गोपालगंज : सेंट्रल बैंक पर जिला उपभोक्ता फोरम ने 30 हजार रुपये का अर्थदंड तथा पांच हजार रुपये के मुकदमा खर्च का भुगतान करने का आदेश दिया है. साथ ही नो ड्यूज सर्टिफिकेट भी पीड़ित को तत्काल देने को कहा है. फोरम के आदेश के बाद पीड़ित कांग्रेस नेता हरेंद्र दुबे को राहत मिली है. बता दें कि कुचायकोट थाना क्षेत्र के नारायणपुर गांव के रहनेवाले हरेंद्र कुमार दुबे, कांग्रेस के नेता हैं. 1982 में व्यवसाय करने के लिए इन्होंने 25 हजार रुपये का ऋण सेंट्रल बैंक कुचायकोट से लिया.
1983 में बैंक ने इनके खाते के परिचालन पर रोक लगा दी. हरेंद्र दुबे कारण जानना चाहे, तो संतोषजनक बात नहीं बतायी गयी. 1995 में एक मुश्त समझौता शिविर का आयोजन बैंक की तरफ से किया गया, जिसमें हरेंद्र दुबे ने आवेदन दिया और 25 हजार रुपये जमा करा लिया गया तथा नो ड्यूज सर्टिफिकेट के लिए बाद में बुलाया गया. दोबारा वे दौड़ते रहे, उन्हें वे नो ड्यूज नहीं मिला. 1999 में पुन: बैंक ने नोटिस जारी किया. नोटिस के बाद 17230 रुपये फिर जमा कराया गया.
हरेंद्र दुबे को लगा कि कर्ज से छुटकरा मिल गया, लेकिन नो ड्यूज नहीं मिला. छह दिसंबर, 2014 को पीड़ित ने लोक अदालत में आवेदन दिया. बैंक ने मामले में लोक अदालत में समझौता नहीं किया. अंत में पीड़ित ने उपभोक्ता अदालत का दरवाजा खटखटाया, जिसमें सेंट्रल बैंक कुचायकोट, मुख्य प्रबंधक गोपालगंज, रीजनल मैनेजर सीवान, लीड बैंक के मैनेजर तथा जोनल मैनेजर को आरोपित किया गया.