गंगा की अविरलता के लिए नालंदा की बेटी 36 दिनों से सत्याग्रह पर
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :20 Jan 2020 7:55 AM (IST)
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राम विलास, नालंदा : नालंदा की बेटी साध्वी पद्मावती गंगा की अविरलता और निर्मलता के लिए 36 दिनों से हरिद्वार में भूख हड़ताल पर बैठी हैं. भगीरथ की तरह प्रयास करने वाली साध्वी पद्मावती के अभियान को उनके गृह जिला नालंदा के अलावा बिहार और देश के विभिन्न क्षेत्रों से समर्थन मिलने लगा है. साध्वी […]
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राम विलास, नालंदा : नालंदा की बेटी साध्वी पद्मावती गंगा की अविरलता और निर्मलता के लिए 36 दिनों से हरिद्वार में भूख हड़ताल पर बैठी हैं. भगीरथ की तरह प्रयास करने वाली साध्वी पद्मावती के अभियान को उनके गृह जिला नालंदा के अलावा बिहार और देश के विभिन्न क्षेत्रों से समर्थन मिलने लगा है.
साध्वी पद्मावती नालंदा जिला अंतर्गत सरमेरा प्रखंड के बड़ी मलावां गांव निवासी केनार कला मिडिल स्कूल के हेडमास्टर संत कुमार और मनोरमा देवी की तीसरी संतान हैं. नालंदा महिला कॉलेज की रही हैं छात्रा
25 दिसंबर, 1996 को जन्मी साध्वी पद्मावती का घरेलू नाम सानिया कुमारी है. उनकी प्रारंभिक शिक्षा जिले के हाइस्कूल बिंद में हुई. वह प्रथम श्रेणी से 10वीं की परीक्षा 2014 में पास हुई. इंटरमीडिएट बिहारशरीफ के नालंदा महिला कॉलेज से किया. दर्शनशास्त्र में स्नातक ऑनर्स की डिग्री प्राप्त करने के बाद उन्होंने एमए की पढ़ाई के लिए नालंदा कॉलेज में नामांकन करवाया.
इसी दौरान उन्होंने संन्यास धारण कर किया. साध्वी पद्मावती दो भाई और पांच बहनों में तीसरी संतान हैं. पद्मावती की बड़ी बहन का नाम बबीता कुमारी, सविता कुमारी, छोटी बहन का नाम सोनाली कुमारी और सलोनी कुमारी है. उनके भाई का नाम भास्कर कुमार और जानकी नंदन है.
साध्वी माता ललिता से प्रेरित होकर पद्मावती बनी साध्वी
मई, 2018 में सानिया पटना के गौरीचक निवासी सोनू कुमार के साथ स्वामी शिवानंद के मातृ सदन आश्रम गयी थी. इसी दौरान कुंभ मेले में संन्यासिनी माता ललिता से उनकी मुलाकात हुई. यहीं से वह आध्यात्मिक दीक्षा प्राप्त करने के बाद सानिया साध्वी पद्मावती बन गयीं. तब से वह समाज और राष्ट्रहित के साथ गंगा की निर्मलता और अविरलता के लिए संघर्ष कर रही हैं.
पिता को लिखा अंतिम पत्र
साध्वी पद्मावती के पिता कहते हैं कि साध्वी बनने के बाद उनका एक लेटर आया था, उसमें उन्होंने लिखा था कि अब वह मेरे पिता नहीं हैं. वह मेरे पूर्व पिता हैं. माया-मोह के भटकाव से दूर रहने के लिए पद्मावती माता-पिता और निकट के रिश्तेदारों से भी मोबाइल अथवा किसी अन्य माध्यम से संपर्क स्थापित नहीं करती हैं.
पिता को गर्व है अपनी पुत्री पद्मावती पर
साध्वी पद्मावती के पिता संत कुमार बताते हैं कि वह बिंद के रामकृष्ण भावाश्रम में अपने गुरु स्वामी अरुण से मिलने सपरिवार जाते थे. यहीं उन्होंने अध्यात्म और ध्यान की शिक्षा ग्रहण की थी. स्वामी अरुण के गुरु हरिद्वार के स्वामी शिवानंद जी थे. वह बाद में सपरिवार स्वामी शिवानंद से सान्निध्य में आ गये. वहीं से सानिया का आध्यात्मिक रुझान शुरू हुआ.
बेटी के साध्वी बनने पर थोड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्हें पद्मावती पर गर्व है. गंगा की अविरलता और निर्मलता के लिए सत्याग्रह करने वाली पद्मावती देश की पहली बेटी है. वहीं, माता मनोरमा देवी सानिया के साध्वी बनने से खुश नहीं हैं. उन्होंने पद्मावती को हरिद्वार से वापस लाने के लिए कई बार प्रयास किया. हर बार उसे निराशा ही हाथ लगी.
पद्मावती से मिलने जायेंगे सीएम नीतीश कुमार
साध्वी पद्मावती के गंगा सत्याग्रह का समर्थन बिहार और देश के कोने-कोने से मिलने लगा है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी पद्मावती के गंगा सत्याग्रह का समर्थन किया है. नीतीश कुमार और जलपुरुष डॉ राजेंद्र सिंह दोनों एक साथ शीघ्र हरिद्वार उनसे मिलने जायेंगे. नालंदा सांसद कौशलेंद्र कुमार ने भी पद्मावती के मांगों का समर्थन किया है. वह शीघ्र साध्वी पद्मावती से मुलाकात करने हरिद्वार तो जायेंगे ही, साथ ही फरवरी के प्रथम सप्ताह में लोकसभा में सवाल भी उठायेंगे.
जल पुरुष राजेंद्र सिंह ने सीएम को दी जानकारी
जल संरक्षण के लिए विख्यात जल पुरुष राजेंद्र सिंह ने नालंदा की 23 वर्षीया बेटी साध्वी पद्मावती के सत्याग्रह की जानकारी रविवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को दी. राजकीय अतिथिशाला में स्थानीय पर्यावरणीय कार्यकर्ताओं के साथ हुई बैठक में उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने इस सत्याग्रह को पूरी तरह सहमति दी है. इस संबंध में वह जरूरी कदम उठायेंगे. बैठक में उन्होंने बताया कि 111 दिनों के आमरण अनशन के बाद गंगा की
अविरलता के लिए शहीद हो चुके प्रो जेडी अग्रवाल के बाद पद्मावती ही वह शख्स हैं, जो केंद्र सरकार को उनका वादा ध्यान दिलाना चाहती हैं, जो उन्होंने मई 2018 में किया था, जिसके तहत अलकनंदा और मंदाकिनी पर बनने वाले बांधों पर रोक लगानी थी. उन्होंने बताया कि संभवत: 30 जनवरी को पूरे बिहार से लोग दिल्ली रवाना होंगे. चार फरवरी को दिल्ली में जंतर-मंतर पर धरना देकर केंद्र को ज्ञापन सौंपा जायेगा.
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