सरौन काली मंदिर में भक्तों की होती हैं मन्नतें पूरी

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सरौन काली मंदिर की वार्षिक पूजा आगामी तीन जुलाई को बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों से आते हैं भक्त मां काली की वार्षिक पूजा को लेकर तैयारी प्रारंभ चंद्रमंडीह : चकाई प्रखंड क्षेत्र स्थित सरौन काली मंदिर का वार्षिक पूजा आगामी 03 जुलाई को होना सुनिश्चित हुआ है. इस बाबत जानकारी देते हुए […]

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सरौन काली मंदिर की वार्षिक पूजा आगामी तीन जुलाई को

बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों से आते हैं भक्त
मां काली की वार्षिक पूजा को लेकर तैयारी प्रारंभ
चंद्रमंडीह : चकाई प्रखंड क्षेत्र स्थित सरौन काली मंदिर का वार्षिक पूजा आगामी 03 जुलाई को होना सुनिश्चित हुआ है. इस बाबत जानकारी देते हुए मंदिर के पुजारी दशरथ पांडेय बताते हैं कि सरौन क्षेत्र के अजय नदी और बड़का आहर के किनारे पर स्थित मंदिर को लेकर एक कथा प्रचलित है कि इसका निर्माण 500 से 700 वर्ष पहले ग्राम गादी के प्रह्लाद सिंह के वंशजों ने मंदिर का निर्माण कराया था. वे बताते हैं कि उस वक्त इस जमीन पर घना जंगल हुआ करता था.
अचानक एक दिन ग्रामीणों को एक बिस्फोट की आवाज सुनाई पड़ी. जो उस भूखंड से हुई थी. आवाज सुनकर गांव के सैकड़ों लोग एकत्रित हुए और देखा कि वहां पर जमीन फटकर सिंदुर से लिपटा एक चार-पांच फिट का पिंडी निकला हुआ है. भगवान की प्रेरणा से लोग मंदिर का निर्माण करवाये और विधि पूर्वक पूजा अर्चना करने लगे. तब से लोग इस मंदिर में पूजा अर्चना किया करते है. ऐसी मान्यता है कि जो भक्तजन सच्चे मन से जो कुछ भी मां काली के सामने जो भी मन्नतें मांगते हैं. मां उनकी हर मनोकामना पूरा करती है. इस मंदिर में प्रत्येक वर्ष आषाढ़ माह में वार्षिक पूजा का आयोजन किया जाता है. पूजा में बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों के भक्तजन करीब एक लाख की संख्या में यहां होने वाले एक दिवसीय पूजा में भाग लेने सरौन पहुंचते है तथा मन्नतें पूरी होने के उपलक्ष्य मे यहां बकरे की बलि देने की मान्यता है. ऐसे में वार्षिक पूजा में आठ दस हजार बकरे की बलि दी जाती है. इसके अलावा जिस दिन मेला होता है. उस दिन बच्चों के मनोरंजन के लिए विशेष व्यवस्था की जाती है. एक ऐसी भी मान्यता है कि मंदिर के अंदर कभी कभी यहां सर्प निकलता है जो भक्त जन उस सर्प को देख लेता है. उसकी मन्नत जरुर पूरी होती है. मान्यता है कि सर्प को देखने के बाद उसे साक्षात मां काली के दर्शन हो गये. पूजा समिति के सदस्य थानु यादव, हरि किशोर चौधरी, बंगटु यादव, सिताबी यादव आदि ने बताया कि मां काली की वार्षिक पूजा को लेकर तैयारी प्रारंभ कर दिया गया है.
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