अब ताड़ बागान भी हुए वीरान
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :06 Apr 2016 3:53 AM (IST)
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डुमरांव़ : राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू होने के बाद सरकार ने ताड़ी पर भी पहरा लगा दिया है़ सरकार की इस घोषणा से चहुंओर खुशी व्याप्त है़ अब अनुमंडल के किसी भी बागान में लबनी से ताड़ी खुलेआम नहीं छलकेगी़ लोगों में शराब के खिलाफ जागरूकता के बाद आत्म विश्वास व संकल्प से छुटकारा […]
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डुमरांव़ : राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू होने के बाद सरकार ने ताड़ी पर भी पहरा लगा दिया है़ सरकार की इस घोषणा से चहुंओर खुशी व्याप्त है़ अब अनुमंडल के किसी भी बागान में लबनी से ताड़ी खुलेआम नहीं छलकेगी़ लोगों में शराब के खिलाफ जागरूकता के बाद आत्म विश्वास व संकल्प से छुटकारा मिला़ अब ताड़ी तार से उतरेगी जरूर, पर उसकी बिक्री नहीं होगी़ साथ ही आमजनों के सहयोग से नशेड़ियों को सेहतमंद भी बनाया जायेगा़
बिंदास जीने की मिली राह : शराब व ताड़ी के नशे में जीनेवाले नशेड़ियों को आज बिंदास से जीने की राह आसान हो गयी है़ नशे के कारण कई परिवारों को बरबादी के हाशिये पर जाना पड़ा है, लेकिन इसका लत छुड़ाना काफी मेहनत भरा काम था, लेकिन लोगों के बीच जागरूकता व बच्चे बुजुर्ग व महिलाओं का संकल्प की मुहिम रास आयी़
पाबंदी से बागानों में छायी मायूसी : अनुमंडल के केसठ, चौगाईं, ब्रह्मपुर, नावानगर, सिमरी, दियरा के अलावे शहर के काली आश्रम डुमरेजनी मंदिर सहित आस पास के सुदूर बागानों में ताड़ी के शौकिनों से काफी चहल-पहल बनी रहती थी, पर सरकार के सख्ती के बाद इन बागानों में मायूसी छा गयी़ अब ताड़ी से होनेवाले लाभ से भी बागान मालिक वंचित रहेंगे.
सरकारी सख्ती बनेगी कारगर : समाजसेवी धनंजय कुमार आर्य, पवन कुमार व बचपन बचाओं आंदोलन के नेता प्रदीप शरण बताते हैं कि सरकार के इस साहसिक कदम से सूबे में विकास की गति तेज होगी. साथ ही घर परिवार को उजड़ने से बचाया जा सकता है. वहीं, प्रभाकर तिवारी, मो़ कदम रसूल का कहना है कि कानून लागू होने से आमजनों में खुशी है़ सरकार के इस निर्णय को लोगों ने प्रशंसनीय बताया है़
कानून का है प्रावधान : राज्य सरकार ने सदन में 1991 की धारा के प्रावधान लगाते हुए ताड़ी बंदी की पहल की है़ इस प्रावधान के अनुसार सजा के साथ-साथ आर्थिक दंड भी लागू किया गया है़ कानून के तहत सार्वजनिक स्थल व खुले रूप से ताड़ी की बिक्री पर पूर्णत: रोक व बागानों में लगे ताड़ पेड़ों की संख्या को स्थानीय थाना में बताना तथा इसकी निगरानी व जांच स्थानीय प्रशासन द्वारा कराने का प्रावधान बनाया गया है़
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