गोपालगंज: मां की आखिरी इच्छा को बनाया लक्ष्य, बेटी ने असिस्टेंट प्रोफेसर बनकर किया सपना पूरा
मां के सपने को पूरा कर असिस्टेंट प्रोफेसर बनीं पारुल राय.
Parul Rai Success Story: गोपालगंज की पारुल राय ने मां के निधन के बाद हार नहीं मानी. मां के सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने असिस्टेंट प्रोफेसर बनकर मिसाल पेश की.
Parul Rai Success Story: मां की गंभीर बीमारी, अस्पताल में उनकी देखभाल और फिर उनके निधन का गहरा सदमा. एक बेटी के लिए यह जिंदगी का बेहद मुश्किल दौर था. लेकिन गोपालगंज की पारुल राय ने परिस्थितियों के सामने हार नहीं मानी. मां के सपने को पूरा करने का संकल्प लेकर उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी. मां के निधन के बाद पिता और घर की जिम्मेदारी भी संभाली. तमाम चुनौतियों के बीच उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने बिहार सरकार के राजकीय महाविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर का पद हासिल कर लिया. आज पारुल की सफलता संघर्ष, धैर्य और दृढ़ इच्छाशक्ति की मिसाल बन गयी है.
इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पूरी की स्नातक और परास्नातक की पढ़ाई
गोपालगंज जिले के कुचायकोट प्रखंड के ढेबवां गांव की रहने वाली पारुल राय ने इसी वर्ष 11 अगस्त को पंचदेवरी स्थित राजकीय महाविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में योगदान दिया. वह गांव के पोस्टमास्टर संजय कुमार राय और स्वर्गीय शशि राय की चार संतानों में दूसरे नंबर पर हैं.
पारुल ने वर्ष 2022 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से प्रथम श्रेणी में स्नातक की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद वर्ष 2024 में इसी विश्वविद्यालय से आधुनिक इतिहास विषय में परास्नातक की डिग्री हासिल की. उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी और अपने करियर को लेकर लगातार मेहनत करती रहीं.
अस्पताल में मां की सेवा के साथ जारी रखी पढ़ाई
इसी दौरान नवंबर 2024 में उनकी मां शशि राय की तबीयत गंभीर रूप से बिगड़ गयी. बेहतर इलाज के लिए उन्हें दिल्ली ले जाया गया. मां की बीमारी की जानकारी मिलते ही पारुल भी दिल्ली पहुंच गयीं और अस्पताल में रहकर उनकी देखभाल करने लगीं.
परिवार के लिए यह बेहद कठिन समय था. एक तरफ मां की गंभीर बीमारी की चिंता थी, तो दूसरी तरफ पारुल के सामने अपनी पढ़ाई और भविष्य की चुनौती भी थी. इसके बावजूद उन्होंने पढ़ाई नहीं छोड़ी. मां भी चाहती थीं कि बेटी अपने लक्ष्य को हासिल करे और शिक्षा के क्षेत्र में अपना करियर बनाये. उन्होंने पारुल को आगे बढ़ने और दूसरे बच्चों के भविष्य निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित किया.
मां की इस इच्छा को पारुल ने अपने जीवन का संकल्प बना लिया. अस्पताल में मां की सेवा करने के साथ उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी जारी रखी.
मां के निधन के बाद संभाली परिवार की जिम्मेदारी
जुलाई 2025 में पारुल ने नेट की परीक्षा दी. परीक्षा अच्छी हुई थी, लेकिन परिणाम आने से पहले ही 11 अगस्त को उनकी मां का निधन हो गया. मां को खोने का सदमा उनके लिए बेहद गहरा था. वह पूरी तरह टूट गयी थीं.
परिवार में कोई अन्य महिला सदस्य नहीं होने के कारण उन्हें गांव लौटना पड़ा. इसके बाद उन्होंने एक साथ कई जिम्मेदारियां संभालीं. पढ़ाई जारी रखने के साथ पिता की देखभाल और घर की जिम्मेदारी भी उठायी. मुश्किल हालात के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से ध्यान नहीं हटाया.
लगातार तीन नेट परीक्षाओं में हासिल की सफलता, बनीं असिस्टेंट प्रोफेसर
पारुल ने कठिन परिस्थितियों में भी अपनी तैयारी जारी रखी. उन्होंने लगातार तीन नेट परीक्षाओं में सफलता हासिल की. इसके साथ ही जेआरएफ और पीएचडी की तैयारी भी जारी रखी.
इसी बीच बिहार सरकार की ओर से महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए आवेदन मांगे गये. पारुल ने भी आवेदन किया और चयनित होकर पंचदेवरी स्थित राजकीय महाविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर योगदान दिया.
इस तरह उन्होंने अपनी मेहनत से मां का सपना साकार कर दिया. जिस लक्ष्य को हासिल करने के लिए मां ने बीमारी के दौरान उन्हें हौसला दिया था, उसे पारुल ने संघर्ष, लगन और आत्मविश्वास के दम पर पूरा कर दिखाया.
अनुशासन और मेहनत से महाविद्यालय में बनायी पहचान
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ अमरेंद्र कुमार ने बताया कि पारुल राय अनुशासनप्रिय हैं और अपने काम के प्रति गंभीर रहती हैं. कम समय में ही उन्होंने छात्र-छात्राओं के बीच अपनी विशेष पहचान बनायी है. उनका व्यवहार और कार्य के प्रति समर्पण सराहनीय है.
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