उड़ी से आया तबरेज को बुलावा बोले पिता : जीत कर ही लौटना
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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अमित सिन्हा ‘भारत सेना का जवान सदा चला सीना तान, जिसे कोई नहीं रोक पाया उसे क्या रोकेगा पाकिस्तान’ अगर मेरी भी जरूरत पड़ी तो, हर वक्त देश के लिए बाॅर्डर पर पहुंचने के लिए मैं भी तैयार हूं. कुछ इसी अंदाज में जिले के बियूर गांव के एक पूर्व फौजी ने अपने फौजी बेटे […]
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अमित सिन्हा
‘भारत सेना का जवान सदा चला सीना तान, जिसे कोई नहीं रोक पाया उसे क्या रोकेगा पाकिस्तान’ अगर मेरी भी जरूरत पड़ी तो, हर वक्त देश के लिए बाॅर्डर पर पहुंचने के लिए मैं भी तैयार हूं. कुछ इसी अंदाज में जिले के बियूर गांव के एक पूर्व फौजी ने अपने फौजी बेटे को सेना के बुलावे पर उरी बार्डर पर रवाना किया. बियूर गांव के पूर्व फौजी और सेना में नॉन कमीशंड ऑफिसर रहे हाजी दीवान शमशेर खां के बेटे दीवान तबरेज खां जो जम्मू कश्मीर के राजौरी सेक्टर के उरी सेक्टर में तैनात है, उनके बुलावे के लिए सेना के बुलावे का फैक्स कैमूर एसपी के पास आया था, इसकी सूचना एसपी द्वारा सोमवार को फौजी तबरेज को दी गयी थी़
सूचना पर 10 दिन पहले लौटा तबरेज दुबारा उरी सेक्टर के लिए मंगलवार को सुबह सात बजे रवाना हो गया. खानगी के वक्त घर परिवार के सभी लोग सहित बियूर गांव के ग्रामीणों ने गर्व के साथ उक्त फौजी को एक नायक के तौर पर रवाना किया़ जाते-जाते एक वादा लिया कि इस बार पाकिस्तानियों को काफी दूर तक खदेड़ देना है ताकि उनकी नापाक नजरें भारत की तरफ भूल कर भी न पड़े.
सेना में रह कर पिता भी कर चुके हैं देश की सेवा : उरी सेक्टर पर मातृभूमि की रक्षा करने लौटे तबरेज के पिता दिवान शमशेर खां भी 1972 में सेना में बहाल हुए थे उन्होंने सेना सेवाकाल में ही खुंखार उग्रवादी संगठन एलटीटीई जिसे पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या करवा दी थी. उसके खिलाफ 1990 में लड़ाई लड़ी थी और इस दौरान हुए एक बारुदी सुरंग बिस्फोट में घायल हो गये थे. दिवान शमशेर के दोनों बेटे फौज में रह रहे हैं छोटा तबरेज बीएसएफ के उरी सेक्टर में तैनात है जबकि बड़ा बेटा तौफिक खां हाल-फिलहाल सेना से रिटायर हो कर घर लौटे हैं.
बेटों ने कहा पापा दुश्मनों को छोड़ना नहीं
सेना के बुलावे पर रवाना होने के दौरान घर और गांव के सभी लोग मौजूद रहे इस दौरान तबरेज के बेटे जो भभुआ में पढ़ते हैं उन्होंने अपने पापा से कहा कि पापा पाकिस्तानी दुख: दे रहे हैं उनको नहीं छोड़ना उनके होश ठिकाने जरुर ले आना. मंगलवार की सुबह फौजी जवान को वापस सरहद पर लौटने के दौरान बियूर गांव में देश प्रेम का जज्बा हिलोरे मार रहा था कुछ गांव के जवान कहते सुने गये कि काश उन्हें भी देश सेवा और पाकिस्तानियों को उनके मांद में खदेड़ने का मौका मिलता.
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