बंदों की इबादत पर बरस रही खुदा की रहमत
Updated at : 09 May 2019 6:43 AM (IST)
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गोपालगंज : माह-ए-रमजान में हर मुसलमान का सिर सजदे में झुकता है और हाथ दुआ को उठते हैं. रोजेदार इबादत करते हैं और अल्लाह अपने बंदों पर रहमत नाजिल फरमाता है. इस पवित्र माह का पहला अशरा ही रहमत का होता है. अल्लाह बंदों के गुनाहों को पस्त कर नेकियां खाते में जोड़ता है. मौलाना […]
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गोपालगंज : माह-ए-रमजान में हर मुसलमान का सिर सजदे में झुकता है और हाथ दुआ को उठते हैं. रोजेदार इबादत करते हैं और अल्लाह अपने बंदों पर रहमत नाजिल फरमाता है. इस पवित्र माह का पहला अशरा ही रहमत का होता है. अल्लाह बंदों के गुनाहों को पस्त कर नेकियां खाते में जोड़ता है.
मौलाना आजम अली बताते हैं कि रमजान के महीने को तीन अशरों में बांट गया है. पहला रहमत, दूसरा मगफिरत और तीसरे में अल्लाह अपने बंदों पर दौजक से निजात दिलाता है. उन्होंने बताया कि पहले अशरे में अल्लाह अपने बंदों पर रहमत नाजिल करता है. हर शख्स की दुआ कबूल करता है. उन्हें रोजे रखने में हिम्मत देता है.
रूह और दिल को पवित्र करता है रोजा : रमजान के महीने में हर मुसलमान अपने मन और शरीर को पवित्र रखता है. वह हर शख्स के साथ विनम्रता का व्यवहार करता है. कोशिश रहती है कि उससे कोई भी गलत कार्य न हो. रोजे में बुरी आदतों पर काबू करके अच्छे विचारों का आदान-प्रदान करते हैं.उलेमाओं के अनुसार जिस मस्जिद की आवाज या अपनी घड़ी के हिसाब से सहरी करते हैं, उसी वक्त के हिसाब से इफ्तारी करनी चाहिए, ताकि रोजे का वक्त पूरा हो सके.
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