गांवों में पानी के लिए हाहाकार
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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अनदेखी. मोहनिया की 13 पंचायतों में 351 चापाकल खराब, लोग परेशान धरी की धरी रह गयी हर घर नल का जल योजना मोहनिया सदर : रहिमन पानी रखिए बिन पानी सब सून, पानी गये न उबरे मोती मानूस चून आज मोहनिया प्रखंड की 13 पंचायतों में पानी के लिए मचे हाहाकार ने रहिम जी की […]
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अनदेखी. मोहनिया की 13 पंचायतों में 351 चापाकल खराब, लोग परेशान
धरी की धरी रह गयी हर घर नल का जल योजना
मोहनिया सदर : रहिमन पानी रखिए बिन पानी सब सून, पानी गये न उबरे मोती मानूस चून आज मोहनिया प्रखंड की 13 पंचायतों में पानी के लिए मचे हाहाकार ने रहिम जी की इस पंक्ति को निरस कर दिया है. स्थिति यह है कि एक अदद् अपनी प्यास बुझाने के लिए लोगों को कितनी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. यह तो वही जान रहे है जो इस समस्या से जूझ रहे हैं. सरकार अपने सात निश्चय योजना में शामिल ‘हर घर नल का जल’ योजना चला कर लोगों को शुद्ध पेयजल पहुंचाने का दावा कर रही है,
लेकिन यह जल लोगों के घरों तक कब पहुंचेगा, कुछ कह पाना मुश्किल है. प्रखंड में कोई ऐसी पंचायत नहीं है जहां लोगों को नल का जल उपलब्ध हो. मुखिया द्वारा विभिन्न गांवों में लगाये गये 351 चापाकल आज खराब पड़े हैं,
जिनको बनानेवाला कोई नहीं है. एक तरफ जहां लोगों के पानी की समस्या को देखते हुए खराब पड़े चापाकलों को बनवाने के लिए मुखिया अपने पंचायतों की बड़ी लिस्ट बीडीओ को थमा रहे हैं, वहीं बीडीओ संबंधित विभाग को इन खराब पड़े चापाकलों को बनवाने के लिए पत्र लिख-लिख कर थक चुके हैं, फिर भी आज तक एक भी चापाकल विभाग नहीं बनवा सका. यदि हम बघिनी पंचायत के बहदुरा गांव की बात करें तो यहां चार में से तीन चापाकल खराब पड़े हैं. यहां एक तालाब तक नहीं है,
जिसमें पशु पक्षी अपनी प्यास बुझा सकें. यहां का जल स्तर काफी नीचे है. यहां 350 फुट बोरिंग कराने के बाद ही पानी निकलता है. निजी चापाकल लगवा पाना सबके बस की बात नहीं. आज भी दलित बस्ती के लोग कुएं का पानी पीते हैं. यह तो एक उदाहरण है, न जाने कितनी पंचायतों में इससे भी भयावह स्थिति है. सबसे अधिक अमेठ में 86 व अकोढ़ीमेला पंचायत में 65 चापाकल खराब पड़े हैं.
विभाग के पास सामग्री नहीं
विभागीय सूत्रों की मानें तो जो मुखिया द्वारा चापाकल लगवाये गये हैं, उसको पीएचइडी मृत घोषित कर चुका है. इसको बनाने के लिए उसमें लगने वाले पिलिंजर व वासर तक विभाग के पास उपलब्ध नहीं है. ऐसी स्थिति में भला खराब पड़े इन चापाकलों को कर्मचारी कैसे बना सकते हैं. पीएचइडी द्वारा प्रखंड में लगाये गये सफेद व मोटे वाले खराब पड़े 274 चापाकलों को ठीक कर दिया गया है. जिन चापाकलों का बोर बैठ चुका है. उनको नहीं बनाया जा सकता है.
उसके लिए कार्यपालक अभियंता से आदेश मिलने के बाद उस स्थान से थोड़ा हट कर अलग नयी बोरिंग करनी पड़ती है. विभाग की मानें तो प्रखंड की 18 पंचायतों में 36 नये चापाकल पीएचइडी को लगाना है. लेकिन जिसको चापाकल लगाने का टेंडर दिया गया है.
भरखर 12
पानापुर 20
अमेठ 86
मुजान 32
दादर 13
बढुपर 08
भोखरी 11
अकोढ़ीमेला 65
उसरी 32
बम्हौरखास 08
कटराकला 10
भिट्टी 22
बेलौड़ी 32
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