सात जुलाई 2013 को बम ब्लास्ट के बाद 25 जुलाई को लाल पत्थर की तोड़ दी गयी थीं 58 दुकानें

बोधगया : सात जुलाई 2013 को बौद्धों की शीर्ष तीर्थ स्थली महाबोधि मंदिर व बोधगया के अन्य जगहों पर किये गये सीरियल ब्लास्ट के दोषियों को शुक्रवार को सजा सुनाये जाने के बाद बोधगया के वाशिंदों ने अदालत के फैसले का स्वागत किया है. लोगों ने कहा कि पांच साल बाद ही सही, पर शांति […]
बोधगया : सात जुलाई 2013 को बौद्धों की शीर्ष तीर्थ स्थली महाबोधि मंदिर व बोधगया के अन्य जगहों पर किये गये सीरियल ब्लास्ट के दोषियों को शुक्रवार को सजा सुनाये जाने के बाद बोधगया के वाशिंदों ने अदालत के फैसले का स्वागत किया है. लोगों ने कहा कि पांच साल बाद ही सही, पर शांति व अहिंसा का संदेश पूरी दुनिया में प्रसारित करने वाली जगह पर बम ब्लास्ट कर आतंक का माहौल कायम करने वाले गुनाहगारों को आजीवन कारावास की सजा उपयुक्त संदेश है.
इससे ऐसी हरकत करने वालों को सबक भी मिलेगा. लेकिन, लोगों ने इसके साथ अपनी पीड़ा भी उजागर करते हुए कहा कि महाबोधि मंदिर में पूजा-अर्चना करने वाले देश-विदेश के श्रद्धालुओं को पूजन सामग्री व अन्य जरूरत के सामान उपलब्ध कराने वाले निर्दोष दुकानदारों को बेवजह उजाड़ दिया गया. 58 दुकानों को एक झटके में जमींदोज कर दिया गया.
अब तक उनके लिए रोजी-रोटी का जुगाड़ भी नहीं किया गया. दुकानदारों व दुकानों में काम करने वाले कर्मचारियों के परिवार आर्थिक व मानसिक संकट से पिछले पांच वर्षों से जूझ रहे हैं. इसकी सुधी सरकार व प्रशासन के स्तर से नहीं ली जा रही है. लोगों ने कहा कि महाबोधि मंदिर के पास लाल पत्थर से हटाये गये दुकानदारों को न्याय कब मिलेगा इसका इंतजार किया जा रहा है.
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