प्लास्टिक के अंदर सिमटी बाढ़पीड़ितों की जिंदगी

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बाढ़पीड़ितों को राहत शिविरों में भी नहीं मिल रही पूरी राहत कटिहार : जिले के बाढ़ पीड़ित दोहरी मार झेल रहे हैं. एक तो पिछले कई दिनों से बाढ़‍ से विस्थापित होकर सड़क व बांध पर शरण लेने को मजबूर हैं, तो दूसरी तरफ बारिश ने ऐसे विस्थापित परिवारों के सामने जीना मुहाल कर दिया […]

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बाढ़पीड़ितों को राहत शिविरों में भी नहीं मिल रही पूरी राहत

कटिहार : जिले के बाढ़ पीड़ित दोहरी मार झेल रहे हैं. एक तो पिछले कई दिनों से बाढ़‍ से विस्थापित होकर सड़क व बांध पर शरण लेने को मजबूर हैं, तो दूसरी तरफ बारिश ने ऐसे विस्थापित परिवारों के सामने जीना मुहाल कर दिया है. बाढ़ से बेघर हो चुके लोग नियति के समक्ष बेबस व लाचार दिख रहे हैं. कई जगहों पर बाढ़ से प्रभावित लोगों को जिला प्रशासन द्वारा दिये गये प्लास्टिक भी कारगर साबित नहीं हो रहे हैं.
उल्लेखनीय है कि जिले में पिछले दस दिन से गंगा नदी में उफान व बांध के टूटने की वजह से आयी बाढ़ से मनिहारी, अमदाबाद, कुरसेला, समेली, बरारी, मनसाही आदि प्रखंडों की बड़ी आबादी का जनजीवन अस्त व्यस्त है. करीब बीस हजार से अधिक आबादी तो राहत शिविरों में शरण लिये हुए है.
पिछले दो दिन से रुक-रुक कर हो रही बारिश ने ऐसे बाढ़पीड़ितों की पीड़ा को कई गुणा बढ़ा दिया है. परिवार के अन्य सदस्यों व बच्चों के साथ किस तरह प्रभावित लोगों की जिंदगी कट रही है. इसको शब्दों में बया करना कठिन है. तीन से पांच मीटर के प्लास्टिक के भीतर चार से आठ सदस्यों वाले परिवार की जिंदगी कट रही है. प्रशासन द्वारा राहत के नाम पर ऐसे परिवारों को थोड़ी राहत पहुंचायी जा रही है, लेकिन हालात में सुधार नहीं दिख रहा है. जब भी बारिश होती है, तो ऐसे परिवार अपने भाग्य को कोसते हैं.
दोहरी मार झेल रहे हैं बाढ़ पीड़ित :
बरारी प्रखंड के मोहना चांदपुर के कुंडी घाट के पास बांध पर बड़ी संख्या में बाढ़ से पीड़ित लोग शरण लिये हुए हैं. रविवार को बाढ़पीड़ित विजय सहनी ने बताया कि छोटे से प्लास्टिक के भीतर सात-आठ सदस्यों के साथ रहना कठिन है, लेकिन वह कर भी क्या सकते हैं.
यहीं पर पार्वती देवी से मुलाकात होती है. वह कहती हैं कि प्लास्टिक के भीतर किसी तरह समय कट रहा है, लेकिन रुक-रुक कर हो रही बारिश से परेशानी और बढ़ गयी है. इसी प्रखंड के विशनपुर पंचायत अंतर्गत गुंजरा ढाला के बांध पर भी बड़ी संख्या में विस्थापित रहते हैं. यहां भी प्रशासन द्वारा पीड़ितों के लिए राहत शिविर चलाया जा रहा है. भ्रमण के दौरान यहां पवन यादव से मुलाकात होती है. वह कहते हैं कि बारिश की वजह से पीड़ितों का संकट बढ़ गया है. प्रशासन द्वारा जो सुविधा दी गयी है. वह नाकाफी है. किसी तरह जिंदगी कट रही है. बड़े-बड़े नेता भी आये, पर उनके दुखों में कोई कमी नहीं हुई है.
किसी तरह हो रहा गुजारा
पिछले दो दिन से रुक-रुक कर हो रही बारिश से पूर्वी क्षेत्र के लोगों को कुछ फायदा जरूर मिला है, लेकिन इस बारिश में सबसे ज्यादा तकलीफ बाढ़पीड़ितों को हो रही है. खासकर पिछले दस दिनों से कुरसेला, बरारी, समेली, मनसाही, मनिहारी व अमदाबाद प्रखंड में बाढ़ की विभीषिका का दंश झेल रहे लोगों के समक्ष बारिश ने कई तरह की परेशानी पैदा कर दी है. सड़‍क किनारे व बांध पर रहने वाले लोगों की पीड़ा ऐसी बढ़ी है कि उसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है. छोटे-छोटे बच्चे व महिलाओं को बाढ़ व बारिश से अत्यधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है. सरकार के निर्देश पर जिला प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराये गये राहत सामग्री व सुविधा भी बाढ़ पीड़ितों की पीड़ा को कम नहीं कर पायी है.
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