मानव निर्मित बाढ़ के लिए सीएम पर हो मुकदमा : सुशील मोदी

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कटिहार : पूर्व उप मुख्यमंत्री व विधान मंडल दल के विरोधी नेता सुशील कुमार मोदी ने बिहार में आयी बाढ़ के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार व उनकी सरकार को दोषी ठहराया है. कटिहार जंकशन के प्लेटफाॅर्म संख्या एक पर जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने के बाद श्री मोदी संवाददाता सम्मेलन में पत्रकारों […]

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कटिहार : पूर्व उप मुख्यमंत्री व विधान मंडल दल के विरोधी नेता सुशील कुमार मोदी ने बिहार में आयी बाढ़ के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार व उनकी सरकार को दोषी ठहराया है. कटिहार जंकशन के प्लेटफाॅर्म संख्या एक पर जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने के बाद श्री मोदी संवाददाता सम्मेलन में पत्रकारों से बात कर रहे थे. उन्होंने कहा कि बिहार में तीन बांध टूटने व कटने की वजह से बाढ़ आयी है.

यह बाढ़ प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि मानव निर्मित आपदा है. कटिहार के महानंदा तटबंध को काटा गया. कुरसेला के जोनिया मधेली के पास बांध टूट गया. वहीं कटिहार जिला से सटे हुए नवगछिया के पास गंगा जमींनदारी बांध भी टूटा. इन बांधों के टूटने की वजह से ही बाढ़ विनाशकारी बना. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बांध टूटने व कटने के बाद कितने अधिकारी व अभियंताओं को निलंबित किये हैं या कार्रवाई किये हैं. मुख्यमंत्री को इसका जवाब देना चाहिये. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि राज्य सरकार की लापरवाही की वजह से बाढ़ ने विनाशकारी रूप लिया है.

बाढ़ से जिले में 50 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. लाखों लोग बेघर हो चुके हैं. जानमाल का व्यापक नुकसान हुआ है. इसलिये यह पूरी तरह मानव निर्मित आपदा है. इसके लिए मुख्यमंत्री के ऊपर धारा 302 के तहत आपराधिक मुकदमा दर्ज होना चाहिये. संवाददाता सम्मेलन में पूर्व सांसद निखिल कुमार चौधरी, स्थानीय विधायक तारकिशोर प्रसाद, प्राणपुर विधायक बिनोद कुमार सिंह, एमएलसी अशोक अग्रवाल, जिला परिषद अध्यक्ष गुड्डी कुमारी, पूर्व विधायक विभाषचंद्र चौधरी, महेश पासवान, भाजपा जिला अध्यक्ष सुनिल प्रसाद कर्ण, पूर्व जिला अध्यक्ष चंद्रभूषण ठाकूर, प्रो एस एन पोद्दार, भाजपा नेता मनोज राय, मनोज सिंहा, कृष्णा साह, विजय गुप्ता, बबन झा, प्रमोद महतो, नीरज, प्रमोद सिंह, ओमप्रकाश यादव, प्रो विजय मल, प्रभात मिश्रा आदि बड़ी संख्या में पार्टी नेता उपस्थित थे.फरक्का बराज के बहाने मुद्दा से भटकाने चाहते हैं सीएमपूर्व डिप्टी सीएम श्री मोदी ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि बिहार में आयी बाढ़ के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार फरक्का बराज को दोषी ठहराते हैं तथा उसे तोड़ने की जोरदार वकालत करते हैं.

अगर फरक्का बराज बिहार में बाढ़ के लिए दोषी होता, तो सबसे पहले पश्चिम बंगाल का इलाका जलमग्न हो जाता. पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी है. नीतीश कुमार ममता से क्यों नहीं बात करते हैं. श्री मोदी ने सवालिये लहजे में कहा कि अगर फरक्का बराज को तोड़ने की वकालत नीतीश कुमार करते हैं, तो क्या बिहार के सभी तटबंध को तोड़ने का इरादा वह रखते हैं. वैज्ञानिक पहले से तटबंध तोड़ने के पक्षधर रहे हैं. मुख्यमंत्री उन वैज्ञानिकों के विचारों से सहमत हैं. उन्होंने कहा कि दरअसल मुख्यमंत्री बाढ़ जैसे गंभीर मुद्दे से लोगों का दिमाग भटकाने के उद्देश्य से ही फरक्का बराज का मामला उठाये हैं. गाद नीति राज्य सरकार क्यों नहीं बनातीश्री मोदी ने पत्रकारों से यह भी कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार केंद्र सरकार से गाद नीति बनाने की मांग करते हैं. राज्य सरकार स्वयं गाद नीति क्यों नहीं बनाती. जल प्रबंधन व गाद नीति के लिए राज्य सरकार स्वयं सक्षम है.

राज्य सरकार को केंद्र के भरोसे नहीं रहकर स्वयं गाद नीति तैयार करना चाहिये. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बाढ़ की विभीषिका के बीच केंद्र सरकार पर मिथ्या आरोप लगाते रहे हैं. बिहार में नीतीश कुमार 10 वर्ष से मुख्यमंत्री है. इतने वर्षो में बिहार में गाद नीति तैयार हो गयी होती. लेकिन नीतीश इसके लिये आजतक कोई कोशिश नहीं किये. बाढ़ जैसी त्रासदी में भी राज्य सरकार अब तक सर्वदलीय बैठक नहीं बुलायी है.

राहत शिविर में सिर्फ खानापूर्ति

उन्होंने कहा कि शुक्रवार को वे सवेरे से बाढ़ प्रभावित कुरसेला व बरारी प्रखंड का दौरा किये हैं. कई राहत शिविरों में भी गये. लेकिन राहत शिविर के नाम पर अराजकता फैली हुयी है. पैसे की कोई कमी नहीं होने के बावजूद प्रभावित लोगों को रिलिफ कोड के तहत निर्धारित सुविधा नहीं मिल रही है. राहत शिविर में सरकार ने रिलिफ कोड के तहत कई तरह की व्यवस्था देने का प्रावधान किया है. लेकिन जमीन पर वह कहीं दिखायी नहीं दिया.

मधेली के बाढ़ पीड़ितों को सवेरे फफूंदी लगा हुआ ब्रेड का वितरण किया जा रहा था. कहीं भी स्वास्थ्य जांच शिविर नहीं मिला और न ही कहीं पशुओं के लिये चारा की व्यवस्था नजर आयी. जबकि राहत सुविधा के लिये केंद्र सरकार 75 प्रतिशत राशि दे रही है. वहीं राज्य सरकार मात्र 25 प्रतिशत राशि खर्च करती है. एक समय का भोजन पीड़ितों को दिया जा रहा है. कुल मिलाकर बाढ़ पीड़ितों की स्थिति काफी गंभीर है. करीब पांच हजार हेक्टेयर केला फसल का नुकसान हुआ है. उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन व राज्य सरकार बाढ़ पीड़ितों को राहत पहुंचाने में पूरी तरह नाकाम रही है. कोशी जब त्रासदी आयी थी तो उस क्षेत्र के सभी जिलों में स्पेशल डीएम तैनात किये गये थे. कटिहार में भी स्पेशल डीएम तैनात किया जाना चाहिये.

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