पों में गौशाला, मिरचाइबाड़ी मार्ग एवं भट्टा टोला, बाजार समिति सड़क होकर निकासी एवं प्रवेश पर गौर करते हैं. पहला बरौनी रेलखंड पर परिचालन के कारण हमेशा ही बाधित रहता है. दूसरा बहुत दूर होने के कारण सिर्फ रूठ ट्रैफिक के लिए उपयोगी है. इन दोनों ही रास्तों की एक बड़ी समस्या है कि यह दोनों काफी दूरी तय कर शहर तक पहुंचाते हैं, जबकि उक्त मार्ग सबसे मुख्य एवं अहम है.
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