पहले स्वास्थ्यकर्मी करते थे इलाज, अब वह भी बंद

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हाल सदर अस्पताल स्थित एसएनसीयू का यहां नहीं आते हैं चिकित्सक 21 जुलाई को हुआ था उद्घाटन यहां से रोज लौटते हैं रोगी जमुई : सदर अस्पताल परिसर स्थित विशेष नवजात शिशु इकाई केंद्र अब शोभा की वस्तु बन कर रह गया है यहां इलाज को लेकर आनेवाले मरीज को मौजूद कर्मी स्वास्थ्य कर्मियों के […]

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हाल सदर अस्पताल स्थित एसएनसीयू का

यहां नहीं आते हैं चिकित्सक
21 जुलाई को हुआ था उद्घाटन
यहां से रोज लौटते हैं रोगी
जमुई : सदर अस्पताल परिसर स्थित विशेष नवजात शिशु इकाई केंद्र अब शोभा की वस्तु बन कर रह गया है यहां इलाज को लेकर आनेवाले मरीज को मौजूद कर्मी स्वास्थ्य कर्मियों के द्वारा लौटा दिया जा रहा है. जानकारी के अनुसार क्षेत्र के नवजात व शिशु के बेहतर स्वास्थ्य को लेकर बीते 21 जुलाई 2016 को जिलाधिकारी के द्वारा अस्पताल परिसर स्थित लाखों की लागत से एसएनसीयू केंद्र का उद्घाटन किया गया. नाम के मुताबिक केंद्र में ऑक्सीजन, वजन करने की मशीन, चिकित्सक, स्वास्थ्य कर्मी सहित अन्य आधुनिक सुविधा भी मुहैया कराया गया. लेकिन अस्पताल आने वाले मरीज के परिजनों की बात मानें तो केंद्र में शायद ही चिकित्सक नजर नहीं आते हैं.
यहां स्वास्थ्य कर्मी के द्वारा ही बच्चों का भगवान भरोसे इलाज किया जा रहा है और वर्तमान में यह सुविधा भी बंद है. लोगों ने बताया कि विभाग के पदाधिकारी द्वारा जानकारी दी गयी थी कि इस स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों की देखभाल को लेकर उसकी मां को भी रखा जाता है और उसे सभी सुविधा मुहैया कराया जाता है. लेकिन व्यवस्था बिल्कुल विपरीत दिख रही है. एसएनसीयू के आंकड़ों पर नजर डालें तो बीते एक वर्ष में लगभग डेढ़ सौ नवजातों को भर्ती कराया गया. जिनमें से अधिकतर बच्चों को बेहतर इलाज के लिए रेफर कर दिया गया. उनका कहना है जब नवजात इकाई केंद्र में उचित देखभाल का प्रबंध नहीं किया गया है तो भव्य भवन व बेहतर व्यवस्था का ढोल क्यों पीटा जा रहा है.
कहते हैं अधिकारी
विशेष नवजात केंद्र के देखभाल को लेकर अस्पताल के प्रबंधक को अधिकृत किया गया है. सही जानकारी के बाद ही उचित कार्रवाई संभव है. बच्चे भगवान के रूप होते हैं, उनके साथ नाइंसाफी करने वाले दंड के भागी होंगे.
डा श्याम मोहन दास, सीएस, जमुई
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