अधिवक्ता के बाद व्यवसायी बने गवाह

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मोहनिया शहर : भोखरी गांव निवासी स्वर्गीय संजय सिंह के छोटे पुत्र की ट्रेन से हुई मौत मामले की जांच अब तेज हो गयी है. वहीं, इस मामले में इलाहाबाद के अधिवक्ता कुलदीप शर्मा के बाद महोबा निवासी धर्मेंद्र दीक्षित भी पूरी घटना के गवाह बन गये हैं. आरपीएफ से लेकर जीआरपी तक जांच की […]

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मोहनिया शहर : भोखरी गांव निवासी स्वर्गीय संजय सिंह के छोटे पुत्र की ट्रेन से हुई मौत मामले की जांच अब तेज हो गयी है. वहीं, इस मामले में इलाहाबाद के अधिवक्ता कुलदीप शर्मा के बाद महोबा निवासी धर्मेंद्र दीक्षित भी पूरी घटना के गवाह बन गये हैं. आरपीएफ से लेकर जीआरपी तक जांच की जा रही है. जांच में सबकी नजर जीआरपी पर टिकी है. जीआरपी महोबा के प्रभारी शमीम खान ने बताया कि घटना की प्राथमिकी के बाद जांच की जिम्मेवारी रेल एसपी झांसी द्वारा हमें मिली है.
इसे गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी गयी है. इसमें पहले सभी एस टू बोगी के यात्री का चार्ट निकाला गया है, जिससे सभी के पास जाकर बयान लेंगे. मंगलवार को हम इलाहाबाद आये हैं, जहां अधिवक्ता कुलदीप शर्मा का बयान व उनके द्वारा दर्ज करायी गयी प्राथमिकी का आवेदन लेंगे. इसके बाद एक-एक कर कई यात्री का बयान लेना है. सभी का मिलान कर रेल एसपी को सौंपा जायेगा. बिंदुवार जांच में समय तो लगेगा, यानी एक सप्ताह में जांच पूरी कर ली जायेगी. इसमें निष्पक्ष जांच की जा रही है. दोषियों बख्शा नहीं जायेगा. दूसरे गवाह के बारे में हमें जानकारी नहीं है. यदि दूसरा यात्री घटना की जानकारी आकर देता है, तो केस में काफी मजबूती मिलेगी.
उधर, आरपीएफ झांसी के सुरक्षा आयुक्त द्वार स्वयं मामले की जांच की जा रही है. इसमें घटना के समय ड्यूटी में तैनात आरपीएफ एसआई राजकुमारी गुर्जर, पुरुष एसआइ संदीप पांडेय सहित पुलिस जवान से भी पूछताछ की जा रही है. जबकि, पिछले दिनों भाजपा के महामंत्री राजेंद्र सिंह द्वारा यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर कार्रवाई के लिए गुहार लगायी थी. गौरतलब है कि 24 अगस्त को चंबल एक्सप्रेस में यात्रा के दौरान राहुल को आरपीएफ व टीसी द्वारा काफी प्रताड़ित किया गया था, जिससे उसकी मौत को लेकर मृतक के चाचा छोटन सिंह व एक ट्रेन यात्री कुलदीप शर्मा द्वारा प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी.
डेढ घंटे तक राहुल को किया प्रताड़ित: चंबल एक्सप्रेस में 24 अगस्त को राहुल के साथ जो कुछ भी आरपीएफ व टीसी द्वारा किया गया, उसका इलाहाबाद के अधिवक्ता कुलदीप शर्मा के बाद अब महोबा निवासी व्यवसायी धर्मेंद्र दीक्षित भी पूरी घटना के गवाह बन गये है. उन्होंने पूरी घटना का जिक्र प्रभात खबर से बातचीत में किया. कहा कि हम महोबा के रहनेवाले हैं. पहले एचडीएफसी में नौकरी करते थे. लेकिन, फिलहाल व्यवसाय करते हैं.
हम भी दिल्ली से 24 अगस्त को आ रहे थे. हमारा टिकट निजामुद्दीन एक्सप्रेस में था. लेकिन, ट्रेन के डाइवर्ट होने के कारण हम भी चंबल एक्सप्रेस में सवार हो गये. एस टू स्लीपर में ही यात्रा कर रहे थे. बिहार के कैमूर निवासी राहुल से आरपीएफ व टीसी से विवाद होने का मुख्य कारण था कि आरपीएफ द्वारा वेंडरों से किये जा रहे वसूली का राहुल ने वीडियो बना लिया था, जिसे आरपीएफ कर्मी द्वारा देख लिया गया था.
इसके बाद टीसी व आरपीएफ जवान कुल नौ लोग ने मिल कर पूरे डेढ़ घंटे तक उसे प्रताड़ित किया, जिसका अधिवक्ता और हम काफी विरोध भी किये थे. लेकिन, हमलोगों को भी डरा दिया गया. इसके बाद झूठ के केस में फंसाने के लिए धमकी भी दी. हमलोगों के विरोध करते हुए देख आरपीएफ ने आगे एस फोर व फाइव के बोगी की तरफ ले जाने लगे. जबकि, राहुल कहता रहा हमें बचाओ हमारा क्या कसूर है.
लेकिन, कोई सामने बचाने नहीं आया. कुछ देर बाद मऊरानीपुर स्टेशन आया. तब उधर से सभी आरपीएफ व टीसी हमारे बोगी से होकर उतरने के लिए जाने लगे. तब हमने पूछा कि उस लड़के का क्या हुआ, तो कोई जवाब नहीं दिया गया. कुछ देर के बाद मालूम हुआ कि उक्त ट्रेन से गिरने से उसकी मौत हो गयी. काफी देर तक प्रताड़ित किया गया था. अब अधिवक्ता के साथ-साथ हम भी घटना के गवाह हैं. ताकि, अब कोई दूसरा राहुल सरकारीकर्मियों का शिकार न बन सके.
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