निजी स्कूल संचालक की हत्या

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दरभंगा : शहर के एक निजी स्कूल संचालक आलोक कुमार पंकज (25) की रविवार की रात हत्या कर दी गयी. उनका शव सोमवार को रेल पटरी के किनारे से बरामद किया गया. बहेड़ी नवादा निवासी आलोक के पिता शिवशंकर मंडल ने आलोक के मित्रों पर हत्या की आशंका जाहिर की है. पुलिस ने शव को […]

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दरभंगा : शहर के एक निजी स्कूल संचालक आलोक कुमार पंकज (25) की रविवार की रात हत्या कर दी गयी. उनका शव सोमवार को रेल पटरी के किनारे से बरामद किया गया. बहेड़ी नवादा निवासी आलोक के पिता शिवशंकर मंडल ने आलोक के मित्रों पर हत्या की आशंका जाहिर की है.
पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर छानबीन शुरू कर दी है.जानकारी के अनुसार, प्राथमिक विद्यालय बहादुरपुर के प्रधानाध्यापक शिवशंकर मंडल के पुत्र आलोक न्यू होराइजन इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल के संचालक थे. वह रविवार को खाजासराय स्थित आवास से अपने मित्र रोहित कुमार के साथ घर से निकले, लेकिन वापस नहीं लौटे. इसी बीच, सोमवार की सुबह 22 नंबर रेल फाटक से दक्षिण रेल पटरी के किनारे लोगों ने एक शव देखा. इसकी शिनाख्त आलोक के रूप में हुई.
सूचना पर पहुंची लहेरियासराय पुलिस ने शव को कब्जे में ले लिया. आलोक का सिर बीच से फटा था. आशंका है कि लोहे के रॉड से उनके सिर पर प्रहार किया गया है. हत्या की वजह का पता नहीं लग सका है. पंकज के पिता ने कमतौल थाना क्षेत्र के केतुका बरियौल निवासी रोहित कुमार सहित पांच-छह मित्रों पर आशंका जाहिर की है.
बताया जाता है कि आलोक के पिता ने दो शादियां की हैं. मामले की जांच कर रहे लहेरियासराय थानाध्यक्ष जेपी सिंह का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है. वहीं सिटी एसपी हिमांशु शंकर त्रिवेदी ने बताया कि सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है. शीघ्र ही मामले का उद्भेदन कर लिया जायेगा.
दोस्तों के साथ निकले थे घर से
बताया जाता है कि गत रविवार अपराह्न् करीब तीन बजे आलोक रोहित के साथ रात में लौटने की बात कह कर घर से निकला था. बताते हैं कि वह चार-पांच दोस्तों के साथ मिर्जापुर स्थित पूनम सिनेमा हॉल पहुंचा. उसके एक मित्र का कहना है कि उसने दोस्तों के साथ फिल्म देखी. इसके बाद सभी अपने-अपने घर चले गये. आलोक के साथ इसके बाद क्या हुआ उन सभी को नहीं पता.
आठ वर्ष पूर्व खुला था स्कूल
मुकेश का विद्यालय पिछले आठ वर्षो से चल रहा है. पहले आलोक के पिता इसे चलाते थे. खुद सरकारी शिक्षक होने के कारण उन्हें काफी परेशानी हो रही थी. इस बीच आलोक अपनी पढ़ायी पूरी कर स्कूल का कामकाज देखने लगा. पिछले तीन-चार साल से आलोक ही स्कूल का सारा काम-काज देख रहा था.
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