डुमरांव में छठिया पोखरा में 25 प्रतिमाओं का विसर्जन, कृत्रिम तालाब क्यों नहीं बना? जल की जांच की मांग

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छठिया पोखरा में प्रतिमा विसर्जन के बाद फैला गंदगी | Prabhat Khabar Network

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डुमरांव में दुर्गा पूजा प्रतिमा विसर्जन को लेकर विवाद. कृत्रिम तालाब न बनने और छठिया पोखरा में विसर्जन से जल प्रदूषण का खतरा. नियमों के पालन और निष्पक्ष जांच की मांग उठी है.

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डुमरांव में दुर्गा पूजा की प्रतिमाओं के विसर्जन को लेकर नगर परिषद की व्यवस्था सवालों के घेरे में है. बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण परिषद के निर्देशों के बावजूद वर्ष 2026 में कृत्रिम तालाब नहीं बनाए जाने और करीब 25 पूजा पंडालों की प्रतिमाओं का छठिया पोखरा में विसर्जन कराए जाने के मामले में निष्पक्ष जांच की मांग उठी है. इस मामले में पर्यावरण संरक्षण के नियमों के पालन और प्राकृतिक जलस्रोतों की स्वच्छता को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं.

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डीएम को आवेदन देकर जांच की मांग

सामाजिक मंच के संयोजक और सुहैलदेव भारतीय समाज पार्टी के पूर्व प्रत्याशी प्रदीप कुमार शरण ने जिला पदाधिकारी, बक्सर को आवेदन देकर पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है. आवेदन की प्रतिलिपि बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण परिषद, पटना और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, दिल्ली को भी भेजी गई है. उन्होंने संबंधित अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का आग्रह किया है.

वर्ष 2024 में बनी थी व्यवस्था, फिर क्यों नहीं बना कृत्रिम तालाब?

प्रदीप शरण के अनुसार, बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण परिषद ने 29 अगस्त 2025 के आदेश में दुर्गा पूजा की प्रतिमाओं का विसर्जन निर्धारित कृत्रिम तालाबों में कराने और नदियों, पोखरों सहित अन्य प्राकृतिक जलस्रोतों में विसर्जन पर रोक लगाने का निर्देश दिया था. इसके बावजूद डुमरांव में वर्ष 2026 में कृत्रिम तालाब की व्यवस्था नहीं किए जाने पर सवाल उठ रहे हैं.

उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में नगर परिषद की ओर से कृत्रिम तालाब बनवाया गया था. उस दौरान अनुमंडल पदाधिकारी की ओर से दंडाधिकारी की प्रतिनियुक्ति भी की गई थी. ऐसे में पहले व्यवस्था उपलब्ध कराने के बाद इस वर्ष कृत्रिम तालाब क्यों नहीं बनाया गया, इसकी जांच कराई जानी चाहिए.

विसर्जन के बाद पोखरा में गंदगी, जल की गुणवत्ता की जांच की मांग

प्रदीप शरण ने प्रतिमा विसर्जन के बाद छठिया पोखरा में पूजा सामग्री और अन्य अवशेषों के बिखरे होने की तस्वीरों और समाचारों का हवाला देते हुए जल की वैज्ञानिक जांच कराने की मांग की है. उन्होंने पोखरा की समुचित सफाई सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया. उनका कहना है कि धार्मिक आयोजनों के बाद प्राकृतिक जलस्रोतों की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए.

नियमों के उल्लंघन की पुष्टि पर तय हो जवाबदेही

प्रदीप शरण ने पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986, जल प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम, 1974 और प्रतिमा विसर्जन से संबंधित लागू नियमों व निर्देशों के आलोक में मामले की जांच कराने की मांग की है. उन्होंने कहा कि यदि किसी आदेश या कानूनी प्रावधान के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार पदाधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए.

छठिया पोखरा में प्रतिमा विसर्जन के बाद फैला गंदगी   | Prabhat Khabar Network
छठिया पोखरा में प्रतिमा विसर्जन के बाद फैला गंदगी | Prabhat Khabar Network

डीएम से की गईं पांच प्रमुख मांगें

प्रदीप शरण ने जिला प्रशासन से पांच प्रमुख मांगें रखी हैं. इनमें कृत्रिम तालाब नहीं बनाने के कारणों की निष्पक्ष जांच, छठिया पोखरा में प्रतिमा विसर्जन से जुड़े प्रशासनिक निर्णयों और अभिलेखों की समीक्षा, पोखरा के जल की वैज्ञानिक जांच व सफाई, वर्ष 2024 और 2026 की व्यवस्थाओं की तुलना कर जिम्मेदारी तय करना तथा भविष्य में पर्यावरणीय निर्देशों के अनुरूप कृत्रिम तालाबों की व्यवस्था सुनिश्चित करना शामिल है.

धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण पर जोर

प्रदीप शरण ने स्पष्ट किया कि उनकी मांग किसी धार्मिक आयोजन के विरोध में नहीं है. इसका उद्देश्य धार्मिक आस्था का सम्मान करते हुए पर्यावरण संरक्षण और सरकारी निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराना है. उन्होंने प्रशासन से भविष्य में प्रतिमा विसर्जन के लिए उचित व्यवस्था करने और प्राकृतिक जलस्रोतों को प्रदूषण से बचाने की दिशा में ठोस कदम उठाने की मांग की है.

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