रामपुर गांव में पक्की सड़क के सपने अधूरे

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प्रखंड मुख्यालय से महज पांच सौ मीटर दूर रामपुर गांव में कच्ची सड़क ही सहारा रामपुर : रामपुर प्रखंड जिस गांव के नाम पर रखा गया हो व जिसके सिवाना में प्रखंड मुख्यालय बना हो, उस गांव तक आने-जाने के पक्की सड़क आज तक नहीं बनी है. सरकार द्वारा प्रत्येक गांव तक पक्की पथ बनवाया […]

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प्रखंड मुख्यालय से महज पांच सौ मीटर दूर रामपुर गांव में कच्ची सड़क ही सहारा
रामपुर : रामपुर प्रखंड जिस गांव के नाम पर रखा गया हो व जिसके सिवाना में प्रखंड मुख्यालय बना हो, उस गांव तक आने-जाने के पक्की सड़क आज तक नहीं बनी है. सरकार द्वारा प्रत्येक गांव तक पक्की पथ बनवाया जा रहा है. लेकिन, प्रखंड के कई गांवों में जाने के लिए लोगों को कच्ची पथ ही उनका सहारा बना है. इस गांव के लोग पक्की सड़क के सपने देख कर संतोष कर रहे हैं. प्रखंड मुख्यालय से रामपुर गांव उत्तर पश्चिम दिशा में पांच सौ मीटर की दूरी पर स्थित है. ग्रामीणों ने बताया कि प्रखंड मुख्यालय बने हुए लगभग तीन दशक हो गये. रामपुर गांव तक जाने के लिए दो तरफ से पथ है, लेकिन दोनों तरफ से कच्चा पथ है.
सरकारी सुविधाओं से कोसों दूर: शिववचन राम, बुटन पासवान ने बताया कि इस गांव में 60 घरों में लगभग चार सौ लोग निवास करते है. लगभग 200 मतदाता हैं. इस गांव में पक्की पथ, विद्यालय, आंगनबाड़ी केंद्र, नाली गली, पेयजल, बिजली आदि सरकारी सुविधाओं से कोसों दूर है. गांव में दो चापाकल है. इसमें एक कई माह से खराब है. बिजली विभाग द्वारा पोल गिराया गया है, लेकिन आज तक उस नहीं लगाया और न ही उस पर तार टांगा गया. कच्ची पथ होने के कारण बरसात के दिनों में बारिश होने के बाद पथ कीचड़ से लथपथ हो जाता है. इससे लोगों को उक्त पथ पर चलना मुश्किल हो जाता है. सबसे ज्यादा परेशानी तो स्कूल जानेवाले छोटे-छोटे बच्चों, महिलाएं, वृद्ध व बीमार रोगियों को होती है. इस दौरान लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है.
क्या कहते हैं गांववाले
ग्रामीण वीरेंद्र सिंह, राजाराम बिंद, हीरा सिंह ने बताया कि कृषि विभाग का फार्म भी कई एकड़ में इस गांव में है. खरीफ व रबी फसल के दौरान जिले के वरीय अधिकारी भी देखने के लिए आते जाते रहते हैं. फिर भी पक्की सड़क निर्माण की दिशा में उनके द्वारा कोई पहल नहीं की गयी. यह भी बताया कि पक्की सड़क बनवाने के लिए कई बार स्थानीय सांसद, विधायक व यहां तक की डीएम के जनता दरबार में आवेदन देकर गुहार लगायी गयी, लेकिन किसी द्वारा कोई पहल नहीं की गयी.
क्या कहते हैं मुखिया
इस संबंध में मुखिया अमृत आंनद (सन्नी सिंह) ने बताया कि उक्त गांव तक ईंट सोलिंग के लिए मनरेगा विभाग से योजना दे दिया गया है. अब जैसे ही विकास कार्य के लिए योजना आयेगा, तो पीसीसी ढलाई भी उक्त पथ का कराया जायेगा.
दो माह पहले ओडीएफ हो चुका है यह गांव
ग्रामीणों ने बताया कि दो माह पहले यह गांव खुले में शौचमुक्त हो गया है. सरकार के अधिकारियों का कहना है कि जो गांव खुले में शौचमुक्त हो जायेगा. उस गांव को सभी प्रकार की सरकारी सुविधाओं का लाभ मिलेगा, लेकिन इस गांव में सरकारी सुविधाओं का घोर कमी है. गांव में लगे दो चापाकलों में एक चापाकल बंद पड़ा है. इसके कारण एक चापाकल से लोगों को पीने के पानी के लिए काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है.
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