एनओसी व डीपीआर के पेच में फंसी नमामि गंगे योजना

Published at :13 Nov 2016 1:03 AM (IST)
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एनओसी व डीपीआर के पेच में फंसी नमामि गंगे योजना

आरोप-प्रत्यारोप. सात जुलाई को केंद्रीय राज्य मंत्री ने किया था प्रोजेक्ट का शिलान्यास 78 करोड़ की राशि से नगर के छह गंगा घाटों का होना है कायाकल्प बक्सर का रामरेखा घाट. बक्सर : गंगा को निर्मल, स्वच्छ एवं गंगा के धारा को अविरल बनाने के लिए केंद्र सरकार ने नमामी गंगे नामक महत्वाकांक्षी योजना की […]

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आरोप-प्रत्यारोप. सात जुलाई को केंद्रीय राज्य मंत्री ने किया था प्रोजेक्ट का शिलान्यास

78 करोड़ की राशि से नगर के छह गंगा घाटों का होना है कायाकल्प
बक्सर का रामरेखा घाट.
बक्सर : गंगा को निर्मल, स्वच्छ एवं गंगा के धारा को अविरल बनाने के लिए केंद्र सरकार ने नमामी गंगे नामक महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत की है़ जिसके तहत गंगा घाटों का सौंदर्यीकरण एवं गंगा में प्रवाहित होनेवाले नालों के पानी को साफ करने के प्रोजेक्ट लगाने की कार्ययोजना है़ इस योजना की आधारशिला सात जुलाई, 16 को रामरेखाघाट पर पेयजल व स्वच्छता राज्य केंद्रीय मंत्री रामकृपाल यादव के नेतृत्व में रखा गया़ कार्ययोजना की एनओसी डीपीआर के पेच में फंस गया है,
जिसके कारण कार्य योजना को नगर पर्षद द्वारा एनओसी नहीं दिया गया है़ इससे 78 करोड़ की लागत से नगर में बननेवाले महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया है़ योजना के शुरू नहीं होने से बक्सर के सौंदर्यीकरण एवं पर्यटन के बढ़ावा पर ग्रहण लग गया है़ इससे बक्सर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सरकार की धार्मिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक दृष्टिकोण से विश्व मानचित्र पर उभारने की संकल्पना भी धूमिल पड़ने लगी है़ 28 करोड़ की राशि की स्वीकृति प्रथम फेज के लिए मिलने के बाद भी उद्घाटन के चार माह बाद एनओसी के कारण काम शुरू नहीं हो सका है़
गंगा के कई घाटों का होना है निर्माण व सौंदर्यीकरण: विश्वामित्र की तपोभूमि, राम की शिक्षा स्थली को अंतरराष्ट्रीय पटल नर उभारने एवं गंगा की धारा को अविरल तथा निर्मल बनाने के लिए केंद्र सरकार ने 78 करोड़ की लागत से बननेवाली एक बड़ी परियोजना नमामि गंगे पर कार्य की शुरुआत की है़ प्रोजेक्ट का उद्घाटन भी काफी समय पहले हो चुका है़ जिसके तहत नगर के छह गंगा घाटों के सौंदर्यीकरण की योजना पर काम करना है़ योजना के तहत घाट को एक विशेष मानक के अनुरूप बनाया जाना है़ इसके लिए न केवल कार्य एजेंसी का चयन हुआ है, बल्कि प्रथम फेज के लिए 28 करोड़ की राशि का टेंडर भी हो गया है़
एनओसी के पेच में फंसी है योजना
नगर के गंगा घाटों को चकाचक बनाने के लिए 78 करोड़ रुपये से काम होना है, जिसका विधिवत शिलान्यास पेयजल एवं स्वच्छता केंद्रीय राज्य मंत्री रामकृपाल यादव ने सात जुलाई, 16 को समारोहपूर्वक किया था़ प्रथम फेज में होनेवाले कार्य के लिए 28 करोड़ का टेंडर होने के बाद भी एनओसी के लिए कार्य रुका हुआ है. एनओसी का मामला काम करानेवाली एजेंसी एनबीसीसी एवं नगर पर्षद के बीच फंसा हुआ है, जिसके कारण अब तक एनओसी एजेंसी को नहीं मिल पाया है़
इन घाटों पर होना है ये काम : प्रथम फेज के तहत श्मशान घाट, रानी घाट, रामरेखा घाट, गोला घाट, जहाज घाट, सती घाट पर नाली निर्माण, शौचालय निर्माण, लाइटिंग की व्यवस्था, सिवर टीटमेंट प्लांट, पुराने घाटों का निर्माण तथा सौंदर्यीकरण, नये घाटों का निर्माण, आधुनिक शवदाह गृह का निर्माण होना है़
जिले में है 78 करोड़ की योजना
जिले के छह गंगा घाटों का निर्माण व सौंदर्यीकरण 87 करोड़ की लागत राशि से कराया जाना है़ प्रथम फेज में 28 करोड़ का टेंडर भी हो चुका है़ कार्य की जिम्मेदारी एनबीसीसी इंडिया लिमिटेड को दी गयी है, जिसने अपने कार्य की शुरुआत तक नहीं की है़
एनओसी को लेकर नप कर रही राजनीति
पूरे बिहार में कई स्थानों पर काम शुरू हो चुका है, लेकिन बक्सर में अब तक योजना को एनओसी नहीं दी गयी है. नप को डीपीआर दिखाया गया है. लेकिन, स्थानीय राजनीति के चक्कर में योजना को एनओसी नहीं दी जा रही है. यदि एनओसी मिल जाये, तब योजना को तत्काल शुरू कर दिया जायेगा.
देवेंद्र सिंह, एनबीसीसी, जोनल हेड
सरकार के अदूरदर्शी सोच के कारण काम बंद है
बक्सर नगरी भगवान श्री राम की शिक्षा एवं विश्वामित्र की तपो नगरी रही है़ इस पावन धरती पर जो भी कदम रखता है, वह अजर अमर हो जाता है़ ऐसे पवित्र धरती को विश्व के मानचित्र पर लाने के लिए इस महत्वाकांक्षी योजना को केंद्र सरकार ने दिया है, किंतु ऐसे महत्वपूर्ण योजना को शिलान्यास के चार माह बाद भी सरकार व जिला प्रशासन की अदूरदर्शी सोच के कारण एनओसी नहीं मिल सका है़
अश्विनी चौबे , बक्सर सांसद
कंपनी डीपीआर नहीं दे रही है
नमामि गंगे के तहत कार्य करानेवाली एजेंसी से कार्य प्रजोक्ट के डीपीआर की मांग लगातार की जा रही है़ वह डीपीआर उपलब्ध नहीं करा पा रही है़
अनिल कुमार , कार्यपालक पदाधिकारी, नप
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