दर-दर की ठोकर खाने को विवश

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सूरत-ए-हाल . विस्थापितों के पुनर्वास के लिए अब तक नहीं हुई ठोस पहल जिले में बाढ़ व कटाव से विस्थापित लोगों की समस्या कम नहीं हो रही है. हजारों परिवार विस्थापन का दंश झेल रहे हैं. वर्षो से कटाव पीड़ित तटबंध व सड़क के किनारे इसी तरह जिंदगी गुजार रहे हैं. ऐसे परिवारों के लिए […]

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सूरत-ए-हाल . विस्थापितों के पुनर्वास के लिए अब तक नहीं हुई ठोस पहल

जिले में बाढ़ व कटाव से विस्थापित लोगों की समस्या कम नहीं हो रही है. हजारों परिवार विस्थापन का दंश झेल रहे हैं. वर्षो से कटाव पीड़ित तटबंध व सड़क के किनारे इसी तरह जिंदगी गुजार रहे हैं. ऐसे परिवारों के लिए न तो तक प्रशासन की ओर से कोई प्रभावी कदम उठाया गया है और न ही सियासी तबके के एजेंडे में ऐसे परिवार हैं.
कटिहार : तमाम तरह के बुनियादी सुविधाओं से महरूम ऐसे विस्थापित परिवार इसे अपनी नियती मानकर जिंदगी की गाड़ी खींच रहे हैं. हालांकि जिला प्रशासन ने पिछले एक हफ्ते से विस्थापित लोगों के पुनर्वास की दिशा में थोड़ी पहल जरूर की है, पर जानकारों की मानें तो यह नाकाफी है. जिले के महानंदा, गंगा व कोसी तथा उसके सहायक नदियों से हर साल आने वाली बाढ़ व कटाव से सैंकड़ों परिवार अब तक विस्थापित हो चुके हैं. शनिवार तक जिला प्रशासन के द्वारा जिले के सात अंचलों में करीब चार हजार विस्थापितों को पुनर्वास के लिए चिह्नित किया गया है, जबकि विस्थापितों की तादाद हजारों में है.
लंबे समय से विस्थापन का दंश झेल रहे ऐसे हजारों लोगों को पुनर्वास की मांग को लेकर पुनर्वास संघर्ष समिति के प्रमुख विक्टर झा के नेतृत्व में हजारों लोग शहर के प्रमुख चौराहा शहीद चौक के समीप मंगलवार से अनशन पर बैठ गये हैं. अनशन की परिणति क्या होती है. यह तो आने वाला समय बतायेगा, लेकिन वर्षो बाद पहली बार विस्थापितों के मुद्दे को लेकर इस तरह के आंदोलन का आगाज हुआ है. विस्थापितों को भी अब लग रहा है कि उन्हें न्याय मिलेगा. हालांकि जिला प्रशासन का दावा है कि विस्थापितो को पुनर्वास के लिए भूमि अर्जन की प्रक्रिया की जा रही है.
जनप्रतिनिधि व प्रशासन रहे हैं उदासीन : विस्थापितों के पुनर्वास को लेकर जनप्रतिनिधि, प्रमुख राजनीतिक दल व प्रशासनिक महकमा अब तक उदासीन रहे हैं. चुनाव के समय भले ही सियासी तबके के द्वारा वोट के लिये विस्थापितों को आश्वासन देकर उसके दुखो को कम करने की कोशिश की जाती रही है. लेकिन आज तक विस्थापितों की समस्या के समाधान को लेकर कोई ठोस पहल नहीं हुयी. फलस्वरूप विस्थापितों की समस्या आज भी जस की तस बनी हुयी है. हालांकि पिछले एक सप्ताह से जिला प्रशासन द्वारा विस्थापित के पुनर्वास को लेकर थोड़ी गंभीरता दिखायी गयी है. लेकिन जानकारों की माने तो प्रशासन महज खानापूर्ति करने में जुटी है. प्रशासन पूर्व में भी विस्थापितों को पुनर्वास को जमीन देने की बात कहती रही है. जमीन देने के नाम पर विस्थापितों को ऐसी जमीन दी गयी कि वहां घर बनाना उसके बूते से बाहर की बात थी. कई ऐसे क्षेत्रों के विस्थापितों को पुनर्वास के लिये गड्ढानुमा जमीन दी गयी. विस्थापित वैसे जमीन पर बसने से इंकार करते रहे. जिला प्रशासन द्वारा हाल में विस्थापितों को पुनर्वास के लिये शुरू की गयी पहल के तहत करीब चार हजार विस्थापित को पुनर्वास किये जाने के लिये चिह्नित किया गया है. जबकि जमीनी स्तर पर अभी भी विभिन्न जगहों पर विस्थापित हजार की तादाद में हैं.
कहते है जिला भू-अर्जन पदाधिकारी
इस संदर्भ में जिला भू-अर्जन पदाधिकारी परमानंद कुमार ने कहा कि बीपीएल भूमिहीन विस्थापित परिवारों को चिह्नित कर उसके पुनर्वास के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है. मनिहारी के दो स्थानों के विस्थापितों के पुनर्वास के लिए भू-अर्जन की कार्रवाई शुरू कर दी गयी है.
बोले अनशनकारी, जमीन लेंगे या जान देंगे
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