बोधगया: उच्च पोषक तत्वों व सभी तरह की न्यूट्रीशन से भरपूर मशरूम का सेवन शराब पीने के बाद नहीं करना चाहिए. यह जहर का काम करता है. कभी-कभार यह जानलेवा भी हो सकता है. उक्त बातें शुक्रवार को बोधगया के संबोधि रिट्रीट में आयोजित मशरूम सेमिनार सह महोत्सव के मौके पर कृषि उपनिदेशक विजय शर्मा ने कहीं.
इस मौके पर श्री शर्मा ने कहा कि मशरूम का उत्पादन फायदेमंद है. इसका उत्पादन आसानी से किया जा सकता है. उन्होंने सेमिनार में मौजूद मशरूम उत्पादकों को प्रेरित करते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षो से ही बिहार में मशरूम का उत्पादन शुरू हुआ है. यहां मशरूम उत्पादन की काफी संभावनाएं हैं. इसके लिए बड़ा बाजार भी है. उन्होंने कहा कि बिहार में उत्पादित मशरूम का प्रयोग विभिन्न शहरों में स्थित होटलों में क्यों नहीं किया जा सकता है? लेकिन, इसके लिए हमें ब्रांडिंग करनी होगी व उत्पादन को भी बढ़ाना होगा. उन्होंने मशरूम की गुणवत्ता की जांच के बारे में बताया. कहा, मशरूम को गरम पानी में थोड़ी देर रखने के बाद यदि पानी का रंग काला या भूरा पड़ जाता हो, तो वह खाने लायक नहीं है. उन्होंने मशरूम को डायबिटीज व कॉलेस्ट्रॉल से पीड़ित लोगों के लिए भी फायदेमंद है.
बिहार में शुरू होगी अनुसंधान परियोजना
कार्यशाला में राज्य किसान आयोग के प्रधान परामर्शी सह कृषि अनुसंधान संस्थान, पटना, के वैज्ञानिक डॉ अरविंद कुमार ने कहा कि राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय में डॉ बीके सिंह द्वारा वैज्ञानिक तरीके से मशरूम का उत्पादन किया गया था. इसके बाद नालंदा में सबसे पहले व बाद में गया व जहानाबाद में मशरूम का उत्पादन शुरू हुआ. मशरूम के फायदे गिनाते हुए उन्होंने कहा कि बिहार में भी मशरूम उत्पादन के लिए अनुसंधान परियोजना शुरू करने की तैयारी हो रही है. सेमिनार में जिला कृषि पदाधिकारी सुदामा महतो ने मशरूम उत्पादन के लिए मौजूद लोगों को प्रेरित किया व कृषि विभाग द्वारा सहयोग करने का भी भरोसा दिया. सेमिनार में नालंदा से 40, गया से 10 व जहानाबाद से पांच मशरूम उत्पादकों ने भाग लिया. इस दौरान मशरूम उत्पादकों को बेहतर उत्पादन व रख-रखाव की भी जानकारी दी गयी. मानपुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के डॉ सुरेंद्र चौरसिया, मशरूम उत्पादक सुचित कुमार आदि ने मशरूम उत्पादन व संरक्षण के तरीके बताये.