घरेलू विवाद . अपनों पर टूट रहा भरोसा, तो कोर्ट तक पहुंच रहे मामले

Published at :18 Feb 2016 6:27 AM (IST)
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घरेलू विवाद . अपनों पर टूट रहा भरोसा, तो कोर्ट तक पहुंच रहे मामले

बात-बात में बिगड़ रहे रिश्ते गोपालगंज : भौतिकवादी युग समाज पर हावी है. हाइटेक होते समाज के लोग छोटी-छोटी बातों पर गौर नहीं कर रहे हैं. इससे बात-बात में रिश्ते बिखर रहे हैं. टीवी सीरियल और फिल्मों का असर ग्रामीण माहौल को प्रभावित कर रहा है. इससे सर्वाधिक घरेलू हिंसा बढ़ी है. प्रतिदिन 10 से […]

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बात-बात में बिगड़ रहे रिश्ते

गोपालगंज : भौतिकवादी युग समाज पर हावी है. हाइटेक होते समाज के लोग छोटी-छोटी बातों पर गौर नहीं कर रहे हैं. इससे बात-बात में रिश्ते बिखर रहे हैं. टीवी सीरियल और फिल्मों का असर ग्रामीण माहौल को प्रभावित कर रहा है. इससे सर्वाधिक घरेलू हिंसा बढ़ी है. प्रतिदिन 10 से 12 महिलाओं को प्रताड़ित कर घर से निकाल दिया जा रहा है.
यह बाद में दहेज उत्पीड़न या दहेज हत्या जैसी घटनाओं में तब्दील हो रहा है. इन घटनाओं से दोनों परिवारों को कोर्ट और पुलिस का चक्कर लगाना पड़ रहा है. स्थिति दिनोंदिन बिगड़ती जा रही है. प्रतिदिन दो-तीन मामले तलाक के लिए कोर्ट में दर्ज हो रहे हैं. बिखरते रिश्तों के कारण परिवार की तबाही, बच्चों की मानसिकता पर पड़नेवाले गंभीर असर का ख्यान नहीं किया जा रहा है. इससे सबसे खराब माहौल गोपालगंज में है. बिहार का घरेलू उत्पीड़न में पहला स्थान इस जिले का है. यहां सर्वाधिक दहेज उत्पीड़न के मुकदमा कोर्ट में दर्ज हो रहे हैं.
बाहरी बेटियों की यहां नहीं होती शादी : दहेज उत्पीड़न और हत्या की घटनाएं अखबारों की सुर्खियों में बनी रहती हैं. इसके कारण माहौल लोग दूसरे प्रदेश और जिलों की बेटियों की शादी गोपालगंज के युवकों से करना नहीं चाह रहे हैं.
पहले प्रतिवर्ष यूपी से 12-13 सौ लड़कियों की शादी गोपालगंज होती थी, तो 2500 से तीन हजार युवकों की शादी चंपारण, सारण, मुजफ्फरपुर, सीवान एवं अन्य जिलों में होती थी जो घटी है. अब पांच से सात सौ युवकों की शादियां ही अन्य जिलों में हो पा रही हैं. इसके पीछे घरेलू हिंसा और उत्पीड़न एक अहमद पहलू है.
केस एक – कुचायकोट थाना क्षेत्र के जलालपुर की रहनेवाली विमला की शादी 2001 में यूपी के सलेमगढ़ बाजार के एक प्रतिष्ठित घर में हुई थी. पति दिल्ली में एक कॉपोरेट कंपनी में काम करता था. शादी से पहले उसका संबंध दिल्ली की ही एक युवती से था. शादी के बाद जब विमला ससुराल पहुंची तो उसे पत्नी का दर्जा नहीं मिला.
उसे प्रताड़ितकिया जाने लगा. छह महीने में हत्या की साजिश रच दी गयी. किसी तरह भाग कर वह जलालपुर पहुंची. परिजनों ने समझौता का प्रयास किया. विफल होने पर मुकदमा किया. पता चला कि सास-ससुर को छह छह माह जेल रहने के बाद जमानत मिली.
केस दो – महम्मदपुर थाना क्षेत्र के हकाम गांव की रुखसार खातून की शादी मो हनीफ के साथ हुई थी. शादी के बाद पत्नी के फोन पर बात करने पर कंफ्यूजन पैदा हुआ और बात तलाक तक पहुंच गयी. मामला महिला हेल्पलाइन में आया. काफी मेहनत के बाद गलतफहमी दूर हुई और दोनों के रिश्तों को फिर से जोड़ा जा सका.
केस तीन – भोरे के राजेंद्र की शादी यूपी के फाजिलनगर में श्वेता के साथ 2003 में हुई थी. शादी के बाद उसे दो बच्चे हुए. राजेंद्र से उसका रिश्ता 2011 में तब टूट गया जब श्वेता को अपने पति पर शक होने लगा कि उसका संबंध किसी और से है. श्वेता आज तलाक का केस लड़ रही है. दोनों बच्चों की पढ़ाई पर गंभीर असर पड़ा है. बच्चे मां के साथ रहते हैं.
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