सुविधाएं नहीं, मिला सर्फि थाने का दर्जा

Published at :15 Jan 2016 6:58 PM (IST)
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सुविधाएं नहीं, मिला सर्फि थाने का दर्जा

सुविधाएं नहीं, मिला सिर्फ थाने का दर्जा सामुदायिक भवन में चल रहा थाना, अब तक उपलब्ध नहीं कराये गये पदाधिकारी व फोर्स अलीनगर. सरकार ने 24 वर्ष पुराने दो सर्किलों के अलीनगर ओपी को तो थाना का दर्जा दे दिया है, किन्तु पुलिस बल एवं अधिकारियों के अभाव के साथ-साथ कोई भी सुविधा उक्त थाना […]

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सुविधाएं नहीं, मिला सिर्फ थाने का दर्जा सामुदायिक भवन में चल रहा थाना, अब तक उपलब्ध नहीं कराये गये पदाधिकारी व फोर्स अलीनगर. सरकार ने 24 वर्ष पुराने दो सर्किलों के अलीनगर ओपी को तो थाना का दर्जा दे दिया है, किन्तु पुलिस बल एवं अधिकारियों के अभाव के साथ-साथ कोई भी सुविधा उक्त थाना में नहीं बढ़ाया गया है. इस वजह से कार्यरत अधिकारियों को तो अधिक कठिनाइयों का सामना करना ही पड़ता है, आम लोगों को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है. संकीर्ण सामुदायिक भवन में संचालित ओपी की जगह अब थाना हो गया है. प्राथमिकी भी अब बहेड़ा थाना की जगह अलीनगर में में ही दर्ज होने लगी है. पिछले माह एक दिसंबर से यह शुरू हुआ है, पर कोई खास अंतर नहीं दिख रहा है. सामुदयिक भवन का हॉल पुलिस बल का आरामगाह है,जहां एक कोने में रखे टेबल पर वायरलेस सेट रख कर किया जा रहा है. संकीर्ण एक कमरे में थाना अध्यक्ष का कार्यालय संचालित होता है तो दूसरा कमरा थानाध्यक्ष का आरामगाह है. हाजत के रूप में भी इसी कमरे का उपयोग किया जाता है.मालखाना नहीं रहने से जब्त की गयी वस्तुएं असुरिक्षत परिसर में ही पड़ा रहता है. फिलहाल थाना में थानाध्यक्ष सुनील कुमार के अलावा जुलहरनैन खान एवं जगरनाथ कुमार एएसआई तथा तीन अदद सिपाही व एक चालक यहां कार्यरत हैं. कुल 20 चौकीदरों में से सेवानिवृति के बाद मात्र 14 चौकीदार तथा दो दफादार हैं. इनके जिम्मे प्रखंड की जनता के साथ साथ आधा दर्जन बैंक शाखाएं और दर्जन भर चौक चौराहे व छोटे आकार वाले पकड़ी बाजार व अलीनगर प्रखण्ड मुख्यालय है. जबकि इस थाना के लिए तीन एसआई, चार एएसआई व एक दर्जन पुलिस बल का प्रावधान किया गया था. अब देखना यह है कि यह सुविधा कब उपलब्ध होता है. सबसे मजे की बात तो यह है कि इस थाना से महज तीन किलोमीट की दूरी पर स्थित हरिसंहपुर गांव 12 किलोमीटर दूर स्थित घनश्यामपुर थाना के तहत पहले से ही है जो अब भी उसी थाना के साथ रह गया. जिसको लेकर वहां के ग्रामीणों में दु:ख तो है, लेकिन अलीनगर थाना के साथ उसे जोड़ने के लिए किसी ने कोई पहल तक नहीं की है.

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