शराब का धंधा नहीं पड़ा मंदा, अब चुपके चुपके खरीदते व छिप कर टकराते जाम

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मनमानी. शराबबंदी के बाद तस्करों के लिए सेफ जोन बना रेलवे मार्ग यूपी से आनेवाली ईएमयू व पीजीएम पैसेंजर ट्रेन बनी तस्करी का जरिया सरकार के खाते में टैक्स हुआ बंद, तो धंधेबाजों की जेब पहले से हो रही ज्यादा गर्म मोहनिया शहर : गया-मुगलसराय रेलखंड पर स्थित भभुआ रोड स्टेशन पर जीआरपी का चेकपोस्ट […]

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मनमानी. शराबबंदी के बाद तस्करों के लिए सेफ जोन बना रेलवे मार्ग

यूपी से आनेवाली ईएमयू व पीजीएम पैसेंजर ट्रेन बनी तस्करी का जरिया
सरकार के खाते में टैक्स हुआ बंद, तो धंधेबाजों की जेब पहले से हो रही ज्यादा गर्म
मोहनिया शहर : गया-मुगलसराय रेलखंड पर स्थित भभुआ रोड स्टेशन पर जीआरपी का चेकपोस्ट है. यहां तीन अधिकारी के साथ पुलिस जवान भी मौजूद रहते हैं. इसके बावजूद रेल मार्ग शराब तस्करों के लिए सेफ माध्यम बन गया है. यहां प्रतिदिन आसानी से लोग यूपी से शराब लेकर जिले के सभी स्टेशनों पर उतरते हैं और अपना धंधा करते हैं.
गौरतलब है कि सूबे में पूर्णरूप से शराबबंदी है. यह हर कोई जानता है. नयी उत्पाद अधिनियम के तहत शराब को लेकर सख्त कानून बने हैं. इसके बावजूद शराब का धंधा अनुमंडल में कम नहीं है. अंतर सिर्फ इतना है पहले पीने व पिलाने वाले लोग शान से काउंटर पर जाकर खरीदते थे. अब चुपके-चुपके खरीदते और छिप कर पीते हैं.
शराबबंदी के बाद शराब का अनुमंडल में कैसे धंधा चल रहा है, ये हुक्मरान और तस्कर ही बेहतर जानते होंगे. पर इतनी बात हर जुबान पर है कि शराब का धंधा सभी की मिलीभगत से चल रहा है. सरकार के खाते में शराब का टैक्स भले ही बंद हो गया. लेकिन, धंधेबाजों की जेब पहले से कई गुणा ज्यादा गर्म हो रही है. धंधेबाज अब शराब को जमीन के नीचे गाड़कर, झाड़ी में छिपा कर, पुराने खंडरनुमा घरों में, जलाशयों में छिपा कर रखते हैं. शराब का धंधा माल वाहक के साथ-साथ निजी कार, लग्जरी वाहनों के जरिये भी खूब होता है. लेकिन, इन दिनों भभुआ रोड के जीआरपी की सुस्ती के कारण ट्रेन तस्करों के लिए सेफ जोन बन गया है.
यहां प्रतिदिन यूपी से आने वाली ईएमयू व बिक्रमगंज पैसेंजर का उपयोग करते है. शराब का धंधा अब दिन की जगह रात के अंधेरे में ज्यादा होती है. जबकि जीआरपी द्वारा ब्रेथ इनलाइजर का भी उपयोग और ट्रेनों की जांच कभी-कभार होती है. इससे शराब तस्करों व पीने वालों का मनोबल बढ़ रहा है.
बोले जीआरपी प्रभारी
जीआरपी के प्रभारी विनय राय ने बताया कि शराबबंदी कानून को लेकर जीआरपी प्रयास में हमेशा रहती है. शराब का जुलाई में एक केश दर्ज हुआ है. अगस्त में एक केश दर्ज किया गया. जांच के लिए ब्रेथ इनलाइजर का भी उपयोग किया जाता है. यहां तक मोबाइल बंद की बात है, तो मोबाइल खराब है, जिसे जमा कर दिया गया है.
जीआरपी का सरकारी नंबर कई माह से बंद
स्थानीय थाने द्वारा ट्रेन से शराब यूपी से लेकर स्टेशन से उतर कर आने के दौरान तीन लोगों को पकड़ा जा चुका है. मोहनिया थानाध्यक्ष द्वारा बताया गया कि ट्रेन से उतर कर शराब के साथ अब तक तीन लोगों को पकड़ा गया है. भभुआ रोड स्टेशन पर स्थित जीआरपी का सरकारी नंबर पिछले कई माह से बंद है. इसके कारण यदि किसी को जीआरपी को कोई सूचना देनी होती है, तो परेशानी होती है. दूसरे प्रदेश से लोग ट्रेन से अपने घरों को पहुंचते हैं. इसमें जहरखुरानी के शिकार होने व कई मुसीबत में लोग जीआरपी थाने से कैसे लोग संपर्क करेंगे. जबकि, थाना के आगे वहीं नंबर अभी तक लिखा हुआ है.
ट्रेन से पुसौली में भी पहुंच रही शराब
शराबबंदी कानून भले ही लागू हुआ. लेकिन, अब भी शराब के शौकीन व तस्कर आराम से शराब का धंधा कर रहे हैं. पुसौली स्टेशन पर प्रतिदिन दो से तीन पेटी शराब ट्रेन के माध्यम से लेकर तस्कर यूपी से आते हैं, जो रात में आराम से ट्रेन से उतार लेते है. पुसौली स्टेशन पर जीआरपी तो ड्यूटी नहीं करती है. लेकिन, आरपीएफ के दो पुलिस जवान ड्यूटी में रहते हैं. इसके बावजूद तस्कर आराम से शराब यूपी से पीजीएम पैसेंजर, बिक्रमगंज पैसेंजर से लेकर पुसौली लाकर शराब का धंधा करते है. इसमें फकराबाद व पुसौली बाजार के कई युवक के शामिल होने की चर्चा है.
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