कलश स्थापना के साथ चैती नवरात्र आज से
कलश स्थापना के साथ चैती नवरात्र आज से तृतीय तिथि क्षय होने से इस बार आठ दिन ही होगी देवी की आराधना शुक्रवार से ही होगी हिंदू नववर्ष की शुरुआत भी भभुआ (सदर). देवी आराधना का पर्व चैत्र नवरात्र इस बार 8 अप्रैल से प्रारंभ होकर 15 अप्रैल रामनवमी पर्व के साथ खत्म होगी. इस […]
कलश स्थापना के साथ चैती नवरात्र आज से तृतीय तिथि क्षय होने से इस बार आठ दिन ही होगी देवी की आराधना शुक्रवार से ही होगी हिंदू नववर्ष की शुरुआत भी भभुआ (सदर). देवी आराधना का पर्व चैत्र नवरात्र इस बार 8 अप्रैल से प्रारंभ होकर 15 अप्रैल रामनवमी पर्व के साथ खत्म होगी. इस बार नवरात्र में तृतीया तिथि क्षय होने से आठ दिन ही देवी की आराधना की जायेगी. इस दौरान देवी मंदिरों में नवरात्र के आगमन की तैयारी जोर-शोर से की जा रही है. मुंडेश्वरी मंदिर सहित सभी देवी स्थानों पर तैयारियां अंतिम चरण में है.शुक्रवार आठ अप्रैल से ही हिंदू नववर्ष भी प्रारंभ हो जाता है. इसके साथ ही विक्रम संवत 2073 शुरू हो जायेगी. इस दिन से चैत शुक्ल पक्ष का पहला नवरात्र होने के कारण इस दिन कलश स्थापना की जायेगी. नवरात्र के नौ दिनों में माता के नौ रुपों की पूजा करने का विशेष विधि-विधान है. लेकिन, इस बार आठ दिनों की ही नवरात्र होगी. इन दिनों में जप, पाठ, व्रत-अनुष्ठान, यज्ञ दानादि शुभ कार्य करने से व्यक्ति को पुण्य फलों की प्राप्ति होती है. नवरात्र पर्व को लेकर जिले के सभी देवी मंदिरों में तैयारियां पूरी हो गयी हैं.पहले दिन शैलपुत्री की पूजा नवरात्र का त्योहार इस बार आठ दिनों तक मनेगा. इन दिनों में तीन देवियों पार्वती, लक्ष्मी व सरस्वती के नौ रूपों की पूजा होगी. पहले तीन दिन पार्वती के तीन रूपों (कुमार, पार्वती व काली), अगले तीन दिन लक्ष्मी माता के स्वरूपों व आखिरी के तीन दिन सरस्वती के स्वरूपों की पूजा की जायेगी. ज्योतिषाचार्य सत्येंद्र तिवारी बताते हैं कि आदि शक्ति श्री दुर्गा के प्रथम रूप ही श्री शैलपुत्री है. पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण ये शैलपुत्री कहलाती है. नवरात्र के पहले दिन इनकी पूजा व आराधना की जाती है. उन्होंने बताया कि इनके पूजन से मूलाधार चक्र जाग्रत होता है, जिससे साधक को मूलाधार चक्र जाग्रत होने से प्राप्त होने वाली सिद्धियां प्राप्त होती है.
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