पीएचसी केंद्र बना कुत्तों का बसेरा, रोगी नदारद

Updated at : 19 Mar 2015 2:25 AM (IST)
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पीएचसी केंद्र बना कुत्तों का बसेरा, रोगी नदारद

पहाड़पुर : प्रखंड क्षेत्र के बलुआ पंचायत स्थित उपस्वास्थ्य केंद्र कुत्तों का बसेरा बना हुआ है़ इसका निर्माण जिला परिषद के कोष से 2004-05 में किया गया था़ भवन निर्माण के लिए रामेश्वर सिंह ने जमीन दान किया था़ आज दस साल के बाद भी स्वास्थ्य केंद्र में न तो खिड़की है और न ही […]

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पहाड़पुर : प्रखंड क्षेत्र के बलुआ पंचायत स्थित उपस्वास्थ्य केंद्र कुत्तों का बसेरा बना हुआ है़ इसका निर्माण जिला परिषद के कोष से 2004-05 में किया गया था़ भवन निर्माण के लिए रामेश्वर सिंह ने जमीन दान किया था़ आज दस साल के बाद भी स्वास्थ्य केंद्र में न तो खिड़की है और न ही दरवाजा़ वहां पहुंचते ही कुत्ते मटरगश्ती करते नजर आते हैं, जबकि केंद्र पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से एएनएम मंजू देवी की नियुक्ति भी कर दी गयी है़ भवन की लागत उस समय 1,75,000 रुपया थी.
पिछड़ी पंचायत है बलुआ
प्रखंड के पंचायतों में पिछड़ा हुआ पंचायत है बलुआ़ आज भी यहां बुनियादी सुविधाओं का अभाव है़ पंचायत से प्रतिदिन पांच से दस मरीज प्रखंड मुख्यायल या जिला मुख्यालय के अस्पतालों में जाने को मजबूर होते हैं. बताते चले कि यहां से प्रखंड मुख्यालय की दूरी 15 किलोमीटर व जिला मुख्यालय की दूरी 30 किलोमीटर है़
केंद्र पर नहीं है उपस्कर
उपस्वास्थ्य केंद्र पर कोई भी उपस्कर मौजूद नहीं है़, जबकि प्रतिवर्ष इसके लिए राशि उपलब्ध करायी जाती है़ जिला स्वच्छता समिति द्वारा भी केंद्र के रख-रखाव व साफ -सफ ाई के लिए राशि अलग से उपलबध करायी जाती है़ खाली पड़ी जमीन पर भी लोग गोबर जमा करते है़ं चापाकल तो लगा है परंतु उसका हैंडल नहीं है़ प्राथमिक उपचार के साधन की बात करना भी बेमानी है़
तो वापस ले लेंगे जमीन
उपस्वास्थ्य केंद्र के लिए जमीन देनेवाले रामेश्वर सिंह ने बताया कि मैंने अपनी जमीन इलाके के स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के निदान के लिए दिया था, लेकिन केंद्र का संचालन सही ढंग से नहीं हो रहा है़ उन्होंने बताया कि अभी तक इस जमीन की रजिस्ट्री भी नहीं हो सकी है़ अगर विभाग इसका निदान नहीं करता है तो मैं जमीन को अपने कब्जे में ले लूंगा़
कहते हैं अधिकारी
पहाड़पुर प्रखंड चिकित्सा प्रभारी डॉ रंजीत राम ने बताया कि विभाग के पास भवन में काम करने के लिए कोई कोष मौजूद नहीं है़ प्रतिवर्ष पांच से छह हजार रुपया ही विकास के लिए आता है, जो काफ ी कम है़ वहीं स्वास्थ्य प्रबंधक संजय कुमार शर्मा ने बताया कि जिला परिषद के साथ जब भी बैठक होती है, तो इसके निर्माण का मुद्दा उठाया जाता है. परंतु जिला परिषद की तरफ से कोई संतोषप्रद जवाब नहीं दिया गया़ वहीं केंद्र पर पदस्थापित एएनएम मंजू देवी ने बताया कि जो भी राशि मिलती है. उसका दरी, जाजिम, मग आदि खरीद लिया जाता है़
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