दशकों से चल रहा भूमि विवाद, पहले भी जा चुकी है दो जान

Published at :11 May 2017 4:14 AM (IST)
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दशकों से चल रहा भूमि विवाद, पहले भी जा चुकी है दो जान

बहेड़ी : हावीडीह में विनोवा भावे के भूदान की जमीन में बने कब्रिस्तान व महादलितों के कब्जे में सभी कुल 35 कट्ठा जमीन पर मनरेगा से स्थल विकास एवं कब्रिस्तान के दो महीने पूर्व हुई घेराबंदी से गांव में विवाद गहरा गया. बताया जाता है कि पूर्व में भी इस भूमि विवाद में गांव में […]

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बहेड़ी : हावीडीह में विनोवा भावे के भूदान की जमीन में बने कब्रिस्तान व महादलितों के कब्जे में सभी कुल 35 कट्ठा जमीन पर मनरेगा से स्थल विकास एवं कब्रिस्तान के दो महीने पूर्व हुई घेराबंदी से गांव में विवाद गहरा गया. बताया जाता है कि पूर्व में भी इस भूमि विवाद में गांव में दो हत्या हो चुकी है. इसमें दोनों पक्षों से एक-एक जान गयी थी.

विनोवा भावे की जमीन पर पूर्व में गांव के कुछ लोगों का कब्जा था. इनसे गरीबों को कब्जा दिलाने के लिए गांव के ही प्रभु यादव के नेतृत्व में वर्षों मजदूरों एवं जमींदारों के बीच आंदोलन चला था. वर्तमान में कब्रिस्तान की घेराबंदी हो चुकी थी, जबकि कब्रिस्तान से पश्चिम शेष जमीन पर महादलितों का कब्जा था.

इसे लेकर करीब 15 वर्ष पूर्व दोनों समुदाय में एक समझौता भी हुआ था, लेकिन कुछ दिन बाद मुस्लिम समुदाय के लोगों ने पश्चिमी हिस्से में दो शव को दफना दिया. इसे लेकर महादलितों से विवाद के बाद पुनः निर्धारित कब्रिस्तान पर ही शव दफनाया जाने लगा. इसी बीच कब्रिस्तान की घेराबंदी के दौरान पश्चिमी हिस्से को भी घेरने की कोशिश की गयी, जिसमें विवाद के बाद उक्त जमीन पर रामकिशुन सदा के नाम एक बीघा, फूदी सदा के नाम 10 कट्ठा एवं गरीब पासवान के नाम 5 कट्टा जमीन का भूदान का पर्चा एवं रसीद कटने का खुलासा हुआ. इसके बाद से महादलित अपनी जमीन पर कब्रिस्तान बनाने का विरोध करने लगे, जबकि गांव में एक अन्य प्राचीन कब्रिस्तान है. विवाद में स्थानीय प्रशासन से हुई वार्ता में इस जमीन पर किसी प्रकार के कार्य पर रोक लगा दी गयी थी.
इसी बीच सात मई को अली हसन की मौत के बाद मुस्लिम समुदाय के लोगों ने कब्रिस्तान के बाहर पश्चिमी भाग में कब्र की खुदाई शुरू कर दी. इसका महादलित समुदाय के लोगों ने विरोध कर खोदे गये कब्र को ढक दिया. इसके बाद दोनों पक्षों में हुए विवाद के बाद कब्रिस्तान की घेरेबंदी के भीतर भी कब्र खोदने का विरोध करने पर मृतक के परिजन ने इसकी सूचना स्थानीय प्रशासन को दी. इसके बाद प्रशासन की मौजूदगी में देर शाम शव को दफनाने की तैयारी की गयी, लेकिन संध्या अजान के बाद समुदाय के लोगों ने धार्मिक रीति का हवाला देकर शव दफनाने से इनकार कर दिया. अगले दिन प्रशासन ने शव के साथ दोनों समुदाय के लोगो को उक्त स्थल पर बुलाया,
जहां महादलित समुदाय के कुछ लोगों ने 144 का हवाला देते हुए कब्रिस्तान का उपयोग करने पर विरोध जताया. एसडीपीओ की सख्ती दिखाने के बाद लोग आक्रोशित हो उठे. लोगों के आक्रोश के बाद डीएम, एसएसपी, एसडीओ सहित आसपास के थाने की पुलिस बल स्थल पर पहुंच गये, लेकिन प्रशासन ने बलपूर्वक कब्रिस्तान में शव को दफना कर मजिल में शामिल लोगों को सुरक्षित घर भेज दिया.
धारा 144 का हवाला देने के बाद भी प्रशासन ने शव दफनाया, तो फूटा ग्रामीणों का गुस्सा
डेढ़ दशक पूर्व हुआ था दोनों पक्षों में समझौता
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