व्यवसायी राजेंद्र हत्याकांड में दोषी पाया गया शेरू

Published at :13 May 2016 4:15 AM (IST)
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व्यवसायी राजेंद्र हत्याकांड में दोषी पाया गया शेरू

16 मई को सजा. रंगदारी के लिए की गयी थी हत्या फोन से मांगी गयी थी 22 व्यवसायियों से रंगदारी जिला जज ने सुनाया फैसला वर्ष 2011 का है मामला बक्सर, कोर्ट : 21 अगस्त 2011 को सुबह नौ बजे जूता व कपड़ा व्यवसायी राजेंद्र केशरी की हुई हत्या में नामजद अभियुक्त ओंकारनाथ सिंह उर्फ […]

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16 मई को सजा. रंगदारी के लिए की गयी थी हत्या

फोन से मांगी गयी थी 22 व्यवसायियों से रंगदारी
जिला जज ने सुनाया फैसला वर्ष 2011 का है मामला
बक्सर, कोर्ट : 21 अगस्त 2011 को सुबह नौ बजे जूता व कपड़ा व्यवसायी राजेंद्र केशरी की हुई हत्या में नामजद अभियुक्त ओंकारनाथ सिंह उर्फ शेरू सिंह को दोषी पाया गया है. गुरुवार को खचाखच भरे अदालत में शेरू की पेशी जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रदीप कुमार मल्लिक के कोर्ट में की गयी, जहां उन्होंने फैसला सुनाते हुए अभियुक्त को दोषी पाया है. सजा के बिंदु पर फैसला 16 मई को सुनायी जायेगी.
रंगदारी के लिए हुई थी हत्या : मामले की सुनवाई में अभियोजन पक्ष ने कुल 13 लोगों की गवाही हुई थी. हत्या की पूर्व संध्या पर अभियुक्त और उसके साथियों ने कुल 22 लोगों को लगातार फोन कर रंगदारी की मांग की थी, जिसमें नगर के जूता, कपड़ा व्यवसायी प्रदीप कुमार झा भी शामिल थे. इसी दौरान उसने मोबाइल संख्या 7654801458 से राजेंद्र केशरी के भतीजा राकेश केशरी के मोबाइल संख्या 9334206824 पर फोन कर कहा था कि हमको रंगदारी दो नहीं,
तो कल दुकान का शटर मत उठाना. इसके साथ ही नगर के महत्वपूर्ण कुल 22 व्यवसायियों को लगातार फोन किया गया था तथा उनसे रंगदारी की मांग की गयी थी.
कोलकाता से गिरफ्तार हुआ था अभियुक्त : शेरू-चंदन गिरोह ने पूरे जिले में आतंक फैला कर रख दिया था. एक के बाद एक हुए कई ताबड़तोड़ हत्याओं में उनका नाम शामिल था. इसके बाद अभियुक्तों ने चूना व्यवसायी को अपना टारगेट बनाया. भन्नाई पुलिस केशरी हत्याकांड के बाद लगातार ऑपरेशन चलाती रही. छापेमारी करना शुरू कर दिया, जिससे बचने के लिए अभियुक्त कोलकाता में फरार होकर रहने लगा. पुलिस निरीक्षक उदय चंद्र झा एवं अवधेश कुमार के साथ बंगाल पुलिस की संयुक्त टीम बना कर अभियुक्त शेरू एवं चंदन को कोलकाता में गिरफ्तार कर लिया गया.
टीआइ परेड में अभियुक्तों की हुई थी पहचान : अभियुक्तों की गिरफ्तारी के बाद न्यायिक दंडाधिकारी देवेंद्र कुमार की निगरानी में शेरू एवं चंदन की पहचान की गयी. वहीं, 164 का बयान प्रथम श्रेणी के न्यायिक दंडाधिकारी राजेश प्रसाद ने कलमबद्ध किया था. टीआइ परेड में अभियुक्त चंदन मिश्रा, शेरू सिंह एवं रोशन पांडेय को गोपाल केशरी एवं गोविंद केशरी ने पहचान लिया था.
तीन अभियुक्त पहले से ही काट रहे आजीवन कारावास की सजा : केशरी हत्याकांड में संलिप्त अभियुक्त चंदन मिश्रा, रोशन पांडेय एवं दीनबंधु सिंह पूर्व से ही आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं, लेकिन 17 दिसंबर 2012 को शेरू कोर्ट हवलदार को गोली मार कर फरार हो गया था, जिसके कारण उसे कानूनी प्रक्रिया को पूरी कर अब दोषी पाया गया है.
अभियोजन पक्ष ने किया टीम वर्क : मामले की सुनवाई पूरी पारदर्शिता के साथ हो. साथ ही कोई भी न्यायिक पहलू अछूता न रहे इसके लिए लोक अभियोजक नंद गोपाल प्रसाद ने आनंद मोहन उपाध्याय एवं अशोक शर्मा के साथ टीम गठित किया था. अभियोजन पक्ष ने पूरे मामले में पैनी नजर बनाये रखा तथा अभियुक्तों को दोषी साबित किया. इस संबंध में लोक अभियोजक नंद गोपाल प्रसाद ने बताया कि पूर्व में बलात्कार के एक मामले में अभियोजन पक्ष की टीम बनायी गयी थी.
गिरफ्तारी के लिए शहर में लगाये गये थे पोस्टर
जिले के लिए आतंक बन चुके चंदन मिश्रा एवं शेरू सिंह की तसवीर को पुलिस ने वांटेड करार करते हुए जिले के सभी थाना के अलावा महत्वपूर्ण जगहों पर चिपकाया था. सूचना देनेवालों के लिए इनाम की घोषणा भी की गयी थी. बक्सर कोर्ट से फरार होने के बाद शेरू का आतंक नहीं रुका तथा उसने आरा में जाकर एक कोचिंग संचालक की गोली मार कर हत्या कर दी. बाद में पुलिस ने जबर्दस्त ऑपरेशन चला कर उसे भी गिरफ्तार कर लिया. सुरक्षा को लेकर अभियुक्तों को कई बार भागलपुर जेल भी भेजा गया था.
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