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घनी आबादी में मानक के अनुरूप नहीं चल रहे ईंट-भट्ठे, प्रदूषण का खतरा

नगर परिषद क्षेत्र सहित ग्रामीण इलाकों में आवास एवं घनी आबादी के आसपास ईंट-भट्ठे चलाया जा रहा है जिससे प्रदूषण ही प्रदूषण फैल रहा है

अरवल.

नगर परिषद क्षेत्र सहित ग्रामीण इलाकों में आवास एवं घनी आबादी के आसपास ईंट-भट्ठे चलाया जा रहा है जिससे प्रदूषण ही प्रदूषण फैल रहा है. इससे पर्यावरण तो प्रदूषित हो ही रहा है, ईंट-भट्ठे भी मानक के अनुरूप नहीं चल रहा है. ईंट निर्माण के लिए सरकार द्वारा जारी किये गए मानक का जिले में अधिकांश जगहों पर पालन नहीं किया जा रहा है. विभाग भी केवल कागजी खानापूर्ति में लगी है. ईंट-भट्ठे के लिए तय मानक के अनुरूप जिले में कार्य हो इसके लिए विभाग ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, जिसका परिणाम है ईंट भट्ठा संचालकों की लापरवाही व मनमानी के वजह से जगह जगह चिमनी धुआं के रूप में जहर उगल रहे हैं. इन दिनों निर्माण कार्य तेजी से होता है. ईंट की आवश्यकता भी अधिक होती है. इसलिए निर्माण ज्यादा हो, हर संचालक चाहते हैं. इसके चक्कर में नियम कानून की भी जमकर अवहेलना कर रहे हैं. लेकिन कोई देखने सुनने वाला नहीं है. मानक विपरीत चल रहे ईंट-भट्ठे की चिमनियों से निकल रहे धुएं से पर्यावरण को खासा नुकसान उठाना पड़ रहा है. नियमानुसार चिमनियों के नीचे पानी का टैंक बनाए जाने का प्रावधान है. जिससे उससे निकलने वाले हानिकारक धुएं को कुछ हद तक रोका जा सके. ईंट-भट्ठे पर ऐसे टैंकों का निर्माण होना अनिवार्य है. इसके साथ ही चिमनियों की डिजाइन व ऊंचाई भी निर्धारित है. ताकि उससे निकलने वाला धुआं ऊपर ही उड़ कर निकल जाये. ऐसा नहीं करने से पर्यावरण के खतरे के साथ ही हरियाली का नुकसान पहुंचता है. फलदार पेड़ों में फल नहीं आते है और ऊंचाई वाले पेड़ों के बाग आदि पर इसका खासा असर पड़ता है. जिले में संचालित ईंट भट्ठे मानक पर खरे उतरे रहे हों. अधिकारियों को सरकारी राजस्व से मतलब है. उन्हें इनके मानकों से कुछ लेना देना नहीं है. जांच तक करना उचित नहीं समझते.

पर्यावरण भी हो रहा है प्रभावित :

चाहे ईंट पथाई का मामला हो या फिर ईंट पकाने का. किसी मामले का सतही जांच नही की जाती. मात्र राजस्व वसूली तक विभागीय कार्रवाई सिमट कर रह गई है. जहां तक पर्यावरण प्रमाण पत्र का मामला है, तो तो इसके लिए यहां कोई पदाधिकारी है नहीं. सारा कार्य पटना प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड करता है. इससे विभाग का भला भले ही हो रहा हो आम लोगों का प्रदूषण का दंश झेलना पड़ रहा है. आंकड़े बताते है कि मिट्टी की लगातार हो रही कटाई से हार साल हजारों एकड़ भूमि बंजर हो रही है. इससे प्रदूषण का खतरा बढ़ने के साथ-साथ जलस्तर भी गिर रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, खनन के बाद उस स्थान पर मिट्टी का दबाव कम होने से पानी ऊपर आ जाता है. इससे दूसरे स्थान का जलस्तर भी गिर जाता है. वहीं मिट्टी के अंदर रहने वाले सूक्ष्म जीवों को नष्ट हो जाने से पर्यावरण को खतरा उत्पन्न हो जाता है.

पर्यावरण और प्रदूषण विभाग से अनुमति के बाद ही करना है मिट्टी का खनन :

विशेषज्ञ बताते हैं कि अगर मिट्टी कटाना जरूरी है तो इसके लिए गहराई में मिट्टी खनने से पहले उसके ऊपरी परत को काट कर अलग रख देना चाहिए. इसके बाद जितनी मिट्टी की जरूरत है निकाल ले और फिर खनन के बाद ऊपरी परत की उस मिट्टी को उस पर डालकर लेवल कर देना होता है. ताकि खेती योग्य बना रहे सके। हालांकि, पर्यावरण व प्रदूषण विभाग से एनओसी लेने के बाद ही खनन विभाग चिमनी के लिए लाइसेंस जारी करता है. इसके तहत अधिकतम 9 फीट गहराई तक ही मिट्टी की खुदाई करनी है.

क्या कहते हैं अधिकारीजिले के चार ईंट भट्ठा संचालक पर नोटिस किया गया है. बाकी जो भी ईंट भट्ठा संचालित हो रहे हैं, नियम के अनुकूल ही संचालित हो रहे हैं. नवेंदु सिंह, जिला खनन पदाधिकारी, अरवल

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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