2015 में हादसों ने ली 289 की जान

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– चिकनी सड़कें व तेज रफ्तार हैं कारण – यातायत नियमों की अनदेखी भी पड़ रही भारी गया : जिले में सड़कें जितनी चिकनी होती जा रही हैं, वाहनों की रफ्तार भी बढ़ती जा रही है. जिस तेजी से वाहनों की रफ्तार बढ़ रही है उतनी ही तेजी से दुर्घटनाएं भी बढ़ी. पिछले वर्ष हुए […]

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– चिकनी सड़कें व तेज रफ्तार हैं कारण
– यातायत नियमों की अनदेखी भी पड़ रही भारी
गया : जिले में सड़कें जितनी चिकनी होती जा रही हैं, वाहनों की रफ्तार भी बढ़ती जा रही है. जिस तेजी से वाहनों की रफ्तार बढ़ रही है उतनी ही तेजी से दुर्घटनाएं भी बढ़ी. पिछले वर्ष हुए सड़क हादसों के आंकड़ों पर गौर करें, तो जिले में औसतन प्रतिमाह 40 से अधिक घटनाएं हुई.
इन हादसों में औसतन प्रतिमाह 24 से अधिक लोगों की जान चली गयी. पुलिस रेकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 2015 में 492 ऐसी घटनाएं हुईं. इन हादसों में 289 लोगों की मौत हुई. साथ ही 465 लोग घायल हुए. इसके अलावा भी हर माह दर्जनों ऐसी घटनाएं हुई, जिनकी शिकायत थाने में नहीं की जाती है. सड़क हादसे का शिकार हुए लोग एक-दूसरे में भी सुलह कर लेते हैं. अगर वैसे आंकड़ों को भी मिला लिया जाये, तो हादसों व उसमें घायलों की संख्या में डेढ़ गुनी बढ़ोतरी हो जायेगी.
ट्रैफिक नियमों की जानकारी नहीं: जिले के प्रमुख पथों व शहरी इलाके में कही भी ट्रैफिक नियमों से संबंधित बिंदुओं को लेकर पोस्टर व बैनर नहीं लगाये गये हैं. किसी सड़क पर भी जेब्रा क्रॉसिंग के निशान बनाये गये हैं. शहर में किस स्थान पर गति सीमा क्या होगी इसका भी उल्लेख नहीं किया गया है. कहां पर हॉर्न नहीं बजाना है. इससे संबंधित बोर्ड भी नहीं लगाया गया है.
हालात तो यह है कि पिछले वर्ष तत्कालीन एसएसपी पी कन्नन के समय में शहर व बोधगया में खोले गये ट्रैफिक थाने की ओर से ट्रैफिक नियमों से संबंधित बैनर व पोस्टर लगाने के लिए पहल नहीं किया गया है.
बिना ट्रेनिंग के कर रहे ड्यूटी : ट्रैफिक व्यवस्था में लगाये गये सिपाहियों को ट्रैफिक नियम-कानूनों की भी जानकारी नहीं दी गयी है. इसका नमूना देखना है, तो कोतवाली थाना चौराहा, गोल पत्थर व जयप्रकाश नारायण अस्पताल के उतर स्थित चौराहे पर पोस्टेड ट्रैफिक थाने के सिपाहियों के पास खड़े हो जाइये. समझ में नहीं आयेगा कि वहां ट्रैफिक थाने के सिपाहियों की तैनाती क्यों की गयी है.
कोतवाली थाना चौराहा व गोल पत्थर के पास पोस्टेड सिपाही खुद सड़क के आधे हिस्से पर लोहे का बैरियर लगा कर सड़क को जाम किये रहते हैं और सड़क के किनारे आराम से पूरे दिन खड़े रहते हैं.
जयप्रकाश नारायण अस्पताल से उत्तर स्थित चौराहे पर पोस्टेड सिपाही खुद वाहनों की चपेट में आने से पूरे दिन गाेलंबर की परिक्रमा काटते रहते हैं. ट्रैफिक नियमों की जानकारी नहीं होने के कारण वह खुद एक दिन किसी न किसी वाहन का शिकार हो जायेगा. उसकी ना समझी के कारण पूरे दिन वहां पर जाम की स्थिति बनी रहती है और सड़क हादसे होते रहते हैं.
मकर संक्रांति में स्नान बेला की प्रधानता
कर संक्रांति त्याेहार में पुण्यमय स्नान बेला की प्रधानता है. पुण्यदायक स्नान का काल मकर राशि पर सूर्य प्रवेश की बेला से प्रारंभ हाेकर 20 घड़ी तक अर्थात आठ घंटे तक रहता है.
14 जनवरी काे दिन अथवा रात में कमर पर सूर्य का संचार इस वर्ष नहीं हाे रहा है. अत: पुण्यकाल 14 जनवरी काे नहीं मिल रहा है. 15 जनवरी काे प्रात:काल 7.30 (साढ़े सात) बजे से पुण्यदायक स्नानकाल प्रारंभ हाेता है. इसी बेला से शिशिर ऋतु की शुरुआत हाेती है. वर्ष भर के छह ऋतुआें में यह एक है. संक्रांति स्नान गंगा नदी में फलप्रद है.
गंगा, यमुना व सरस्वती के संगम स्थल पर तीर्थराज प्रयाग में विशेष फलदायक है. गंगा व सागर के संगम स्थल पर गंगासागर तीर्थ में सर्वाधिक फलप्रद है. मकर संक्रांति महापर्व की कथा श्रीमद्भागवत महापुराण में भगवान कपिल मुनि व राजा सगर की संतान से जुड़ी है. राजा सगर द्वारा किये गये अश्वमेघ यज्ञ में घाेड़ा काे अबाध गति से आगे बढ़ने के लिए छाेड़ा गया. देवराज इंद्र ने गुप्त रूप से घाेड़े काे कपिल मुनि के आश्रम में बांध दिया.
घाेड़े का अन्वेषण करते हुए राजा सगर के साठ हजार पुत्र कपिल मुनि के आश्रम में पहुंचे. यह आश्रम सागर तट पर स्थित था. सगर पुत्राें ने भ्रमवश घाेड़ा चुरानेवाला समझ कर तपस्या में लीन कपिल मुनि का तिरस्कार किया. तपस्या से विरत मुनि की आंखें खुलीं. उनकी क्राेधदृष्टि से साठ हजार सगर पुत्र भस्म हाे गये. दयावश मुनि ने वरदान दिया कि गंगाजल के स्पर्श से भस्मीभूत सगर पुत्र स्वर्ग काे प्राप्त हाेंगे.
सगर के वंश में उत्पन्न राजा भगीरथ की तपस्या से गंगा का अवतरण हुआ. हिमालय पुत्राें से चल कर सागर तक आकर गंगा ने जल स्पर्श से सगर पुत्राें काे स्वर्ग दिलाया. यह घटना मकर संक्रांति काे हुई. कपिल मुनि का आश्रम भी जलमग्न हुआ. यह स्थल गंगासागर तीर्थ हुआ. यहां स्नान मेला हाेता है. यह स्नान स्वर्ग प्राप्त कराता है.
आचार्य लालभूषण मिश्र याज्ञिक
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