पिता की मोक्षप्राप्ति के लिए बेटियों ने किया पिंडदान

Updated at :19 Sep 2016 6:42 AM
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पिता की मोक्षप्राप्ति के लिए बेटियों ने किया पिंडदान

गया : कहा जाता है कि बेटे से ज्यादा बेटियां मां-बाप को प्यारी होती हैं. बेटा तो किसी कारण से मां-बाप को छोड़ भी देता है, पर बेटी हर सुख-दुख की घड़ी में उनके साथ रहती है. इसी को चरितार्थ करती दिखीं मध्य प्रदेश के मुरैना जिला के बोंगरौशी गांव की रहने वाली शारदा देवी […]

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गया : कहा जाता है कि बेटे से ज्यादा बेटियां मां-बाप को प्यारी होती हैं. बेटा तो किसी कारण से मां-बाप को छोड़ भी देता है, पर बेटी हर सुख-दुख की घड़ी में उनके साथ रहती है. इसी को चरितार्थ करती दिखीं मध्य प्रदेश के मुरैना जिला के बोंगरौशी गांव की रहने वाली शारदा देवी व रेखा देवी. दोनों ने सात साल पहले म‍ृत अपने पिता तुसी राम को मोक्ष दिलाने के लिए प्रेतशिला के ब्रह्मसरोवर पर पिंडदान किया. दोनों के साथ आए देवेंद्र कुमार गुर्जर ने बताया कि तुसी राम को पांच बेटियां ही थीं. लोगों ने बताया कि बेटा नहीं रहने पर बेटी भी गयाजी जाकर श्राद्ध करे, तो पिता को मोक्ष मिल सकता है. इसके बाद शारदा व रेखा यहां पिंडदान करने आयी हैं. तीन दिन के पिंडदान का कार्यक्रम है.

10 वर्षीय अतुल ने किया पिंडदान : हिमाचल प्रदेश के विलासपुर से आये 10 वर्षीय अतुल कुमार ने अपने पिता की आत्मा की शांति के लिए प्रेतशिला में पिंडदान किया. उसके पिता राजेंद्र कुमार का निधन पांच साल पहले हो गया था़ अतुल अपने मां की बगल में बैठ कर विधि-विधान कर रहा था.

पंडित जी के बताये नियम को मां के सहयोग से करते समय अतुल को समझ भी नहीं आ रहा था कि वह क्या कर रहा है? साथ आये मामा अरुण कुमार ने बताया कि हिमाचल में एक आपराधिक हमले में अतुल के पिता की मौत हो गयी थी. घर में परेशानियां बढ़ने पर लोगों ने सलाह दी कि गया जाकर पिंडदान करो.

सामूहिक पिंडदान करते लोग.

पिंडदान कर पूर्वजों को किया याद

गया: दार्जिलिंग के खोड़ीबाड़ी से आए 60 तीर्थयात्रियों के एक जत्थे ने अपने-अपने पितरों का सामूहिक पिंडदान किया. इस बड़े जत्थे में शामिल महिला व पुरुषों ने प्रेतशिला के निकट बनाये गये पिंडदान स्थल की छत पर अपने पूर्वजों को याद कर उनकी आत्मा की शांति की कामना की. जत्थे में शामिल लोग तीन व चार पीढ़ियों के पूर्वजों का पिंडदान कर रहे थे. तीर्थयात्रियों का नेतृत्व कर रहे पारस सरकार ने बताया कि यह जत्था बृहस्पतिवार को आया है. विष्णुपद स्थित देवघाट पर पिंडदान करने के बाद दूसरे दिन प्रेतशिला स्थित पिंडदान स्थल पर पहुंच कर अपने पितरों का पिंडदान किया. इसके बाद यह जत्था बनारस, काशी और वृंदावन के लिए रवाना होगा.

छह दादाओं का एक साथ पिंडदान : ओड़िशा के हरिकिशन गुप्ता व उनके परिजन अपने खानदान के छह दादाओं का एक साथ पिंडदान करने के लिए गयाजी आये हैं. वे यहां पूरे 17 दिनों तक रुक कर पूरे विधि-विधान से पिंडदान करेंगे़ हरिकिशन ने बताया कि छह दादाओं के छह भाई व उनके परिजन पिंडदान करने में जुटे हैं.

बहुत पहले करना चाहिए था यह कार्य : हरियाणा के भिवानी जिले से आये रवि प्रकाश ने बताया कि परिवार के 24 सदस्यों के साथ सात दादाओं के नाम पर पिंडदान करने के लिए गयाजी आये हैं. इनमें परदादा भी शामिल हैं. यहां आने के बाद महसूस हो रहा है कि यह कार्य बहुत पहले ही कर देना चाहिए था.

पूर्वजों से जुड़े विधि-विधान व कर्मकांड की अनदेखी नहीं करनी चाहिए.

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