... तो फिर ब्लड डोनेशन की क्या जरूरत ?
Updated at : 02 Jun 2019 2:43 AM (IST)
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गया : डोनर व डोनर्स कार्ड रहने के बाद भी मगध मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक से ब्लड नहीं मिलने की बात अखबार में प्रकाशित होने के बाद कर्मचारी अपने बचाव में आ गये हैं व सफाई देने में लगे हैं. अधिकारी सारी जवाबदेही कर्मचारियों पर टाल रहे हैं, तो टेक्निशियन कर्मचारी कम होने की […]
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गया : डोनर व डोनर्स कार्ड रहने के बाद भी मगध मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक से ब्लड नहीं मिलने की बात अखबार में प्रकाशित होने के बाद कर्मचारी अपने बचाव में आ गये हैं व सफाई देने में लगे हैं. अधिकारी सारी जवाबदेही कर्मचारियों पर टाल रहे हैं, तो टेक्निशियन कर्मचारी कम होने की बात कह रहे हैं.
मरीज व उसके परिजन को क्या परेशानी उठानी पड़ती है, इसकी चिंता नहीं है.अस्पताल प्रबंधन के रुख से तो ऐसा ही लगता है. मगध मेडिकल कॉलेज स्थित ब्लड बैंक के प्रभारी डॉ नसीम अहमद अब कह रहे हैं कि कर्मचारियों से गलती हुई है. किसी तरह मैनेज कर डोनर से ब्लड लेना चाहिए था. मरीज जरूरी होने पर ही अस्पताल पहुंचता है. इस मामले को लेकर कर्मचारियों को हिदायत दी गयी है.
क्यों लगाया जाता है मेडिकल कॉलेज का संसाधन व मैनपावर : डॉ अहमद या कोई भी दूसरा अधिकारी यह नहीं बता रहा कि जब ब्लड डोनेशन कैंपों में रक्तदान किये डोनर को उसके कार्ड के बदले ब्लड के लिए सशरीर उपस्थित होना ही होगा, तो आखिर वह कैंप में ब्लड डोनेट करेगा ही क्यों ? मेडिकल की टीम उससे ब्लड एक्सेप्ट ही क्यों करती है?
ऐसे कैंपों में ब्लड डोनेशन पर मेडिकल कॉलेज का संसाधन व मैनपावर लगाया ही क्यों जाता है? गया में ब्लड डोनेट कर चुके एक व्यक्ति को अपने ही कार्ड पर ब्लड दिलाने के लिए अगर गुवाहाटी या भोपाल से गया आना ही पड़े, तो वह सीधे आकर ही ब्लड क्यों नहीं दे देगा कि पहले से अपना अमूल्य रक्त देकर मेडिकल कॉलेज की पूंजी को समृद्ध करेगा?
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