पोखरे का निर्माण नहीं हुआ पर निकाल लिये लाखों

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भभुआ(कार्यालय) : कृषि विभाग द्वारा संचालित योजना एनएमएसए (नेशनल मिशन ऑन सस्टनेबल एग्रीक्लचर) में बड़े पैमाने पर घोटाला उजागर हुआ है. उक्त योजना के तहत चैनपुर प्रखंड के डिहा गांव में बिना पोखरे का निर्माण कराये ही लाखों रुपये निकाल लिये गये. यही नहीं ट्यूबवेल के लिए दिये जानेवाले अधिकतम अनुदान का दूना राशि दे […]

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भभुआ(कार्यालय) : कृषि विभाग द्वारा संचालित योजना एनएमएसए (नेशनल मिशन ऑन सस्टनेबल एग्रीक्लचर) में बड़े पैमाने पर घोटाला उजागर हुआ है. उक्त योजना के तहत चैनपुर प्रखंड के डिहा गांव में बिना पोखरे का निर्माण कराये ही लाखों रुपये निकाल लिये गये. यही नहीं ट्यूबवेल के लिए दिये जानेवाले अधिकतम अनुदान का दूना राशि दे दिया गया.
उक्त अनियमितता तब उजागर हुआ जब वर्तमान जिला कृषि पदाधिकारी ने उक्त योजना के तहत निर्मित पोखरे के स्थल कर जांच की. उन्होंने किसानों से पूछताछ की तो पता चला कि यहां कोई पोखरा का निर्माण नहीं हुआ है और ना ही किसानों को इसकी जानकारी भी है.
एनएमएसए योजना के तहत 2014-15 में 10 तालाब निर्माण का लक्ष्य रखा गया था. इस योजना के तहत पांच तालाब चैनपुर प्रखंड के डीहा गांव में कराये जाने के नाम पर कुल तीन लाख 75 हजार रुपये विभिन्न किसानों के नाम पर निकासी कर ली गयी. जब मौजूदा जिला कृषि पदाधिकारी ने उक्त स्थल पर जाकर निरीक्षण किया तो पता चला कि पांच में से महज एक पोखरे का ही निर्माण हुआ है. जबकि, चार पोखरे का तीन लाख रुपये बगैर निर्माण कराये निकासी कर ली गयी. उक्त योजना के तहत एक पोखरा निर्माण करने पर 75 हजार रुपये दिये जा रहे हैं. जिला कृषि पदाधिकारी ने जिन किसानों के नाम से पोखरा निर्माण के पैसे की निकासी हुई थी उनसे स्थल पर पूछताछ की गयी तो उनके द्वारा बताया गया कि उनकी जमीन में कोई पोखरा का निर्माण नहीं हुआ है और उनके नाम पर कोई पैसे की निकासी की गयी है, इसकी भी जानकारी उन्हें नहीं है.
यही नहीं उक्त योजना के तहत डीहा गांव में ही 20 ट्यूबवेल लगाये जाने थे, जिसके लिए अधिकतम 25 हजार रुपये अनुदान दिया जाना था, जिसमें जिला कृषि पदाधिकारी द्वारा कुल आठ ट्यूबवेल के लिए नियमों को ताक पर रख कर प्रत्येक ट्यूबेल के लिए निर्धारित अधिकतम राशि 25 हजार रुपये की जगह 50 हजार रुपये भुगतान कर दिया गया, जिसमें नियमानुकूल निर्धारित राशि से दो लाख रुपये तत्कालीन जिला कृषि
पदाधिकारी द्वारा भुगतान कर दिया गया.इस बाबत जिला कृषि पदाधिकारी भरत सिंह ने बताया कि उक्त योजना के निदेशक को पत्र लिख कर अनियमितता की जानकारी दी गयी है एवं जांच कर कार्रवाई के लिए विभाग को लिखा जा चुका है.
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