सात जुलाई 2013 को बम ब्लास्ट के बाद 25 जुलाई को लाल पत्थर की तोड़ दी गयी थीं 58 दुकानें

Published at :02 Jun 2018 4:01 AM (IST)
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सात जुलाई 2013 को बम ब्लास्ट के बाद 25 जुलाई को लाल पत्थर की तोड़ दी गयी थीं 58 दुकानें

बोधगया : सात जुलाई 2013 को बौद्धों की शीर्ष तीर्थ स्थली महाबोधि मंदिर व बोधगया के अन्य जगहों पर किये गये सीरियल ब्लास्ट के दोषियों को शुक्रवार को सजा सुनाये जाने के बाद बोधगया के वाशिंदों ने अदालत के फैसले का स्वागत किया है. लोगों ने कहा कि पांच साल बाद ही सही, पर शांति […]

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बोधगया : सात जुलाई 2013 को बौद्धों की शीर्ष तीर्थ स्थली महाबोधि मंदिर व बोधगया के अन्य जगहों पर किये गये सीरियल ब्लास्ट के दोषियों को शुक्रवार को सजा सुनाये जाने के बाद बोधगया के वाशिंदों ने अदालत के फैसले का स्वागत किया है. लोगों ने कहा कि पांच साल बाद ही सही, पर शांति व अहिंसा का संदेश पूरी दुनिया में प्रसारित करने वाली जगह पर बम ब्लास्ट कर आतंक का माहौल कायम करने वाले गुनाहगारों को आजीवन कारावास की सजा उपयुक्त संदेश है.

इससे ऐसी हरकत करने वालों को सबक भी मिलेगा. लेकिन, लोगों ने इसके साथ अपनी पीड़ा भी उजागर करते हुए कहा कि महाबोधि मंदिर में पूजा-अर्चना करने वाले देश-विदेश के श्रद्धालुओं को पूजन सामग्री व अन्य जरूरत के सामान उपलब्ध कराने वाले निर्दोष दुकानदारों को बेवजह उजाड़ दिया गया. 58 दुकानों को एक झटके में जमींदोज कर दिया गया.

अब तक उनके लिए रोजी-रोटी का जुगाड़ भी नहीं किया गया. दुकानदारों व दुकानों में काम करने वाले कर्मचारियों के परिवार आर्थिक व मानसिक संकट से पिछले पांच वर्षों से जूझ रहे हैं. इसकी सुधी सरकार व प्रशासन के स्तर से नहीं ली जा रही है. लोगों ने कहा कि महाबोधि मंदिर के पास लाल पत्थर से हटाये गये दुकानदारों को न्याय कब मिलेगा इसका इंतजार किया जा रहा है.

सुरक्षा के लिए और बहुत कुछ करने की जरूरत
इस बारे में नागरिक विकास मंच, बोधगया के अध्यक्ष सुरेश सिंह ने बम ब्लास्ट करने वाले आतंकियों को मिली सजा का स्वागत करते हुए विस्थापित दुकानदारों को भी न्याय मिलने की मांग की है. विस्थापित दुकानदार हसीमूल हक ने कहा कि बोधगया में आतंक फैलाने वाले गुनाहगारों को मिली सजा के लिए अदालत का शुक्रिया अदा करते हैं, पर बेगुनाह दुकानदारों को विस्थापित कर पिछले पांच वर्षों से दर-दर भटकाने के लिए जिम्मेदार शासन की निंदा करते हुए न्याय की मांग करते हैं.
दुकानदार राकेश कुमार पप्पू ने कहा कि आतंकियों को तो सजा मिल गयी. लेकिन, लाल पत्थर से हटाये गये दुकानदारों को न्याय कब मिलेगा, इसका इंतजार पिछले पांच वर्षों से किया जा रहा है. दुकानदार अखिलेश कुमार सिंह उर्फ श्रीकांत ने कहा कि लाल पत्थर से विस्थापित दुकानदारों को नोड वन शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में दुकानें दिये जाने की बात हुई थी. कुछ दुकानदारों ने वहां दुकानें शुरू भी की, पर प्रशासन की उपेक्षा के कारण सुविधा के साथ-साथ किराया आदि में कोई रियायत नहीं मिली.
आतंकियों को मिली सजा के बारे में होटल एसोसिएशन बोधगया के महासचिव संजय कुमार सिंह ने कहा कि बोधगया की छवि खराब करने व शांति की भूमि में आतंक का माहौल पैदा करने वालों को मिली सजा का स्वागत है. उन्होंने कहा कि बोधगया में श्रद्धालुओं के लिए सुविधा के साथ-साथ सुरक्षा के पहलू पर अब भी और कुछ ज्यादा कदम उठाने की जरूरत है, ताकि बोधगया में बार-बार आतंकियों द्वारा बम प्लांट करने के मंसूबों को नाकाम किया जा सके.
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