जीएसटी दुकानदारों के लिए अबूझ पहेली

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अब हर माह जीएसटी जमा करना होगा टैक्स जमा करना परेशानी का सबब बना लाभ के बजाय नुकसान ही हो रहा जहानाबाद नगर : जीएसटी यानी गुड्स एंड सर्विस टैक्स एक अप्रत्यक्ष कर यानी इनडायरेक्ट टैक्स है. जीएसटी के तहत वस्तुओं और सेवाओं पर एक सम्मान टैक्स लगाया जाता है. सरकार द्वारा एक देश एक […]

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अब हर माह जीएसटी जमा करना होगा
टैक्स जमा करना परेशानी का सबब बना
लाभ के बजाय नुकसान ही हो रहा
जहानाबाद नगर : जीएसटी यानी गुड्स एंड सर्विस टैक्स एक अप्रत्यक्ष कर यानी इनडायरेक्ट टैक्स है. जीएसटी के तहत वस्तुओं और सेवाओं पर एक सम्मान टैक्स लगाया जाता है. सरकार द्वारा एक देश एक टैक्स के स्लोगन के साथ एक जुलाई को लागू की गयी जीएसटी व्यवसायियों के लिए अबूझ पहेली बनी है.
व्यवसायियों को यह समझ में ही नहीं आ रहा है कि आखिर वे जीएसटी जमा करें तो कैसे करें. उनके पास पुराना स्टॉक भी पड़ा है. वहीं नया स्टॉक भी आ रहा है तथा उसकी बिक्री हो रही है. ऐसे में वे किस पर जीएसटी जमा करें यह समझ से परे है. वहीं जीएसटी से जुड़े अधिवक्ता भी उन्हें स्पष्ट नहीं बता पा रहे हैं कि जीएसटी कैसे जमा करें.
पहले तीन महीने पर सेल टैक्स जमा करना पड़ता था लेकिन अब प्रत्येक माह जीएसटी जमा करनी पड़ रही है. ऐसे में व्यवसायियों को लाभ के बजाय नुकसान ही हो रहा है. एक तो जीएसटी उनकी समझ से परे है, दूसरे प्रत्येक माह टैक्स जमा करना परेशानी का सबब बना हुआ है.
वहीं समय पर टैक्स जमा नहीं करने पर प्रतिदिन दौ सौ रुपये के फाइन ने व्यवसायियों को परेशान कर दिया है. जीएसटी लागू होने से पूर्व सरकार ने इंस्पेक्टर राज खत्म करने का सपना दिखाया था. पहले तीन माह पर एक बार सेल टैक्स जमा करना होता था, जिसके लिए संबंधित अधिवक्ता द्वारा नोमिनल फीस ली जाती थी, लेकिन अब जीएसटी के लिए प्रत्येक माह मोटी फीस ली जा रही है.
जो सेल टैक्स है वही जीएसटी है:
सेल टैक्स में तिमाही रिटर्न दाखिल करना होता है, जबकि जीएसटी में मंथली रिटर्न दाखिल करना होता है, जिसमें खरीद -बिक्री का ब्योरा देना होता है. जीएसटी में प्रोफिट पर ही टैक्स देना होता है. जो व्यवसायी समय पर जीएसटी रिटर्न फाइल नहीं किये हैं उन पर प्रतिदिन 200 रुपये के हिसाब से लेट फाइन लगाया गया है.
पुराने सामान का ऑरिजिनल बिल है और उसे सेल टैक्स में दिखाये हैं, तो उस टैक्स में छूट मिलेगी. अगर व्यवसायी बिल से माल खरीदते हैं और बेचे गये माल का सही बिल नहीं काटते हैं या सही ब्योरा नहीं रखते हैं, तो उनके लिए जीएसटी रिटर्न तथा टैक्स जमा करना कठिन होगा.
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