कटिहारः जिले में पुलिस किस तरह लापरवाह होकर कांडों का अनुसंधान कर रही है, इसका जीता-जागता उदाहरण व्यवहार न्यायालय कटिहार में देखने को मिला. बलिया बैलोन थाना के बालूगंज निवासी अली रेजा पिता मास्टर ग्यासुद्दीन को लूट के एक मामले में अभियुक्त बना दिये जाने के कारण बिना वजह उसे शनिवार को जेल जाने को मजबूर होना पड़ा.
इसकी जानकारी देते हुए अली रेजा के अधिवक्ता राजकुमार साह ने बताया कि अली रेजा एक मामले में बलिया बैलोन थाना में एक फरवरी 2012 को गिरफ्तार कर मंडल कारा कटिहार भेज दिया गया. वहां वह 15 मई तक जेल में बंद था. उच्च न्यायालय पटना ने 14 मई 2012 को अली रेजा को जमानत दे दी.
अभियुक्त ने जुड़वाया नाम
इसी बीच 17 अप्रैल 2012 क ो लूट की एक घटना को लेकर बलिया बैलौन थाना में अज्ञात लोगों के विरुद्ध मामला दर्ज किया गया. इस कांड के अनुसंधान कर्ता अवर निरीक्षक सीपी यादव थे. एक वर्ष तक अनुसंधान में प्रगति नहीं होने पर पुलिस अधीक्षक, कटिहार ने इस कांड का अनुसंधान कर्ता सफीउल्लाह को बनाया. उन्होंने अनुसंधान को आगे बढ़ाते हुए एक अप्रैल 2013 को एक अभियुक्त जमील अख्तर के बयान पर अली रेजा का नाम डायरी में जोड़ दिया.
पुलिस की चार्जशीट में अली रेजा को लूट करने का आरोपी बना कर पेश किया गया. इसके बाद न्यायालय ने उसके विरुद्ध संज्ञान लिया. पुलिस द्वारा धरपकड़ की कार्रवाई किये जाने पर अली रेजा को जानकारी मिली कि उसे इस मामले में अभियुक्त बना दिया गया है. उक्त कांड में जब उसने न्यायालय में जमानत लेने के लिए आत्मसर्पण किया, तो न्यायालय ने उसकी जमानत को नामंजूर कर उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया.