निजी क्लिनिकों के भरोसे मरीज

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हद है . सदर अस्पताल के आइसीयू का मरीजों को नहीं िमलता लाभ 2012 में जिले के सदर अस्पताल में तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री अश्विनी कुमार ने गंभीर रूप से घायल या बीमार मरीजों के लिए वातानुकूलित गहन चिकित्सा केंद्र का उद्घाटन किया था. लाखों खर्च कर भवन निर्माण करने के साथ उपकरण भी लगाये गये, […]

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हद है . सदर अस्पताल के आइसीयू का मरीजों को नहीं िमलता लाभ

2012 में जिले के सदर अस्पताल में तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री अश्विनी कुमार ने गंभीर रूप से घायल या बीमार मरीजों के लिए वातानुकूलित गहन चिकित्सा केंद्र का उद्घाटन किया था. लाखों खर्च कर भवन निर्माण करने के साथ उपकरण भी लगाये गये, लेकिन आज भी मरीजों को उक्त आइसीयू की सुविधा नहीं मिल रही है. इसकी वजह से मरीज परेशान होते हैं.
कटिहार : तीन नेशनल हाइवे और रेल मंडल से घिरे कटिहार जिले के आम लोगांे को गहन चिकित्सा सुविधाएं नहीं मिल रही हैं. सदर अस्पताल में प्रतिदिन ओपीडी में मरीजों का तांता लगा तो रहता है, लेकिन आइसीयू की सेवा मिलना मरीजों के लिए टेढ़ी खीर साबित होता है. लिहाजा, उन्हें महंगे इलाज के लिए निजी क्लिनिक का रुख करना पड़ता है. जहां न सिर्फ उनकी जेबें ढीली होती हैं, बल्कि बेवजह अतिरिक्त दवा का बोझ भी सहन करना पड़ता है.
बता दें कि साल 2012 में जिले के सदर अस्पताल में तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री अश्विनी कुमार ने गंभीर रूप से घायल या बीमार मरीजों के लिए वातानुकुलित गहन चिकित्सा केंद्र का उद्घाटन किया था, लेकिन तब से लेकर आजतक अस्पताल में यह सेवा आमजनों को नसीब नहीं हुई है.
सदर अस्पताल के गहन चिकित्सा केंद्र में वो तमाम सुविधाएं उपलब्ध हैं, जो आमतौर पर गंभीर रूप से घायल और अन्य गंभीर मरीजों को मिलनी चाहिये. 11 बेड से लैस इस गहन चिकित्सा केंद्र का तकरीबन 25 लाख की लागत से निर्माण किया गया था. मरीजों के इलाज के लिए जो उपकरण खरीदे गये उसकी कीमत भी करीब 25 लाख रुपये आंकी गयी थी. बावजूद इसके आजतक लोग गहन चिकित्सा के लिए निजी क्लिनिक ही भटक रहे हैं.
आलम यह है कि भवन और उपकरण रखरखाव के अभाव में जर्जर होने के कगार पर है और विभागीय पदाधिकारी इन तमाम बातों से कोई इत्तेफाक नहीं रखते. तभी तो 32 लाख की आबादी को गहन चिकित्सा सेवा के लिए निजी क्लिनिक और दूसरे बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है.
जारी है रेफर करने की आदत
तीन नेशनल हाइवे और रेल मंडल होने के बावजूद जिले में गहन चिकित्सा केंद्र का कार्यरत न होना बेशक आमजनों के लिए खतरनाक है. गंभीर रूप से घायल व बीमार मरीजों को अक्सर रेफर का शिकार होना पड़ता है. सदर अस्पताल के डॉक्टर सुविधाएं नहीं होने का रोना रोकर मरीजों को बेहतर इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज, सिलीगुड़ी, भागलपुर, पटना रेफर कर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लेते हैं. ताज्जुब की बात तो यह है कि तीन-तीन नेशनल हाइवे होने व रेल मंडल होने के कारण अक्सर रोड साइड एक्सीडेंटल केस और गंभीर रूप से बीमार मरीजों की संख्या जिले में अधिक रहती है. बावजूद इसके आजतक गहन चिकित्सा केंद्र को दुरुस्त नहीं कराया जा सका है.
गहन चिकित्सा केंद्र में विशेषज्ञ डॉक्टर और दक्ष कर्मियों की कमी है. विभाग के आला अधिकारियों को लिखित रूप से सूचना दे दी गयी है. जल्द ही सबकुछ दुरुस्त हो जायेगा. जून में बहाली की प्रक्रिया शुरू होगी और रिक्त पड़े पदों को भरा जायेगा.
डॉ एससी झा, सीएस
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